अध्यात्म

जब टूटने लगे हिम्मत, तो जया किशोरी की यह प्रेरणादायक कहानी जरूर याद रखें

Jaya Kishori Motivational Speech: जीवन में कई बार ऐसे क्षण आते हैं जब हम थक जाते हैं, उम्मीद खो बैठते हैं, और लगता है कि अब आगे बढ़ना संभव नहीं। लेकिन हम नहीं जान पाते कि क्या पता अगले ही पल हमें उस कार्य में सफलता मिल जाए।

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प्रवचन: जब टूटने लगे हिम्मत, तो जया किशोरी की यह प्रेरणादायक कहानी जरूर याद रखें

Jaya Kishori Motivational Speech: प्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी ने अपने प्रवचनों में एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सुनाई है, जो हमें सिखाती है कि हार मानना समाधान नहीं, बल्कि हिम्मत रखना ही असली जीत है। जया किशोरी ने एक कहानी के जरिए ये समझाने की कोशिश की है कि सफलता उसे ही मिलती है जो आखिरी दम तक कोशिश करता है क्योंकि मेहनत रंग जरूर लाती है। किसी को जल्दी तो किसी को देर से लेकिन मेहनत का फल जरूर मिलता है। जया किशोरी ने इस बात को एक कहानी के जरिए समझाने की कोशिश की है...

जया किशोरी इस प्रेराणादायक कहानी के बारे में बताते हुए कहती हैं कि एक समय की बात है एक राज्य था। जिसके राजा के सभी मित्र राज्यों के साथ बहुत अच्छे संबंध थे। जिस वजह से सभी राज्य उनके लिए आए दिन कुछ न कुछ भेजते रहते थे। कभी गहनें, कभी वस्त्र या कभी खाने-पीने की चीजें। एक दिन उनके दरबार में एक विदेशी मेहमान आया और उसने जाते समय राजा की मेहमान नवाजी से खुश होकर उन्हें एक पत्थर उपहार में दिया।

राजा को वो पत्थर बहुत अच्छा लगा और उसने उस पत्थर की भगवान की मूर्ति बनाने का हुकम दिया। राजा उस मूर्ति को अपने राज्य के मंदिर में लगवाना चाहता था। राजा की आज्ञा का पालन करते हुए मंत्री एक कारीगर के पास गए और 10 दिनों के अंदर इस पत्थर की मूर्ति बनाने का आदेश दिया। कहा ये काम हो जाता है तो जो चाहो वो उपहार मिलेगा साथ ही 100 सोने की मोहरे दी जाएंगी।

ये सुनते ही कारीगर खुश हो जाता है और मूर्ति बनाने में लग जाता है। उसने उस पत्थर को तोड़ने की बहुत कोशिश की लेकिन वो असफल रहा। उसने सोचा कि इतने बार चोट देने पर भी ये पत्थर नहीं टूटा तो अब क्या टूटेगा। उस कारीगर ने एक अंतिम प्रयास भी नहीं किया और उसने वो पत्थर वापस मंत्री को दे दिया और कहा कि इसकी मूर्ति नहीं बन सकती। इसके बाद मंत्री उस पत्थर को लेकर साधारण कारीगर के पास जाता है जैसे ही उस कारीगर ने एक चोट मारी वो पत्थर टूट गया। जिसके बाद कारीगर ने उससे मूर्ति बनाकर मंत्री को दे दी। मंत्री ने बदले में उसे मोहरे दी। अब वो मंत्री जाते-जाते एक ही बात सोच रहा था कि अगर पहले वाले कारीगर ने एक अंतिम प्रयास भी किया होता तो ये सोने की मोहरे उसकी होती।

ये कहानी हमें क्या सिखाती है कि कई बार हम बहुत मेहनत करते हैं लेकिन फिर भी काम को अधूरा छोड़ देते हैं ये सोचकर कि अगर अब तक नहीं हुआ तो आगे भी नहीं होगा। ये मेरी किस्मत में है ही नहीं। लेकिन असल में आपको एक बार और करने की जरूरत है क्योंकि शायद जिस समय आप वो काम छोड़ रहे हो उसके अगले ही पल वो बन जाए। ये कहानी हमें ये सिखाती है कि अगर कुछ समय आपका काम नहीं हुआ तो इसका मतलब ये नहीं कि आप रुक जाएं या हार मान लें क्योंकि मेहनत अपना असर जरूर दिखाती है।

तो हारो मत बस मेहनत करके रहो। नए-नए तरीके ढूंढते रहो जिससे आपका काम बन जाए क्योंकि अगर आप रुक गए तो वो आपकी किस्मत में लिखी सोने की मोहरे कोई और ले जाएगा।

(नोट- जया किशोरी ने इस प्रेरणादायक कहानी के बारे में अपने यूट्यूब चैनल पर वीडियो शेयर करके बताया है।)

Laveena Sharma
लवीना शर्मा author

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करि... और देखें

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