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300 रुपये की दिहाड़ी करने वाली मां के बेटे ने रचा इतिहास, IIT मद्रास से बनेगा इंजीनियर

Success Story: ईंट-भट्ठे पर रोजाना 300 रुपये कमाने वाली मां के त्याग और संघर्ष से उनके बेटे लोकेश ने अभावों को मात देकर देश की सबसे कठिन परीक्षा जेईई और जेईई एडवांस्ड पास कर सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थान IIT मद्रास में दाखिला प्राप्त किया है। आइए उनकी प्रेरणादायक सफर के बारे में जानें।

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300 रुपये की दिहाड़ी करने वाली मां के बेटे ने रचा इतिहास (Photo - AI)

Success Story: जब हौसले बुलंद हों और इरादे फौलादी, तो अभावों का हर पहाड़ छोटा लगने लगता है। इस बात को सच कर दिखाया तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले की रहने वाली मां के बेमिसाल त्याग और उसके बेटे की अटूट तपस्या ने। जी हां, विरुधुनगर जिले में एक ऐसी मां है, जिसने अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए जिंदगी भर ईंट-भट्ठों की भीषण गर्मी में खुद को तपाया, आज उनका बेटा देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी मद्रास में एडमिशन लेकर अपनी कामयाबी के परचम लहरा रहा है। आइए आपको इनकी सफलता की प्रेरणादायक कहानी सुनाए, जो आप में भी कुछ कर दिखाने की इच्छा के साथ उसे करने का जोश भी भर देगी।

सुबह 3:30 बजे से शुरू होती थी मां की 'अग्निपरीक्षा'

यह कहानी तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले की रहने वाली 44 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर एम. अमरावती और उनके 18 वर्षीय बेटे एम. लोकेश की। द न्यू इंडिया एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जब लोकेश महज चार साल का था, तभी उनके सर से पिता का साया उठ गया था। लेकिन उनकी मां अमरावती के सामने तीन बच्चों की परवरिश थी। इस बड़ी चुनौती से बिमा डरे और हार माने उन्होंने ईंट-भट्ठों पर मजदूरी कर रोजाना 300 रुपये कमाना शुरू किया, ताकि वह अपने बच्चे का भरण-पोषण कर सकें और उनके शिक्षा दे सकें।

अमरावती रोज सुबह 3:30 बजे जब दुनिया सो रही होती थी, तब वह काम के लिए घर से निकलती थी। मां के काम पर जाने के उनके बच्चे खुद खाना बनाकर पड़ोसियों के पास रखे जाते थे, ताकि स्कूल से आकर खा सकें। चाहे हाड़ कंपाने वाली बारिश हो या झुलसा देने वाली तेज धूप, अमरावती के कदम बच्चों की जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटे। इसके पीछे की वजह सिर्फ इतनी सी थी कि वह अपने बच्चों को एक बेहतर जिंदगी देने चाहती थी। इसलिए तमाम चुनौतियों के बीच उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत करती गई।

बेटे ने किया नाम रोशन

अमरावती के इस सफर में वह अकेली नहीं थी, उनके बच्चे उनके सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत में लगे थे। अपनी मां के त्याग और खून पसीने की कमाई को उनके बेटे लोकेश ने बेकार नहीं जाने दिया और वह कर दिखाया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। लोकेश ने म्युनिसिपल स्कूल से देश के नंबर 1 संस्थान का सफर तय किया। सफर लंबा था लेकिन फलदायी साबित हुआ।

म्युनिसिपल स्कूल से देश के नंबर-1 संस्थान का सफर

लोकेश ने अपनी शुरुआती पढ़ाई एक साधारण म्युनिसिपल टीवीके हायर सेकेंडरी स्कूल से की। सुविधाओं की कमी के बावजूद, लोकेश ने अपनी किताबों को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उनकी सालों की कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा आज सामने है। लोकेश ने अपनी कड़ी मेहनत से देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षाओं में से एक—जेईई मेन और एडवांस्ड को न सिर्फ पास किया, बल्कि देश के नंबर वन इंजीनियरिंग संस्थान IIT मद्रास में दाखिला हासिल किया। लोकेश ने यहां बीटेक इन केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स में प्रवेश लिया है।

'दिशाई' कार्यक्रम ने बदली किस्मत

लोकेश ने बताया कि उनकी इस अविश्वसनीय सफलता के पीछे जिला प्रशासन की एक बेहतरीन सोच का भी बड़ा हाथ रहा है। विरुधुनगर जिला प्रशासन द्वारा 'दिशाई' (Disai) कार्यक्रम चलाया जाता था। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के होनहार छात्रों को जेईई , नीट और सीयूईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से मुफ्त आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाती थी। लोकेशन ने इसी में हिस्सा लिया था और आज वह आईआईटी मद्रास में है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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