Jyeshtha Month 2026: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह महीना भगवान सूर्य, भगवान विष्णु और विशेष रूप से संकटमोचन हनुमान जी की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 का ज्येष्ठ मास अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आ रहा है, क्योंकि इस बार पूरे आठ बड़े मंगल (Bade Mangal) पड़ रहे हैं। सामान्य वर्षों में जहां चार या पांच बड़े मंगल ही होते हैं, वहीं अधिक मास के कारण इस बार भक्तों को अतिरिक्त पुण्य अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
कब से शुरू होगा ज्येष्ठ मास 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई 2026 से होगी और यह महीना 29 जून 2026 तक चलेगा। इस बार ज्येष्ठ मास के दौरान ही अधिक मास का संयोग बन रहा है, जो इसे और अधिक विशेष बना देता है।
दरअसल, 17 मई 2026 से अधिक मास प्रारंभ होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। चूंकि यह अधिक मास ज्येष्ठ माह के भीतर ही पड़ रहा है, इसलिए इसे ज्येष्ठ अधिक मास कहा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से अधिक मास भगवान विष्णु की उपासना, दान-पुण्य, जप-तप और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्यों खास हैं इस बार के बड़े मंगल
उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश और मध्य भारत में ज्येष्ठ मास के मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है। इन दिनों हनुमान जी की विशेष पूजा, भंडारे, प्रसाद वितरण और सुंदरकांड पाठ की परंपरा रही है।
मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं, रोग-शोक समाप्त होते हैं और साहस व आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। अधिक मास के कारण इस बार ज्येष्ठ का समय लंबा हो गया है, जिससे आठ मंगलवार पड़ रहे हैं और सभी को बड़ा मंगल का दर्जा प्राप्त हो रहा है।
2026 में कब-कब पड़ेंगे बड़े मंगल
इस वर्ष भक्तों को लगातार आठ बड़े मंगल मनाने का अवसर मिलेगा
- 5 मई 2026 — पहला बड़ा मंगल
- 12 मई 2026 — दूसरा बड़ा मंगल
- 19 मई 2026 — तीसरा बड़ा मंगल
- 26 मई 2026 — चौथा बड़ा मंगल
- 2 जून 2026 — पांचवां बड़ा मंगल
- 9 जून 2026 — छठा बड़ा मंगल
- 16 जून 2026 — सातवां बड़ा मंगल
- 23 जून 2026 — आठवां बड़ा मंगल
इतने बड़े मंगल का योग वर्षों बाद बन रहा है, इसलिए इसे अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जा रहा है।
बड़े मंगल पर क्या करें
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़े मंगल के दिन सुबह स्नान कर हनुमान मंदिर में दर्शन करना शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। लाल वस्त्र, सिंदूर, चमेली का तेल, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।
इसके अलावा जल सेवा, शरबत वितरण, गरीबों को भोजन कराना और दान-पुण्य करना भी इस दिन अत्यंत शुभ फल देता है।
