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Aaj Ekadashi Hai Kya: एकादशी आज है या कल, जानें कौनसे दिन रखा जाएगा रमा एकादशी का व्रत

Aaj Ekadashi hai kya, आज एकादशी है क्या: एकादशी का व्रत आज है या कल, इसे लेकर अगर आप भी उलझन में हैं तो जानिए सही तारीख। नवंबर की एकादशी कब मनाई जाएगी, तिथि कब शुरू होगी, एकादशी आज है या कल।

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Ekadashi aaj hai ya cal

Ekadashi aaj hai ya cal, आज एकादशी है क्या: हिंदू धर्म में एकादशी का दिन बेहद खास माना जाता है। महीने में दो बार आने वाली इस तिथि पर भगवान विष्णु के भक्त व्रत रखते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। लेकिन जब भी एकादशी की तिथि दो दिनों में पड़ती है, तो लोगों के मन में एक सवाल जरूर उठता है कि आखिर व्रत आज रखा जाए या कल? नवंबर की एकादशी को लेकर भी कुछ ऐसा ही सवाल चर्चा में है।

    अगर आप भी सुबह उठकर पंचांग देख रहे हैं और व्रत की सही तारीख जानना चाहते हैं, तो आपके लिए जरूरी जानकारी है। नवंबर महीने की पहली एकादशी रमा एकादशी है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, इसकी तिथि 4 नवंबर से शुरू हो रही है, लेकिन व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा। यानी कैलेंडर में तिथि आज शुरू होने का मतलब यह नहीं कि आज ही व्रत रखा जाए। आइए जानते हैं इस एकादशी की सही तारीख, धार्मिक महत्व और पूजा से जुड़ी जरूरी बातें।

    आज एकादशी है या कल?

    नवंबर 2026 में रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को रखा जाएगा। हालांकि, एकादशी तिथि 4 नवंबर को सुबह 11 बजकर 03 मिनट पर शुरू हो चुकी है। इसका समापन 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर होगा।

    इसलिए अगर आप व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो 5 नवंबर की तारीख याद रखें। व्रत की परंपरा में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार ही रमा एकादशी का व्रत कल 5 नवंबर को ही रखा जाएगा।

    रमा एकादशी का महत्व

    रमा एकादशी कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है। रमा एकादशी का नाम माता लक्ष्मी के एक नाम रमा से भी जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।

    रमा एकादशी पर कैसे करें पूजा?

    इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले फूल अर्पित करें। विष्णु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। फलाहार के साथ अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें। जरूरतमंद लोगों को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।

    Avni Bagrola
    अवनी बागरोलाauthor

    अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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