Ganesh Ji Ki Katha In Hindi, गणेश जी की कहानी: हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता की उपाधि दी गई है। जिसका मतलब है कि किसी भी शुभ काम या पूजा पाठ से पहले गणेश जी की पूजा करना अनिवार्य है। वहीं हमारे शास्त्रों में गणेश जी से जुड़ी कई कहानियां और कथाओं का भी जिक्र किया गया है। जिसे किसी भी व्रत-त्योहार के समय पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसे में संकष्टी चतुर्थी व्रत (Ganesh Chaturthi Vrat Katha) के समय भी गणेश जी की कथा जरूर पढ़नी चाहिए। चलिए अब जानते हैं गणेश जी की कहानी (Ganesh Ji Ki Kahani) विस्तार से।
Ganesh Ji Ki Kahani In Hindi (गणेश जी की कहानी)
एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी जो रोजाना गणेश जी की विधि विधान पूजा करती थी। लेकिन इस पूजा के लिए उसे रोजाना ही गणेश जी की प्रतिमा बनानी पड़ती थी। दरअसल वो मिट्टी की मूर्ति बनाती है जिस वजह से वो मूर्ति गल जाती थी। एक दिन उसके घर के पास एक सेठ जी का मकान बन रहा था। बुढ़िया मकान बनाने वाले कारिगरों के पास जाकर बोली कि क्या तुम मेरे लिए पत्थर की गणेश प्रतिमा बना दोगे।
कारीगरों ने तुरंत मना कर दिया। कहने लगे जितनी देर में हम तेरे लिए प्रतिमा बनाएंगे उतनी देर में सेठ जी की दीवार न बना लेंगे। बुढ़िया को बहुत ही दुख हुआ वो कहने लगी भगवान करे कि तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। ऐसा कहते ही दीवार सच में टेढ़ी हो गई। इसके बाद से कारीगरों ने कई बार वो दीवार बनाने की कोशिश कि पर वो सीधी बनकर ही नहीं दे रही थी।
शाम में जब सेठ जी आए तो देखा कि आज तो कुछ भी काम नहीं हुआ तब उसमें से एक मिस्त्री ने सेठ जी को सारी बात बता दी। सेठ जी ने बुढ़िया को बुलवाया और उसे सोने की गणेश प्रतिमा लाकर दी। जिसके बाद दीवार सीधी हो गई। हे विनायक जी जैसे आपने सेठ की दीवार सीधी की ऐसे ही सबकी करना। सब पर अपनी कृपा बनाए रखना।
