Israel Religion Explained: इजरायल दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां धर्म, इतिहास और आस्था एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यहां मुख्य रूप से यहूदी धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं, जो केवल एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं। यह ईश्वर निराकार है, यानी उसका कोई रूप या मूर्ति नहीं होती है। यहूदी लोग ईश्वर को 'Adonai' या 'Hashem' जैसे नामों से संबोधित करते हैं, जबकि उसके मूल नाम (YHWH) का उच्चारण नहीं करते है। उनका मानना है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान, न्यायप्रिय और सृष्टि का रचयिता है। इस धर्म में मूर्ति पूजा का कोई स्थान नहीं है और पूरी आस्था एक परमेश्वर पर आधारित होती है। हालांकि, इजरायल में इस्लाम और ईसाई धर्म को मानने वाले लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं और उन्हें अपने धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है।
ईसाई और इस्लाम और यहूदियों में क्या है रिश्ता?
तीनों प्रमुख धर्म यहूदी, ईसाई और इस्लाम की जड़ें अब्राहम से जुड़ी मानी जाती हैं, जिन्हें तीनों धर्मों का पितामह कहा जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, उन्होंने सबसे पहले लोगों को एक ईश्वर की उपासना करने का संदेश दिया और एकेश्वरवाद की नींव रखी थी। उनकी आस्था और समर्पण के कारण उन्हें तीनों धर्मों में अत्यंत सम्मान प्राप्त है। उनकी कहानी अलग-अलग रूपों में तीनों धर्मों की पवित्र किताबों में भी मिलती है।
कैसे हुई इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म की शुरुआत
अब्राहम के परिवार से ही आगे चलकर तीनों धर्मों की अलग-अलग शाखाएं विकसित हुईं। उनकी पत्नी सारा से इसहाक का जन्म हुआ, जबकि हाजरा से इस्माइल पैदा हुए। यही दोनों वंश आगे चलकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का आधार बने। इसहाक की संतान से यहूदी और ईसाई परंपरा विकसित हुई, जबकि इस्माइल के वंश से आगे चलकर अरब समाज और फिर इस्लाम का उदय हुआ।

अब्राहम फैमिली चेन
कैसे विकसित हुआ यहूदी धर्म और कौन सी है इसकी पवित्र पुस्तक?
यहूदी धर्म की परंपरा इसहाक और उनके पुत्र याकूब से आगे बढ़ी। याकूब को 'इज़राइल' कहा गया और उनके वंशज यहूदी कहलाए। इस धर्म को व्यवस्थित रूप देने में मूसा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्हें ईश्वर से दस आज्ञाएं प्राप्त हुईं। यहूदी धर्म का मुख्य ग्रंथ तोरा है, जो तानाख (Tanakh) का हिस्सा है। तानाख में तीन भाग होते हैं, इसमें तोरा (धार्मिक नियम), नेवीइम (भविष्यवक्ताओं की शिक्षाएं) और केतुविम (अन्य लेख) हैं। इसके अलावा तलमुद (Talmud) नामक ग्रंथ है, जिसमें तोरा की व्याख्या और जीवन जीने के विस्तृत नियम दिए गए हैं।
कैसे हुई ईसाई धर्म की शुरुआत?
ईसाई धर्म की शुरुआत यहूदी समाज के भीतर ही हुई। इसमें ईसा मसीह को ईश्वर का पुत्र और मसीहा माना जाता है। उन्होंने प्रेम, दया, क्षमा और मानवता का संदेश दिया। ईसाई धर्म का मुख्य ग्रंथ बाइबिल है, जिसमें दो मुख्य भाग होते हैं—ओल्ड टेस्टामेंट (जो यहूदी ग्रंथों से जुड़ा है) और न्यू टेस्टामेंट (जिसमें ईसा मसीह के जीवन और शिक्षाएं शामिल हैं)। यह ग्रंथ ईसाई धर्म के विश्वास और जीवन का आधार है।
कैसे अस्तित्व में आया इस्लाम धर्म?
इस्लाम की परंपरा इस्माइल के वंश से जुड़ी मानी जाती है। इसी वंश में आगे चलकर पैगंबर मुहम्मद का जन्म हुआ, जिन्होंने इस्लाम धर्म का प्रचार किया। इस्लाम में अल्लाह को एकमात्र ईश्वर माना जाता है और कुरान को अंतिम और पवित्र ग्रंथ माना जाता है। कुरान को अल्लाह का सीधा वचन माना जाता है, जो पैगंबर मुहम्मद को प्राप्त हुआ। इसके अलावा हदीस (Hadith) भी महत्वपूर्ण हैं, जिनमें पैगंबर के कथन और जीवन से जुड़ी बातें दर्ज हैं।
कहां पूजा करते हैं यहूदी?
यहूदी लोग सिनागॉग में पूजा करते हैं और हर सप्ताह 'शब्बत' मनाते हैं, जो विश्राम और प्रार्थना का दिन होता है। उनके खान-पान के नियम 'कोशर' कहलाते हैं, जिनमें क्या खाना है और कैसे खाना है, इसके सख्त नियम होते हैं। यह नियम कुछ हद तक इस्लाम के हलाल नियमों से मिलते-जुलते हैं, लेकिन दोनों पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं।
तीनों धर्मों का पवित्र स्थल है यह स्थान
यरुशलम एक ऐसा पवित्र शहर है जिसे यहूदी धर्म, इस्लाम और ईसाई धर्म—तीनों धर्म समान रूप से पवित्र मानते हैं। यहूदियों के लिए यहां स्थित वेस्टर्न वॉल सबसे पवित्र स्थल है, जिसे प्राचीन मंदिर का अवशेष माना जाता है और जहां वे प्रार्थना करते हैं। मुसलमानों के लिए इसी क्षेत्र में मौजूद अल-अक्सा मस्जिद बेहद पवित्र है, क्योंकि इस्लामिक मान्यता के अनुसार यहीं से पैगंबर मुहम्मद ने मेराज की यात्रा की थी। वहीं ईसाइयों के लिए यरुशलम में स्थित चर्च ऑफ द होली सेपुल्चर सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि माना जाता है कि यहीं ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया और उनका पुनरुत्थान हुआ। इस तरह एक ही शहर में तीनों धर्मों की आस्था और इतिहास जुड़ा हुआ है, जो इसे दुनिया के सबसे खास धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।
अब अलग-अलग हैं तीनों धर्म
यहूदी, मुस्लिम और ईसाई—तीनों ही अब्राहम के वंश से जुड़े माने जाते हैं और एक ही ईश्वर में विश्वास रखते हैं। तीनों धर्मों में प्रार्थना, दान, नैतिकता और अच्छे कर्मों पर जोर दिया जाता है। इस्लाम में यहूदियों और ईसाइयों को 'अहल-ए-किताब' कहा गया है, क्योंकि उनके पास भी ईश्वर के दिए हुए ग्रंथ हैं। हालांकि आज के समय में राजनीतिक कारणों के चलते तनाव देखने को मिलता है, लेकिन धार्मिक रूप से इनकी जड़ें एक ही हैं। अंतर केवल उनकी मान्यताओं में है। यहूदी धर्म इसहाक के वंश को आधार मानता है, ईसाई धर्म ईसा मसीह को केंद्र में रखता है, और इस्लाम पैगंबर मुहम्मद को अंतिम नबी मानता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पब्लिक डोमेन में उपस्थित जानकारियों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
