13 फरवरी 2026 को कौन सी एकादशी का व्रत है, कल कौन सी एकादशी है, कल एकादशी का व्रत कब से है
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Feb 12, 2026, 04:44 PM IST
कल कौन सी एकादशी का व्रत है (Which Ekadashi Vrat tomorrow 13 February 2026): पंचांग के अनुसार कल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की ग्यारस है। इस नाते कल एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यहां से जानें कि कल कौन सा एकादशी है, कल एकादशी का व्रत कितने बजे से शुरू होगा, कल की एकादशी का नाम क्या है।
कल कौन सी एकादशी है 13 फरवरी 2026 को (AI IMAGE- TNN)
कल कौन सी एकादशी का व्रत है (Which Ekadashi Vrat tomorrow 13 February 2026): फरवरी का यह समय धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पड़ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और व्रत रखकर पुण्य की कामना करते हैं। एकादशी का व्रत मन और तन दोनों की शुद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यहां जानें कि कल कौन सी एकादशी का व्रत है।
कल 13 फरवरी 2026 की एकादशी का नाम क्या है?
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। ‘विजया’ अर्थात विजय दिलाने वाली। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई से पहले इसी एकादशी का व्रत किया था, जिससे उन्हें युद्ध में विजय प्राप्त हुई। इसलिए यह एकादशी विशेष रूप से सफलता, बाधा निवारण और कठिन कार्यों में सिद्धि के लिए रखी जाती है।
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि विजया एकादशी का व्रत रखने से जीवन की अड़चनें दूर होती हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। जो लोग किसी महत्वपूर्ण काम की शुरुआत करने वाले हैं या किसी संघर्ष से गुजर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत बेहद शुभ माना गया है।
एकादशी तिथि कब से शुरू होगी?
पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर शुरू होगी और 13 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। एकादशी व्रत का पालन उदया तिथि के अनुसार किया जाता है। इस कारण विजया एकादशी का व्रत शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत कल 13 तारीख को सूर्योदय के साथ आरंभ हो जाएगा।
ध्यान रखें कि व्रत और पारण का समय स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर ले सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग या मंदिर से समय की पुष्टि करना बेहतर रहता है।
एकादशी व्रत का महत्व
एकादशी को ‘हरि दिन’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु विशेष रूप से अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं। व्रत के दौरान अन्न का त्याग कर फलाहार किया जाता है। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत भी रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। विजया एकादशी का व्रत करने से मानसिक शांति, आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है। धार्मिक दृष्टि से यह व्रत पापों के प्रायश्चित और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है। घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है।
विजया एकादशी का व्रत कैसे करें
व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं। तुलसी पत्र, पीले फूल और फल अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। दिन भर संयम और सकारात्मक विचारों के साथ समय बिताएं। एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और श्रद्धा का पर्व है। यदि पूरे विश्वास और भक्ति के साथ यह व्रत रखा जाए तो जीवन में नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार होता है।
