Krishna Janmashtami Dos And Don'ts (कृष्ण जन्माष्टमी पर क्या करें, क्या न करें): हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का खास महत्व है। इस खास त्योहार में लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है। साथ ही व्रत-उपवास भी रखा जाता है। कृष्ण भक्त उन्हें प्रसन्न करने की पूरी कोशिश करते हैं। कान्हा जी को खुश करने के लिए कुछ खास नियम और विधि का पालन किया जाता है। यहां से विस्तार में जानें कि जन्माष्टमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
जन्माष्टमी के दिन क्या करें-
- स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें। दिन की शुरुआत पवित्रता से करें।
- व्रत रखें या फलाहार करें। अपनी शक्ति अनुसार व्रत करें, फल, दूध, माखाना, साबूदाना आदि लें।
- भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें। पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से लड्डू गोपाल को स्नान कराएं।
- झूला सजाएं और लड्डू गोपाल को झुलाएं। यह श्रीकृष्ण के बाल रूप को प्रसन्न करता है।
- भजन, कीर्तन और आरती करें। दिनभर भक्ति भाव में रहें और रात 12 बजे आरती करें।
- तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी बहुत प्रिय है।
- दान करें। अन्न, वस्त्र, या धन का दान पुण्यकारी होता है।
- 12 बजे रात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएं। विशेष आरती और जयघोष करें।
- भगवद् गीता या कृष्ण लीला का पाठ करें। यह आत्मिक शांति और ज्ञान देता है।
- सात्विक और शांत वातावरण बनाए रखें। यह दिन भक्ति और साधना का होता है।
जन्माष्टमी के दिन क्या न करें-
- प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन न करें। व्रत और पूजा में ये वर्जित होता है।
- मांसाहार और शराब का सेवन बिलकुल न करें। ये पाप माना जाता है।
- झूठ, कटु वचन या कलह से बचें। यह दिन पवित्रता और मन की शांति का है।
- भगवान को बिना स्नान कर छूना नहीं चाहिए। स्वयं शुद्ध होकर पूजा करें।
- तुलसी के बिना भोग न चढ़ाएं। श्रीकृष्ण बिना तुलसी के भोग स्वीकार नहीं करते।
- रात 12 बजे से पहले व्रत न तोड़ें। जब तक अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र समाप्त न हो, व्रत न खोलें।
- मूर्तियों को अकेले न छोड़ें। रात में भगवान के साथ भक्ति-भाव में रहें।
- अधूरे मन से की गई पूजा से बचें। सच्ची श्रद्धा जरूरी है।
- घर की सफाई बिना न करें पूजा। स्वच्छता पहले, पूजा बाद में।
- दूसरों की निंदा या अपशब्द न बोलें। यह भगवान को अप्रिय होता है।
भगवान श्रीकृष्ण भाव के भूखे हैं, दिखावे के नहीं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन इन सभी नियमों का पालन करते हुए कान्हा जी की पूरे मन से पूजा और सेवा करें।
