Why Mahashivratri is celebrated (महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है): शिव की महान रात्रि जिसे महाशिवरात्रि कहा जाता है, भारत के आध्यात्मिक उत्सवों में से एक है जिसका विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन शिव मंदिरों में हर्ष और उल्लास का माहौल रहता है। बड़ी संख्या में भक्त महादेव के दर्शनों के लिए यहां पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा, जप और व्रत करते हैं। भगवान शिव जो कि त्रिमूर्ति में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बाद संहारक की भूमिका निभाते हैं, संसार की नकारात्मकता का विनाश करके धर्म की पुनः स्थापना करते हैं। देवाधिदेव महादेव को देवता, मनुष्य, राक्षस, यक्ष, भूत और पशु समेत संसार के सभी प्राणी पूजते हैं जिनपर भोलेनाथ अपनी कृपा बरसाते हैं। केवल सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि महाशिवरात्रि की पावन तिथि का धार्मिक महत्व भी है जिससे जुड़ी हुई कई पौराणिक मान्यताएं भी हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है (Why Mahashivratri is Celebrated)
पहली कथा- महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन का भी दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। अपने पिता दक्ष के हवन में स्वयं का आत्मदाह कर लेने के बाद माता सती ने माता पार्वती के रूप में पुनः जन्म लिया। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता गौरी ने राजसी सुख त्याग कर वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। जिसके फलस्वरूप महादेव ने माता पार्वती से विवाह किया था। इस दिव्य और अलौकिक विवाह के साक्षी सभी देवी-देवता, ऋषि-मुनि सहित अन्य जीव-जंतु भी हुए थे।
दूसरी कथा- शिव पुराण के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। इनके विवाद को देखकर एक अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ और आकाशवाणी हुई कि जो इस अग्नि स्तंभ के आदि और अंत को जान लेगा वही श्रेष्ठ माना जाएगा। भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु युगों तक प्रयास करते रह गए लेकिन अग्नि स्तंभ के रहस्य को नहीं जान पाए। तब भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा ने अपनी पराजय स्वीकार कर ली। इसके बाद भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा ने उस अग्नि स्तंभ की पूजा की। इसके बाद वो अग्नि स्तंभ एक दिव्य ज्योर्तिलिंग में बदल गया। कहते हैं जिस दिन ये घटना हुई थी वो तिथि महाशिवरात्रि की थी। भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा से पूजित होने के बाद भगवान शिव ने ये वरदान दिया कि महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्त उनके लिंग स्वरूप की पूजा करेगा उसे सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होगी।

Maha Shivratri Ka Mahatva
Mahashivratri ka Dharmik Mahatva In Hindi (महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व)
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव निराकार रूप से साकार रूप में आए थे। इस दिन महादेव की विशेष पूजा होती है जिसमें शिवलिंग का अभिषेक भी किया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक इस दिन भोलेनाथ की पूजा प्रदोष काल में 4 प्रहर की जाती है। ये तिथि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की वर्षगांठ के रूप में भी मनाई जाती है। ईशान संहिता के मुताबिक, फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात्रि में करोड़ों सूर्य के बराबर भगवान शिव शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। इस दिन भगवान शिव को पंचामृत, भांग, धतूरा, बेलपत्र और पुष्प आदि चढ़ाएं जाते हैं।
