Ganesh Chaturthi vrat katha (गणेश चतुर्थी की कहानी) गणेश जी की जन्म कथा: गणेश भगवान प्रथम पूज्य हैं। उनको गणपति कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों है। दरअसल इसकी कहानी उनके जन्म से जुड़ी है जिस पर गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। उनका जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इसी दिन ही गणेश चतुर्थी होती है। यहां पढ़ें गणेश चतुर्थी व्रत कथा और जानें गणेश जी के जन्म की कहानी।
Ganesh Chaturthi vrat katha, Kahani hindi mein
एक बार मां पार्वती ने स्नान के समय अपने शरीर के उबटन से एक बालक की मूर्ति बनाई और उसको जीवंत कर दिया। उन्होंने उसे द्वार पर बैठाकर कहा कि जब तक मैं आज्ञा ना दूं, किसी को भीतर मत आने देना।
इसी बीच भगवान शिव वहां पहुंचे और अंदर जाना चाहा, परंतु उस बालक ने उनको रोक दिया। इससे क्रोधित होकर शिवजी ने उसका सिर काट दिया। पार्वतीजी यह देखकर बहुत दुखी हुईं। मां की व्यथा को समझते हुए शिवजी ने गणों को उत्तर दिशा में पहले जीव का सिर लेकर आने का आदेश दिया। उन्हें वहां हाथी का बच्चा मिला। उसी का सिर लाकर बालक के धड़ पर लगाया गया और वह पुनर्जीवित हो गया।
भगवान शिव ने घोषणा की कि यह बालक सभी गणों का अधिपति होगा और सबसे पहले पूजे जाएंगे। तभी से वह गणपति और विघ्नहर्ता कहलाए।
