अध्यात्म

कौन हैं मां खीर भवानी देवी? जहां कुंड के पानी का रंग बताता है कश्मीर का भविष्य

Maa Kheer Bhawani Temple : धरती के स्वर्ग कहे जाने कश्मीर में मां खीर भवानी का मंदिर बेहद प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां के कुंड पानी आने वाली घटनाओं की जानकारी देता है। बीते 22 जून को यहां मेला भी आयोजित हुआ।

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मां खीर भवानी मंदिर

Maa Kheer Bhawani Temple : कश्मीर की खूबसूरत वादियों में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जो सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि अपने रहस्यमयी कुंड के कारण भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह मंदिर है मां खीर भवानी का, जिसे कश्मीरी हिंदुओं की सबसे पवित्र तीर्थ स्थली माना जाता है। मान्यता है कि यहां स्थित पवित्र कुंड के पानी का रंग बदलना कश्मीर में आने वाले अच्छे या बुरे समय का संकेत देता है। बीते 22 जून को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हजारों संख्या में भक्तों ने मां के दर्शन किए। चिनार के विशाल वृक्षों की छाया में स्थित इस मंदिर में देशभर से श्रद्धालुओं का सैलाब आया। इस दौरान यहां पर मेला भी आयोजित किया जाता है। कश्मीरी पंडित मां खीर भवानी को अपनी कुलदेवी मानते हैँ।

गांदरबल जिले के तुलमुला गांव में स्थित मां खीर भवानी मंदिर को रागन्या देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। हर साल ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी के दिन यहां खीर भवानी मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त माता को दूध और खीर अर्पित करते हैं, इसी परंपरा के कारण देवी का नाम खीर भवानी पड़ा।

कौन हैं मां खीर भवानी देवी

मां खीर भवानी को माता रागन्या देवी, महाराज्ञा देवी और रागन्या भगवती के नाम से भी जाना जाता है। कश्मीरी पंडित समुदाय में माता खीर भवानी को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि मां रागन्या देवी शक्ति स्वरूपा हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।

धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता रागन्या देवी पहले लंका में विराजमान थीं और रावण उनकी पूजा करता था। माता उसकी आराधना से प्रसन्न थीं, लेकिन जब रावण ने अधर्म का मार्ग अपनाया तो देवी उससे नाराज हो गईं। मान्यता है कि इसके बाद माता ने लंका छोड़ने का निर्णय लिया और हनुमान जी को आदेश दिया कि वह उन्हें कश्मीर की धरती पर ले जाएं। इसके बाद माता तुलमुला क्षेत्र में विराजमान हुईं। कहा जाता है कि रावण माता को खीर का भोग लगाया करता था। इसी कारण बाद में देवी को खीर भवानी के नाम से प्रसिद्धि मिली।

कैसे हुई मंदिर की स्थापना

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कश्मीर के प्राचीन सतीसर क्षेत्र में माता का स्थान समय के साथ जलमग्न हो गया था। बाद में एक भक्त योगी कृष्ण पंडित को स्वप्न में देवी ने दर्शन दिए और उन्हें अपने स्थान के बारे में बताया। कथा के अनुसार, देवी ने उन्हें उस स्थान तक पहुंचने का मार्ग बताया जहां वह पुनः स्थापित होना चाहती थीं। इसके बाद वहां खोज की गई और पवित्र स्थान की पहचान हुई। इसके बाद में यहां मंदिर का निर्माण किया गया। आज यह स्थान कश्मीरी हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।

रहस्यमयी है यहां का कुंड

मां खीर भवानी मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां मौजूद पवित्र कुंड है। इस कुंड के पानी को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस कुंड के पानी का रंग बदलना भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देता है।

मान्यता के अनुसार, जब कुंड का पानी काला या गहरे रंग का हो जाता है तो इसे कश्मीर पर आने वाले किसी बड़े संकट का संकेत माना जाता है। हालांकि इसके पीछे वैज्ञानिक कारणों को लेकर भी अध्ययन होते रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह कुंड आज भी आस्था और विश्वास का केंद्र है।

कहा जाता है कि कई महत्वपूर्ण घटनाओं से पहले कुंड के पानी में बदलाव देखा गया था। वर्ष 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के समय और 2014 में कश्मीर में आई विनाशकारी बाढ़ से पहले भी जल के रंग में बदलाव की बात कही जाती है।

ग्रंथों में भी मिलता है जिक्र

मां खीर भवानी मंदिर का उल्लेख कश्मीर के प्राचीन इतिहास में भी मिलता है। प्रसिद्ध इतिहास ग्रंथ राजतरंगिणी में तुलमुल क्षेत्र के पवित्र कुंड का वर्णन मिलता है। इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थान सदियों से कश्मीरी ब्राह्मणों की पूजा और साधना का केंद्र रहा है। कई संतों और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों ने भी यहां आकर माता के दर्शन किए हैं।

क्यों चढ़ाई जाती है दूध और खीर

मां खीर भवानी मंदिर में भक्त दूध, खीर और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि माता को खीर का भोग लगाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति आती है। ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी के दिन यहां विशेष पूजा होती है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र कुंड में पूजा सामग्री अर्पित करते हैं और माता से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।

क्यों खास है खीर भवानी मंदिर का मेला

खीर भवानी मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कश्मीरी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक भी है। कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए यह अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ने का अवसर होता है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु तुलमुला पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं। मंदिर परिसर में भक्ति, संस्कृति और आपसी भाईचारे का अनोखा वातावरण देखने को मिलता है।

जम्मू में भी है मां खीर भवानी का मंदिर

कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के बाद जम्मू में भी मां रागन्या देवी का मंदिर स्थापित किया गया। इसका उद्देश्य माता की परंपरा और आस्था को बनाए रखना था। आज जम्मू और कश्मीर दोनों जगह मां खीर भवानी के मंदिरों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आस्था और रहस्य का संगम है मां खीर भवानी मंदिर

मां खीर भवानी मंदिर कश्मीर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां मौजूद पवित्र कुंड का रहस्य, माता रागन्या देवी की कथा और हजारों वर्षों पुरानी परंपराएं इसे विशेष बनाती हैं। भक्तों के लिए यह सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि विश्वास, सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है। यही कारण है कि हर साल हजारों लोग यहां पहुंचकर माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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