अध्यात्म

बाबा बागेश्वर ने बताया कलावा बांधने का सही तरीका, जानिए कितनी होनी चाहिए कलावे की लंबाई और किससे बंधवाना चाहिए

Kalawa Bandhne Ka Tarika: हिंदू धर्म में कलावा बांधने की परंपरा काफी पुरानी है। ये रक्षा सूत्र होता है जो पूजा के समय बांधा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाथ में कितना लंबा कलावा बांधना चाहिए और इसे बांधने की विधि क्या है। बाबा बागेश्वर ने कलावा बांधने के सही तरीके के बारे में बताया है। चलिए जानते हैं।

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Kalawa Bandhne Ka Tarika

Kalawa Bandhne Ka Tarika (कलावा बांधने का तरीका): सनातन धर्म में कलावा बांधने का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस परंपरा की शुरुआत मां लक्ष्मी और राजा बलि ने की थी। कहते हैं माता लक्ष्मी ने अपने पति यानी भगवान विष्णु के प्राणों की रक्षा के लिए राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा था। वहीं वेदों वेदों में बताया गया है कि जब इंद्र वृत्रासुर से युद्ध के लिए जा रहे थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने उनके दाहिनी भुजा पर कलावा बांधा था। यानी कलावा बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन इसे बांधने का सही तरीका क्या है इसके बारे में आज भी कई लोग नहीं जानते होंगे।

कलावा बांधने का सही तरीका

  • बाबा बागेश्वर ने कलावा बांधने की विधि बताई है जिनके अनुसार आपको दाएं हाथ में चावल और दक्षिणा लेकर किसी योग्य आचार्य से कलावा अभिमंत्रित करवाना है।
  • इसके लिए कलावा को दोनों हाथों के बराबर नाप लेना है या यूं कहें कि पैर से सिर तक का कलावा नाप लें।
  • कलावा नापने के बाद उसको तोड़ लें फिर उसको गायत्री मंत्र द्वारा अभिमंत्रित कराएं।
  • फिर जिस हाथ में कालावा बंधवाना है उस हाथ में चावल और दक्षिणा लें और एक हाथ सिर पर पीछ की तरफ रखें।
  • फिर आचार्य के द्वारा बोले गए मंत्र के साथ कलावा को बंधवाना चाहिए।
  • इसके बाद वो दक्षिणा और अक्षत आचार्य के चरणों में रख देना चाहिए।

कलावा बांधने के नियम

कलावा बांधने का मंत्र (Kalawa Bandhne Ka Mantra)

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः

तेन त्वां मनु बध्नामि, रक्षे माचल माचल

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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