22 या 23 जनवरी, कब है गणेश जयंती? नोट करें पूजा का समय, सामग्री और पूजा विधि
- Authored by: Srishti
- Updated Jan 20, 2026, 07:04 AM IST
Ganesh Jayanti January 2026: पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश जी का जन्म माघ शुक्ल चतुर्थी को हुआ था, इस वजह से इस तिथि को गणेश जयंती मनाई जाती है। तो जनवरी में गणेश जयंती कब है, इसकी सही तारीख आप यहां से जान सकते हैं। साथ ही यहां पूजा का मुहूर्त, पूजा की सामग्री लिस्ट और पूजा की पूरी विधि बताई गई है।
गणेश जयंती तारीख, मुहूर्त, पूजा सामग्री और विधि (pc: canva)
Ganesh Jayanti January 2026: हर महीने में दो चतुर्थी आती हैं, लेकिन माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व है। इसे गणेश जयंती, माघी गणेश चतुर्थी, तिलकुंद चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ गणपति जी की पूजा होती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर चंद्रमा का दर्शन नहीं करते हैं, इसलिए ये पूजा चंद्रोदय से पहले शुभ मुहूर्त में हो जाती है। जनवरी में गणेश जयंती कब है, इसकी डेट को लेकर काफी कंफ्यूजन है। यहां से आप गणेश जयंती की सही तारीख नोट कर सकते हैं, वो भी पूजा मुहूर्त, पूजा सामग्री लिस्ट और पूजा विधि के साथ।
कब है गणेश जयंती?
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 47 मिनट पर होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 23 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 28 मिनट पर होगी। उदयातिथि के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी।
गणेश जयंती पूजा मुहूर्त-
गणेश जयंती के दिन पूजा का मुहूर्त सुबह 11:28 से दोपहर 01:42 तक का है। यानी आपको पूजा करने के लिए 2 घंटे 12 मिनट का समय मिल रहा है।
गणेश जयंती पर भद्रा का साया-
गणेश जयंती के दिन भद्रा का साया रहेगा। लेकिन पूजा में कोई बाधा नहीं आएगी क्योंकि पूजा मुहूर्त के बाद से भद्रा लग रही है। गणेश जयंती पर भद्रा दोपहर में 02 बजकर 40 मिनट से लगेगी और 13 जनवरी को तड़के 02 बजकर 28 मिनट तक रहेगी।
गणेश जयंती पूजा सामग्री-
- पूजा की चौकी
- गणेश प्रतिमा
- रोली
- अक्षत
- दूर्वा
- दीपक
- तेल
- माचिस
- फूल
- सिंदूर
- चंदन
- लड्डू (प्रसाद)
- कथा किताब
- कपूर (आरती के लिए)
गणेश जयंती पूजा मंत्र-
- ॐ गं गणपतये नम:
- गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
गणेश जयंती पूजा विधि-
माघ मास की शुक्ल चतुर्थी को गणेश जयंती के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें, फिर गणपति का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। दीप प्रज्वलित कर गंगाजल से अभिषेक करें। फिर रोली, अक्षत, दूर्वा, पुष्प, सिंदूर और चंदन अर्पित करें। इसके बाद मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और धूप-दीप के साथ गणेश अथर्वशीर्ष या 'ॐ गण गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें। अंत में गणेश आरती कर क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांटें। दिनभर व्रत रखकर पूजा के समय कथा सुनना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है, इसलिए चंद्रमा को न देखें।