अध्यात्म

क्या किचन में मंदिर होना चाहिए, रसोई घर में मंदिर बनाने से क्या होता है

Kya Kitchen Mei Mandir Rakh Sakte Hai: आजकल लोग छोटे फ्लैट्स और घरों में जगह की कमी के चलते किचन या उसके पास मंदिर रख देते हैं। ऐसे में ये जानना बहुत आवश्यक है कि क्या वास्तु के अनुसार इस जगह मंदिर रखना शुभ होता है?

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किचन में मंदिर रखना चाहिए या नहीं

Kya Kitchen Mei Mandir Rakh Sakte Hai: भारतीय घरों में मंदिर का बहुत खास महत्व होता है। लोग घर में ऐसी जगह मंदिर बनाना चाहते हैं, जहां शांति, सकारात्मकता और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहे। लेकिन आजकल छोटे घरों और फ्लैट्स में जगह की कमी के कारण कई लोग किचन यानी रसोईघर में ही छोटा मंदिर बना लेते हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या किचन में मंदिर बनाना सही होता है? वास्तु शास्त्र इस बारे में क्या कहता है? आइए विस्तार से जानते हैं।

क्या किचन में मंदिर रख सकते हैं

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का हर हिस्सा किसी न किसी ऊर्जा तत्व से जुड़ा होता है। रसोईघर को अग्नि तत्व का स्थान माना गया है, क्योंकि यहां भोजन पकता है और लगातार आग का प्रयोग होता है। वहीं, मंदिर को शांति, ध्यान, आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक कंपन का स्थान माना जाता है। इसी वजह से वास्तु में किचन और मंदिर की ऊर्जा अलग मानी गई है। एक तरफ रसोईघर में गतिविधि, गर्मी और शोर रहता है, जबकि मंदिर के लिए शांत और स्थिर वातावरण जरूरी बताया गया है।

वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार किचन में मंदिर बनाना उचित नहीं माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर की आध्यात्मिक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। रसोईघर में लगातार खाना बनता है, बर्तन धुलते हैं, मसालों और तेल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में वहां पूजा स्थल की पवित्रता बनाए रखना कठिन हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर ऐसा स्थान होना चाहिए जहां मन शांत होकर पूजा कर सके, लेकिन किचन का वातावरण अक्सर व्यस्त और सक्रिय रहता है। यही कारण है कि वास्तु विशेषज्ञ मंदिर को रसोईघर से अलग रखने की सलाह देते हैं।

किचन में मंदिर होने से क्या होता है

मान्यता है कि किचन में मंदिर बनाने से घर में मानसिक अशांति, तनाव या ऊर्जा असंतुलन की स्थिति बन सकती है। कुछ लोग इसे अग्नि तत्व और आध्यात्मिक ऊर्जा के टकराव से जोड़कर देखते हैं। इसके अलावा किचन में तेल, धुआं और गर्मी के कारण मंदिर की साफ-सफाई और पवित्रता बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वास्तु में इसे आदर्श स्थान नहीं माना गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि घर में कोई बड़ा दोष पैदा हो जाएगा। कई लोग जगह की कमी के कारण ऐसा करते हैं। ऐसे में कुछ वास्तु नियमों का ध्यान रखना जरूरी बताया जाता है।

अगर किचन में मंदिर बनाना पड़े तो क्या करें

अगर घर छोटा है और अलग पूजा घर बनाना संभव नहीं है, तो कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है। मंदिर को गैस चूल्हे के ठीक ऊपर या सामने नहीं रखना चाहिए। कोशिश करें कि मंदिर और खाना बनाने की जगह के बीच थोड़ी दूरी रहे। मंदिर को साफ और ऊंचे स्थान पर रखें। वहां रोज सफाई करें और तेल, धुआं या गंदगी न पहुंचने दें। वास्तु के अनुसार मंदिर को उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण की तरफ रखना सबसे शुभ माना जाता है। यदि किचन में यही दिशा उपलब्ध हो तो वहां छोटा पूजा स्थान बनाया जा सकता है।

मंदिर बनाने के लिए घर की सबसे शुभ दिशा कौन सी है

वास्तु शास्त्र में घर का उत्तर-पूर्व कोना यानी ईशान कोण मंदिर के लिए सबसे शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिशा में सकारात्मक और दिव्य ऊर्जा का प्रवाह सबसे ज्यादा होता है। अगर संभव हो तो मंदिर हमेशा अलग और शांत स्थान पर बनाना चाहिए, जहां बैठकर ध्यान और पूजा आसानी से की जा सके।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारी author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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