Diesel ATF Windfall Tax : कच्चे तेल की कीमतों में आई स्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स को लगभग दोगुना कर दिया है। वहीं, पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स घटाया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक नई दरें 16 जुलाई, 2026 से लागू हो गई हैं।
क्या घरेलू बाजार में होगा असर?
सरकार ने साफ किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले मौजूदा उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल पंप पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर नहीं पड़ेगा।
किस ईंधन पर कितना बढ़ा टैक्स?
सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स ₹8.5 से बढ़ाकर ₹15.5 प्रति लीटर कर दिया है, यानी इसमें करीब 82.4% की बढ़ोतरी हुई है। विमान ईंधन (ATF) पर टैक्स ₹7.5 से बढ़ाकर ₹14.5 प्रति लीटर किया गया है, जो करीब 93.3% की बढ़ोतरी है। वहीं, पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स ₹4 से घटाकर ₹2.5 प्रति लीटर कर दिया गया है, यानी इसमें 37.5% की कटौती की गई है।
| ईंधन | पुराना टैक्स | नया टैक्स |
|---|---|---|
| डीजल निर्यात | ₹8.5 प्रति लीटर | ₹15.5 प्रति लीटर |
| एटीएफ निर्यात | ₹7.5 प्रति लीटर | ₹14.5 प्रति लीटर |
| पेट्रोल निर्यात | ₹4 प्रति लीटर | ₹2.5 प्रति लीटर |
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
मार्च से मई के दौरान क्रूड ऑयल के दाम अमेरिका और ईरान युद्ध की वजह से बहुत बढ़ गए थे। लेकिन, अब दाम में स्थिरता आई है। इससे तेल कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने पर अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है। इस वजह से सरकार ने निर्यात से होने वाले मुनाफे पर टैक्स बढ़ा दिया है।
आम लोगों पर क्या असर होगा?
फिलहाल इस फैसले से आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोल पंप पर मिलने वाले ईंधन की कीमतें इस आदेश से सीधे नहीं बदलेंगी। यह टैक्स केवल निर्यात होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू है।
हर 15 दिन में होती है समीक्षा
सरकार ने बताया कि पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क एवं अवसंरचना उपकर की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है। नई दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। इससे पहले संशोधन 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ था।
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