अध्यात्म

Ravidas Jayanti 2026: संत रविदास जयंती आज, जानें कब हुआ था रविदास जी का जन्म, क्यों मनाई जाती है जंयती, क्या है महत्व और इतिहास

  • Authored by: Srishti
  • Updated Feb 1, 2026, 06:34 AM IST

Ravidas Jayanti 2026 (संत रविदास जी जयंती कब और क्यों मनाई जाती है): देशभर में आज रविदास जयंती मनाई जा रही है। लेकिन कई सारे लोगों को ये नहीं पता है कि संत रविदास जी कौन थे और उनकी जयंती क्यों मनाई जाती है। गुरु रविदास जी और उनकी जयंती के बारे में सारी जानकारी आप यहां से ले सकते हैं।

गुरु रविदास जयंती 2026- कब और क्यों मनाई जाती है? (pc: instagram)

गुरु रविदास जयंती 2026- कब और क्यों मनाई जाती है? (pc: instagram)

Ravidas Jayanti 2026 (संत रविदास जी जयंती कब और क्यों मनाई जाती है): भारत की धरती पर कई महान गुरु हुए, जिनमें से एक संत रविदास जी भी थे। संत रविदास 15वीं–16वीं सदी के प्रसिद्ध भक्ति संत, समाज सुधारक और कवि थे। गुरु रविदास जी जाति-व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव के विरोधी थे और अपने भजनों के माध्यम से यह संदेश देते थे कि ईश्वर के सामने सभी मनुष्य समान हैं और भक्ति के लिए मंदिर या पूजा-पाठ जरूरी नहीं, बल्कि सच्चा भक्ति मन और कर्म से होती है। उनकी रचनाएं सरल भाषा में मानवता, आत्म-ज्ञान और ईमानदारी का संदेश देती हैं और उनके कुछ दोहे गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं। क्या आज ही गुरु रविदास जी की जंयती है, आज के दिन ही इसे क्यों मनाया जाता है और इस दिन का क्या महत्व है, इसकी पूरी जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिलेगी।

हिंदू पंचांग के अनुसार रविदास जी की जयंती कब मनाई जाती है?

पंचांग अनुसार संत रविदास जयंती हर साल माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन गुरु रविदास जी का जन्म हुआ था।

2026 में संत रविदास जयंती कब है?

2026 में संत रविदास जयंती आज यानी रविवार, 1 फरवरी 2026 को माघ पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाएगी। ये दिन संत रविदास जी के जन्मोत्सव का पर्व है और इसमें भक्ति, पूजा, कीर्तन और उनके उपदेशों का स्मरण किया जाता है।

रविदास जयंती क्यों मनाई जाती है?

संत रविदास जी 15वीं–16वीं शताब्दी के प्रमुख भक्तिकालीन संत थे, जिन्होंने भक्ति, समानता, मानवता और समाज में जाति-भेद को खत्म करने का संदेश दिया। संत रविदास को रैदास के नाम से भी जाना जाता है। इन्होंने भक्ति के साथ- साथ सामाजिक कार्य भी किए हैं। रविदास जी ने 'सुनो भाई साधो, एक ही थाली में सबका भोग हो' जैसे विचारों के माध्यम से समाज में भाईचारे और समानता का संदेश फैलाया। उनके उपदेशों में ईश्वर की भक्ति, सरलता, सच्चाई और आत्म-ज्ञान का महत्व बताया गया है। वो अपन काम को बहुत ईमानदारी से करते थे। संत रविदास जयंती के दिन लोग संत रविदास के दौहे गाते हैं और शोभा यात्रा निकालकर भजन कीर्तन किये जाते हैं। संत रविदास के दौहे आज के समय में भी बहुत प्रचलित है।

रविदास जयंती का जन्म कब हुआ था?

इतिहासकारों के अनुसार, गुरु रविदास जी का जन्म 1377 ई. में हुआ था। तो वहीं कुछ विद्वानों का मानना है कि गुरु रविदास का जन्म 1399 में माघ पूर्णिमा के दिन हुआ था।

संत रविदास जी का जन्म कहां हुआ था?

संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी यानी काशी में हुआ था। हालांकि, उनके जन्मस्थान को लेकर कुछ ऐतिहासिक और लोक-परंपरागत मत भिन्न हैं।

संत रविदास जी की मृत्यु कब और कैसे हुई?

इतिहासकारों के अनुसार संत रविदास जी की मृत्यु करीब 1518 ईस्वी में वाराणसी में हुई थी। संत परंपरा के अनुसार, रविदास जी ने प्राकृतिक रूप से अपने जीवन का अंत किया। उनके जीवन का मुख्य संदेश भक्ति, मानवता और समानता था, और वे अपने शिष्यों के साथ वहां-यहीं शांतिपूर्ण तरीके से रहकर मुक्ति प्राप्त कर गए। रविदास जी की मृत्यु का सटीक समय और कारण इतिहास में निश्चित नहीं है, इसलिए इसे अधिकतर परंपरा और लोकविश्वास के आधार पर बताया जाता है।

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Srishti
Srishti author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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