Kharmas Ke Niyam: सनातन धर्म में खरमास का बहुत ही अधिक महत्व है। जिस समय में ग्रहों के राजा सूर्य ग्रह मीन और धनु राशि में प्रवेश करते हैं। उस समय में खरमास लगता है। खरमास के समय में मांगलिक काम करना वर्जित होता है। दिसंबर के महीने में खरमास 15 दिसंबर 2024 को लगेगा। इसी दिन सूर्य ग्रह रात 08 बजकर 49 मिनट पर धनु राशि में गोचर करेंगे। ये खरमास साल 2025 में मकर संक्रांति तक रहेगा। ऐसे में 15 दिसंबर से लेकर 15 जनवरी तक खरमास रहने वाला है। इस एक महीने के दौरान शादी, विवाह जैसे मांगलिक काम नहीं किये जाएंगे। आइए जानते हैं कि खरमास क्यों लगता है और इसके नियम के बारे में।
Kharmas Kyun Lagta hai (खरमास क्यों लगता है)
हिंदू पंचांग के अनुसार जिस समय में सूर्य ग्रह धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। उस समय में खरमास लगता है, इसलिए खरमास साल में दो बार लगता है। ऐसा माना जाता है कि खरमास के समय में सूर्य देवता अपनी गुरु यानि गुरु ग्रह की सेवा में लगे रहते हैं। इस कारण खरमास के समय में वो किसी भी तरह के मांगलिक कार्य में भाग नहीं लेते हैं, इसलिए खरमास के समय में कोई भी मांगलिक काम नहीं किया जाता है। खरमास में शुभ काम इसलिए भी नहीं होते हैं क्योंकि इस समय में सूर्य का तेज कम हो जाता है। सूर्य के तेज के बिना कोई भी मांगलिक काम पूरा नहीं होता है।
Kharmas Ke Niyam (खरमास के नियम)
- खरमास के दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्य ना करें।
- इस समय में भगवान विष्णु और सूर्य देव की उपासना जरूर करें।
- खरमास के समय में अपनी क्षमतानुसार दान- पुण्य करना चाहिए।
- खरमास के समय में कोई भी नया काम शुरू ना करें।
- इस समय में तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए।
खरमास में तुलसी पूजन का महत्व (Kharmas Tulsi Puja Importance)
खरमास में तुलसी पूजन का खास महत्व है। हिंदू धर्म में तुलसी माता को पूजनीय माना गया है। खरमास के समय में नकारात्मक ऊर्जा अधिक प्रबल हो जाती है, इसलिए इस समय में घर में सकारात्मकता लाने के लिए तुलसी जी की पूजन करना शुभ होता है। इस समय में तुलसी में जल चढ़ाने से और शाम के समय में तुलसी में दीपक जलाने से घर से सारे दोष दूर हो जाते हैं और लक्ष्मी जी की कृपा भी घर पर बनती है।
