अध्यात्म

Chanakya Niti: जीवन की ये तीन गलतियां पड़ती है बहुत भारी, सफलता और धन हो जाता है दूर

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 25, 2023, 10:07 PM IST

Chanakya Niti in Hindi: आचार्य चाणक्‍य ने सफलता और धन प्राप्‍त करने के कई उपाय बताए हैं। आचार्य कहते हैं कि धन अर्जित करने के लिए व्‍यक्ति को हमेशा तीन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए। जो व्‍यक्ति जीवन में ये तीन गलतियां करता है, उससे लक्ष्‍मी जी नाराज होकर दूर चली जाती हैं। ऐसे लोग अपने जीवन में असफल रहते हैं।

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मनुष्‍य की इन गलतियों से लक्ष्‍मी जी हमेशा रहती हैं नाराज

KEY HIGHLIGHTS
  • अहंकारी व्‍यक्ति से लक्ष्‍मी जी हमेशा रहती हैं दूर
  • कठोर वाणी बोलने वालों को कोई नहीं करता पसंद
  • आलस अपनाने वालों को सफलता और धन नहीं मिलता

Chanakya Neeti in Hindi: आचार्य चाणक्‍य ने नीतिशास्‍त्र में बताया है कि व्‍यक्ति को धन प्राप्त के लिए सदैव कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर व्‍यक्ति लापरवाही करता है और इन बातों का ध्‍यान नहीं रखता तो उससे धन की देवी मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि मां लक्ष्‍मी की कृपा से ही व्‍यक्ति को धन और सफलता मिलता है। इनके आशीर्वाद से ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आचार्य कहते हैं कि कलयुग में धन के होने से ही व्यक्ति का विकास होता है और उसे समाज में सम्‍मान मिलता है। इसके बगैर जीवन संभव नहीं। इसलिए मां लक्ष्‍मी को नाराज करने वाली ये तीन गलती मनुष्‍य को भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।

खुद को सबसे बेहतर न समझें

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्‍यक्ति को कभी भी खुद को सबसे बेहतर नहीं समझना चाहिए। मनुष्‍य हर समय दूसरों से कुछ न कुछ सीखता रहता है। जिस व्‍यक्ति के अंदर दूसरों से श्रेष्ठ होने की भावना आ जाती है, वह नई चीजें सीखना बंद कर देता है। यह अहंकार की निशानी है, जो उसे गलत रास्‍ते पर ले जाती है। ऐसे व्‍यक्ति की प्रतिभा नष्ट होने लगती है और उसे आगे चलकर कई तरह के चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अहंकार और अहंकारी व्‍यक्ति को लक्ष्मी जी भी पसंद नहीं करती और छोड़कर चली जाती हैं।

कठोर वाणी वाले

आचार्य चाणक्य का मानना है कि मनुष्‍य को हमेशा ऐसी वाणी बोलनी चाहिए, जो दुसरों को सुनने में मधुर लगे। कभी भी किसी से बातचीत के दौरान कठोर वाणी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। मीठी वाणी बोलने वाले लोग हर जगह तरक्की करते हैं। ऐसे लोग सभी का प्रिय बनकर सम्मान पाते हैं। वहीं, जो लोग कठोर व कड़वे शब्‍दों का उपयोग करते हैं, वे हमेशा कई तरह की परेशानियों से घिरे रहते हैं। इसे लोगों से सभी लोग दूरी बनाकर रहना पसंद करते हैं। ऐसे लोगों को न तो तरक्‍की मिल पाती है और न ही सफलता। ऐसे लोगों से लक्ष्‍मी जी भी दूरी बनाकर रहती है।

आलस कभी न करें

आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि, आलस मनुष्‍य जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है। ऐसे लोगों से लक्ष्‍मी जी हमेशा नाराज रहती हैं। इन्‍हें जीवन में न तो सफलता मिल पाती है और न ही धन। आचार्य कहते हैं कि, जिस व्‍यक्ति को धन व वैभव चाहिए, उसे सबसे पहले आलस छोड़ना पड़ेगा। आलस से दूर रहकर मेहनत करने वाले को ही लक्ष्‍मी जी अपनाती है।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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