Krishna Janmashtami 2025 Shlok Mantras (श्री कृष्ण जन्माष्टमी श्लोक, मंत्र): श्रीकृष्ण श्लोकों का महत्व अत्यंत गहरा और आध्यात्मिक है। ये श्लोक सिर्फ स्तुति के शब्द नहीं होते, बल्कि भगवान कृष्ण के दिव्य गुण, लीलाओं और आध्यात्मिक शिक्षाओं का सार होते हैं। श्रीकृष्ण के श्लोकों का जाप करने से मन को शांति मिलती है, बुद्धि निर्मल होती है और आत्मा ईश्वर से जुड़ती है। खासतौर से वासुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्... जैसे श्लोक श्रीकृष्ण के रक्षक स्वरूप को उजागर करते हैं, जबकि भगवद्गीता के श्लोक जीवन के हर संकट में मार्गदर्शन देते हैं। इन श्लोकों का जाप जन्माष्टमी के दिन जरूर करना चाहिए। यहां से आप कान्हा जी के श्लोक, मंत्र देख सकते हैं।
Janmashtami Shloka, Mantra In Sanskrit (जन्माष्टमी के श्लोक और मंत्र)
1. श्रीकृष्णाष्टकम् (संकल्प के लिए)
वासुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ।
देवकीपरमानंदं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
अर्थ- मैं उस कृष्ण को प्रणाम करता हूँ, जो वासुदेव के पुत्र हैं, जो कंस और चाणूर का संहारक हैं, देवकी के परम आनंद हैं और जगत के गुरू हैं।
2. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्लोक
श्रीकृष्ण जन्म शुभ मुहूर्ते,
सर्व संकट निवारक दूते।
माखन चोर, मुरलीधर,
भक्तजन हितकारी अधीर।
जय श्रीकृष्ण जय जय गोपाल,
भवसागर तराने वाले पालनहार।
3. भगवान कृष्ण की महिमा
मधुसूदनं नमामि देवमध्यस्थं जगत्पतेम् ।
सर्वकामदं सर्वेशं शान्ताकारं भुजगशय्यकम् ॥
अर्थ- मैं मधुसूदन (कृष्ण) को नमस्कार करता हूँ, जो जगत के बीच में विराजमान हैं, सभी इच्छाओं को पूरा करने वाले, सबके स्वामी, और शांति के दाता हैं।
Shri Krishna Shloka In Sanskrit (कान्हा जी के श्लोक) -
4. श्रीकृष्ण की आरती श्लोक
जय कन्हैया लाल की, जय गिरिधर गोपाल की।
जय राजाधिराज की, जय भूपति बल्लभ की।
5. श्रीकृष्णाष्टक (पं. तुलसीदास द्वारा)
गोविन्दं उमापतिं विष्णुं
श्रीधरं मुरारि चौधरीम्।
जगदेकं महादेवं देवं
सर्वलोकैकनाथमार्गदम्॥
अर्थ- गोविंद (कृष्ण), उमापति (शिव), विष्णु, श्रीधर (विष्णु का एक नाम), मुरारी (राक्षस मुर का संहारक), जगत का एकमात्र भगवान, महादेव, सब लोकों के स्वामी मार्गदर्शक को मैं नमन करता हूँ।
Bhagavad Gita Shlok In Hindi (भगवद गीता के श्लोक) -
6. भगवद्गीता से श्लोक (अर्जुन की उपासना)
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥
(भगवद्गीता 9.34)
अर्थ- हे अर्जुन, मुझमें मन लगाओ, मेरी भक्ति करो, मेरी पूजा करो और मुझे प्रणाम करो। मैं निश्चित ही तुम्हारे पास आऊंगा क्योंकि तुम मेरे प्रिय हो।
7. भगवत गीता श्लोक हिंदी
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ- हे अर्जुन कर्म तुम्हारा अधिकार है लेकिन फल की चिंता करना तुम्हारा अधिकार नहीं है। इसलिए फल की इच्छा छोड़कर कर्म करो।
