अध्यात्म

Hindu Beliefs: गले में भगवान का लॉकेट पहनना चाहिए या नहीं?

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Jun 20, 2023, 04:16 PM IST

कई लोग अपने गले में भगवान का लॉकेट पहनते हैं। लेकिन शास्त्रों में ऐसा करना गलत माना गया है। जानिए क्यों नहीं पहनना चाहिए भगवान का लॉकेट।

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गले में भगवान का लॉकेट पहनना चाहिए या नहीं?

Hindu God Locket: कई लोग अपने गले में भगवान का लॉकेट पहनना पसंद करते हैं। लोग ऐसा मानते हैं कि इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। लेकिन हिंदू धर्म शास्त्रों की मानें तो ऐसा करना बिल्कुल गलत है। भगवान पूजनीय होते हैं और इनकी प्रतिमा रखने का एक उचित स्थान होता है। इसलिए ना ही सिर्फ लॉकेट बल्कि भगवान से जुड़ी किसी भी तरह की वस्तु मनुष्य को अपने शरीर पर धारण नहीं करनी चाहिए। हालांकि आप रुद्राक्ष शरीर पर धारण कर सकते हैं। जानिए क्यों नहीं पहनना चाहिए भगवान का लॉकेट।

शरीर पर भगवान का लॉकेट पहनना इसलिए अशुभ माना जाता है क्योंकि हम पूरे दिन अपने शरीर को शुद्ध नहीं रख पाते। सुबह शौच से लेकर खाने-पीने तक हम कई तरह की अशुद्ध चीजों से गुजरते हैं। ऐसे में कई बार हमारे झूठे या गंदे हाथ लॉकेट में लग सकते हैं। इसलिए शरीर पर भगवान से जुड़ी चीजों को पहनने से बचने चाहिए।

खासतौर पर विवाहित लोगों को भगवान का लॉकेट पहनने से बचना चाहिए। क्योंकि कई बार वैवाहिक संबंध बनाते समय भी लॉकेट गले में होता है जो की ठीक नहीं है और हर बार लॉकेट उतारना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में भगवान का लॉकेट पहनने से बचें। भगवान का लॉकेट बेहद पवित्र होता है और मनुष्य का शरीर कई कारणों से अशुद्ध रहता है। ऐसे में लॉकेट की शक्तियां नष्ट हो जाती हैं। (पंचामृत बनाने की विधि)

शास्त्रों के अनुसार अशुद्ध हुआ लॉकेट नकारात्मकता फैलाता है। ऐसे लॉकेट को पहनने से सिर्फ अशुभ परिणाम ही प्राप्त हो सकते हैं। इसका ग्रहों पर भी बुरा असर पड़ता है। सकारात्मकता के लिए पहना गया लॉकेट आपको गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। तो इस कारण गले में भगवान का लॉकेट पहनने से मना किया जाता है।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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