Kalawa Bandhne Ka Tarika (कलावा बांधने का तरीका): सनातन धर्म में कलावा बांधने का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस परंपरा की शुरुआत मां लक्ष्मी और राजा बलि ने की थी। कहते हैं माता लक्ष्मी ने अपने पति यानी भगवान विष्णु के प्राणों की रक्षा के लिए राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा था। वहीं वेदों वेदों में बताया गया है कि जब इंद्र वृत्रासुर से युद्ध के लिए जा रहे थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने उनके दाहिनी भुजा पर कलावा बांधा था। यानी कलावा बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन इसे बांधने का सही तरीका क्या है इसके बारे में आज भी कई लोग नहीं जानते होंगे।
कलावा बांधने का सही तरीका
- बाबा बागेश्वर ने कलावा बांधने की विधि बताई है जिनके अनुसार आपको दाएं हाथ में चावल और दक्षिणा लेकर किसी योग्य आचार्य से कलावा अभिमंत्रित करवाना है।
- इसके लिए कलावा को दोनों हाथों के बराबर नाप लेना है या यूं कहें कि पैर से सिर तक का कलावा नाप लें।
- कलावा नापने के बाद उसको तोड़ लें फिर उसको गायत्री मंत्र द्वारा अभिमंत्रित कराएं।
- फिर जिस हाथ में कालावा बंधवाना है उस हाथ में चावल और दक्षिणा लें और एक हाथ सिर पर पीछ की तरफ रखें।
- फिर आचार्य के द्वारा बोले गए मंत्र के साथ कलावा को बंधवाना चाहिए।
- इसके बाद वो दक्षिणा और अक्षत आचार्य के चरणों में रख देना चाहिए।
कलावा बांधने के नियम
कलावा बांधने का मंत्र (Kalawa Bandhne Ka Mantra)
येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः
तेन त्वां मनु बध्नामि, रक्षे माचल माचल
