Kal kya hai 1 March 2026 (kal kaun sa vrat hai), Is Pradosh vrat tomorrow: मार्च का पहला दिन धार्मिक दृष्टि से खास रहने वाला है। जो लोग पंचांग और व्रत-त्योहारों पर नजर रखते हैं, उनके मन में यह सवाल जरूर है कि 1 मार्च 2026 को कौन सा व्रत है, क्या इस दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा और उस दिन की तिथि क्या रहेगी?
कल क्या है 1 मार्च 2026 को
1 मार्च 2026 को कौन सा व्रत है, तो बता दें कि इस दिन फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी रहेगी और रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। संध्या समय विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ रहेगा।
कल 1 मार्च 2026 को कौन सी तिथि है
हिंदू पंचांग के अनुसार 1 मार्च 2026, रविवार का दिन रहेगा। इस दिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ लगभग 28 फरवरी 2026 की रात 08:45 बजे से होगा और इसका समापन 1 मार्च 2026 की रात 10:18 बजे के आसपास होगा।
कल 1 मार्च 2026 को सूर्योदय का समय
धार्मिक कार्यों में सूर्योदय का विशेष महत्व होता है। 1 मार्च 2026 को सूर्योदय सुबह लगभग 6:48 बजे (दिल्ली-एनसीआर के आसपास) होगा। सूर्योदय के समय स्नान-ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह की पहली किरण के साथ भगवान शिव का स्मरण करने से दिन मंगलमय माना जाता है।
क्या 1 मार्च 2026 को प्रदोष व्रत है?
जी हां, 1 मार्च 2026 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। चूंकि यह दिन रविवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि की संध्या बेला में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। रवि प्रदोष विशेष रूप से स्वास्थ्य, मान-सम्मान और लंबी आयु के लिए शुभ माना जाता है।
कल 1 मार्च 2026 को प्रदोष व्रत का पूजन समय
प्रदोष व्रत में संध्या काल यानी सूर्यास्त के बाद का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
- 1 मार्च 2026 को प्रदोष काल पूजन समय: शाम 6:05 बजे से रात 8:20 बजे तक
- 1 मार्च 2026 को सूर्यास्त का समय: लगभग शाम 6:18 बजे (दिल्ली के आसपास)
इस समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।
प्रदोष व्रत का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं और देवगण उनकी स्तुति करते हैं। इस पवित्र समय में की गई पूजा कई गुना फल देती है।
जो व्यक्ति नियमित रूप से प्रदोष व्रत करता है, उसके जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। पारिवारिक कलह, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव में राहत मिलती है। रवि प्रदोष का व्रत विशेष रूप से नेत्र, हृदय और स्वास्थ्य से जुड़े लाभ के लिए शुभ माना जाता है।
फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्रत की विधि क्या है
प्रदोष व्रत रखने वाले भक्त प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेते हैं। दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखा जाता है। संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर शिव मंदिर में या घर पर शिवलिंग स्थापित कर पूजा की जाती है। पूजा के बाद कथा श्रवण करना और आरती करना आवश्यक माना गया है। अंत में प्रसाद बांटकर व्रत का पारण किया जाता है। कुछ लोग अगले दिन सुबह व्रत खोलते हैं।
