अध्यात्म

1 या 2 जनवरी, कब है साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत, जानिए तिथि और पूजन मुहूर्त

Pradosh Vrat 2026: नए साल 2026 में पहला प्रदोष व्रत पौष माह के शुक्ल पक्ष का पड़ेगा। हालांकि, प्रदोष व्रत कब पड़ रहा है, इसको लेकर अभी लोगों में संशय है। दरअसल, 1 और 2 जनवरी तक त्रयोदशी तिथि व्याप्त होने के चलते प्रदोष व्रत की सही डेट को लेकर कनफ्यूजन है। इस कारण आइए जानते हैं कि साल 2026 में प्रदोष व्रत की सही डेट क्या है?

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प्रदोष व्रत 2026 की डेट

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की प्रदोष काल में पूजा की जाती है। नए साल 2026 पर पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाना है, इसकी तारीख को लेकर थोड़ा सा संशय लोगों में है। दरअसल, नए साल का पहल प्रदोष व्रत षौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाएगा। नए साल के जनवरी महीने में कुल तीन प्रदोष व्रत रखे जाएंगे। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत नए साल में कब पड़ रहा है, आइए जानते हैं।

प्रदोष व्रत की तिथि और पूजन मुहूर्त

वैदिक पंचांग के आधार पर 1 जनवरी 2026 को षौष का माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह करीब 1:47 बजे शुरू होकर रात लगभग 10:22 बजे तक रहेगी। इस दिन प्रदोष काल शाम लगभग 5:35 बजे से रात 8:19 बजे तक होगा। यह समय सूर्यास्त के आसपास का विशेष काल है। प्रदोष व्रत की पूजा इसी प्रदोष काल में करना सबसे उत्तम रहती है।

गुरु प्रदोष व्रत का विशेष महत्व

प्रदोष व्रत हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है, लेकिन जब यह गुरुवार को आता है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। गुरुवार भगवान विष्णु का दिन होता है, इसलिए इस व्रत से शिव के साथ-साथ विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती है। शास्त्रों में गुरु प्रदोष को ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य बढ़ाने वाला बताया गया है।

यह व्रत शत्रुओं पर विजय दिलाता है, जीवन में स्थिरता लाता है और अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है। नए साल की शुरुआत इस दुर्लभ संयोग से होने से पूरे वर्ष परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है। शिव भक्तों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि साल की नींव ही भगवान शिव की भक्ति से मजबूत हो।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत को सरलता और श्रद्धा से रखा जा सकता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिव-पार्वती का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक आहार जैसे फल, दूध, दही या साबूदाना लें तथा क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते रहें।

शाम को प्रदोष काल में पूजा शुरू करें। सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति पर गंगाजल, दूध और दही से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, सफेद पुष्प, चंदन और अक्षत अर्पित करें। दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 51 या 108 बार जाप करें। अंत में शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा के बाद रात 8:19 बजे के बाद फलाहार से व्रत का पारण करें।

क्या हैं प्रदोष व्रत की पौराणिक मान्यता?

पुराणों के अनुसार, प्रदोष काल में देवताओं ने भगवान शिव की आराधना कर असुरों पर विजय प्राप्त की थी। उस दिन से ही यह व्रत कष्ट निवारण, बाधा दूर करने और विजय दिलाने वाला माना जाता है। प्रदोष व्रत रखने से जीवन से भय, नकारात्मक शक्तियां और मानसिक तनाव दूर होते हैं। दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है, अविवाहितों को योग्य जीवनसाथी मिलता है। स्वास्थ्य, धन, व्यापार और शिक्षा में सफलता प्राप्त होती है तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। नियमित प्रदोष व्रत करने वाले भक्तों पर महादेव की विशेष कृपा हमेशा बनी रहती है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों और पंचांग पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारी author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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