अध्यात्म

Karva Chauth ki Kahani: करवा चौथ व्रत कथा हिंदी में लिखित, पढ़ें साहूकार और उनके 8 बच्चों की कहानी यहां

karwa Chauth Vrat Puja Katha (करवा चौथ के व्रत कथा) Kava Chauth Festival Fast Vrat Ki Kahani Hindi Likhit Mein, Karwa Chauth Ki Katha PDF: करवाचौथ के दिन महिलाएं इकट्ठा होकर इसकी व्रत कथा जरूर पढ़ती हैं। इससे बिना करवा चौथ का व्रत अधूरा माना जाता है। यहां से आप करवा चौथ व्रत की कथा और कहानी देख सकते हैं।

करवा चौथ व्रत कथा (pic credit: pinterest)

karwa Chauth Vrat Puja Katha, Karwa Chauth Ki kahani PDF (करवा चौथ के व्रत कथा): करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इस दिन पूरे विधि के साथ और नियमों का पालन करते हुए पूजा की जाती है। शाम में चंद्रोदय का इंतजार होता है और फिर चंद्र दर्शन और पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है। करवा चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ने का विशेष महत्व होता है। इस दिन साहूकार और उनके आठ बच्चों की कहानी महिलाएं एक दूसरे को सुनाती हैं और करवा चौथ माता की जय जयकार करती हैं।

करवा चौथ व्रत की कहानी (Karwa Chauth Vrat Ki Kahani)-

कथा के अनुसार एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। सभी का विवाह हो चुका था। एक बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा। रात में जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने के लिए बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन करने के लिए कहा। लेकिन बहन ने तो व्रत रखा था। बहन ने अपने भाई से कहा अभी चांद नहीं निकला है। मैं चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही भोजन करूंगी।

चूंकि साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, इसलिए उनसें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देखा नहीं जा रहा था।

तब साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां पर उन्होंने एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा कि देखों चांद आ गया है। अब तुम अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से भी कहा चांद को अर्घ्य देने का कहा लेकिन ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

लेकिन साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों की बात को अनसुनी कर दिया और उसने भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इससे उसका करवा चौथ का व्रत भंग हो गया। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और उसके घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी को सही करने में लग गया।

साहूकार की बेटी को जब अपने दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने व्रत के दौरान उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा भाव को देखकर भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हुए और उसके पति को उन्होंने जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

बोलो करवा चौथ माता की जय !

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Srishti
Srishti Author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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