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Makar Sankranti Mahatva: मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं, जानिए इसका महत्व और इतिहास क्या है

Makar Sankranti Kyu Manate Hai (मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं): मकर संक्रांति का दिन गंगा स्नान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा इस दिन दान करना भी अति शुभ माना गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं ये पर्व क्यों मनाया जाता है और इसकी कहानी क्या है।

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Makar Sankranti Kyu Manate Hai

Makar Sankranti Kyu Manate Hai (मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं): जब भी कोई व्रत-त्योहार आता है तो सबसे पहले मन में यही सवाल आता है कि आखिर ये त्योहार मनाया क्यों जाता है या इसका इतिहास क्या है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। ऐसे में इस त्योहार के इतिहास और महत्व के बारे में भी कई लोग जानने के इच्छुक होंगे। इसलिए यहां हम आपको बताने जा रहे हैं मकर संक्रांति पर्व की शुरुआत कैसे हुई? इसका इतिहास और पौराणिक महत्व क्या है?

मकर संंक्रांति क्यों मनाते हैं (Makar Sankranti Kyu Manate Hai)

सूर्य देव जब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। सूर्य देव अमूमन 14 या 15 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही है। हिंदू धर्म ग्रंथों अनुसार इस त्योहार को मनाने के पीछे कई कारण है। मकर संक्रांति त्यौहार से जुड़ी एक कथा बताती है कि जब पृथ्वी पर असुरों का आतंक काफी बढ़ गया था तब मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने असुरों का संहार किया और सभी को उनके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। कहते हैं भगवान विष्णु ने असुरों के सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। मान्यता है कि, तभी से इस पर्व को नकारात्मकता को समाप्त करने वाले दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

मकर संक्रांति का इतिहास (Makar Sankranti History In Hindi)

कहते हैं मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जा मिली थी। इसकी कारण मकर संक्रांति के पवित्र दिन पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा ये पर्व मौसम में बदलाव का भी प्रतीक भी माना जाता है। इसके बाद से ही ठंड कम होने लगती है। इसके अलावा ऐसा भी कहा जाता है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपने शरीर का त्याग करने के लिए मकर संक्रांति का दिन ही चुना था।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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