अध्यात्म

Ganesh Ji Ki Katha: वट सावित्री व्रत में पढ़ें गणेश जी की कथा

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated May 19, 2023, 05:50 PM IST

Ganesh Ji Ki Kahani: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता की उपाधि प्राप्त है। कहते हैं इनकी पूजा से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं। आज वट सावित्री व्रत है। ऐसे में पूजा के दौरान गणेश जी की कथा को जरूर पढ़ें।

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Ganesh Ji Ki Katha: गणेश जी की कथा

Ganesh Ji Ki Katha: गणेश जी की कथा किसी भी व्रत में पढ़ी जा सकती है। मान्यता है इस कथा को पढ़ने से उस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाता है। आज वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है। ऐसे में आप वट सावित्री व्रत पूजा (Vat Savitri Vrat Puja) के समय गणेश जी और बुढ़िया माई की कहानी (Ganesh Ji Aur Budhiya Mai Ki Kahani) सुन सकती हैं। कहते हैं जो व्यक्ति इस गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Kahani) को ध्यान से और सच्चे मन से सुनता है उसकी सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। यहां देखिए गणेश जी की कथा।

Ganesh Ji Ki Kahani (गणेश जी की कहानी)

पौराणिक कथा अनुसार एक बुढ़िया माई थी वो रोजाना मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। लेकिन एक दिन उसके मिट्टी के गणेश गल गए। उसी के घर के पास एक सेठ का मकान बन रहा था। वो मकान बनाने वाले कारिगरों से बोली कि मेरे लिए पत्थर का गणेश बना दो। मिस्त्री बोले जितने में हम तेरा पत्थर का गणेश घड़ेंगे उतने में अपनी दीवार ना चिनेंगे।

बुढ़िया को बहुत बुरा लगा उसने बोला राम करे तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। बुढ़िया के बोलते ही उनकी दीवार टेढ़ी हो गई। जितनी बार वो दीवार चिनें वो ढा देवें, चिने और ढा देवें। इस तरह करते-करते शाम हो गई। शाम को सेठ आए उन्होंने देखा कि आज तो कोई काम ही नहीं हुआ है। तब एक मिस्त्री ने बुढ़िया माई के बारे में उन्हें बताया।

वो कहने लगे एक बुढ़िया आई थी वो कह रही थी मेरा पत्थर का गणेश घड़ दो, हमने उसका काम नहीं किया उसने कहा तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। तब से दीवार सीधी नहीं बन रही है। सेठ ने बुढ़िया को बुलवाया सेठ ने कहा हम आपके लिए सोने का गणेश गढ़ देंगे। हमारी दीवार सीधी कर दो। सेठ ने बुढ़िया को सोने के गणेश जी दिए। इससे सेठ की दीवार सीधी हो गई। जैसे सेठ की दीवार सीधी की वैसी सबकी करना।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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