अध्यात्म

Eid Kab Hai 2026 Mein: मार्च में ईद कब है, नोट करें ईद-उल-फितर की तारीख और चांद दिखने का समय

March Mein Eid Kab Hai 2026, Eid Ul Fitr 2026 Date: हर साल शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद मनाया जाता है। इस दिन मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। ईद को चांद देखकर मनाया जाता है। साल 2026 में ईद-उल-फितर कब है, इसकी तारीख आप जान सकते हैं।

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ईद-उल-फितर 2026 (pc: canva)

March Mein Eid Kab Hai 2026, Eid Ul Fitr 2026 Date: शव्वाल इस्लामी कैलेंडर का दसवां महीना होता है और इसकी शुरुआत ही ईद-उल-फितर त्योहार के साथ होती है। ये त्योहार रमजान महीने के अंत का प्रतीक है। इस दिन घरों में सेवइयां और तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। मुसलमान सुबह ईद की नमाज अदा करते हैं और गरीबों और जरूरतमंदों को जकात-उल-फितर (फितरा) देते हैं जिससे वो लोग भी ईद मना सकें। इस दिन लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद मुबारक कहते हैं। यहां से आप जान सकते हैं कि ईद-उल-फितर कब है। यहां ईद की तारीख और इसे मनाने का तरीका बताया गया है।

ईद कब है मार्च 2026 में?

ईद की तारीख चांद दिखने के बाद तय होती है। अगर इस साल शव्वाल महीने का चांद 19 मार्च को दिखता है तो ईद का त्योहार 20 मार्च को मनाया जाएगा। लेकिन अगर 19 को चांद नहीं दिखाई देता है तब ईद 21 मार्च को होगी। ईद की सही तारीख चांद दिखने के बाद ही पता चलेगी। वैसे कई जानकारों के अनुसार ईद 20 मार्च को मनाए जाने की काफी संभावना है।

ईद कैसे मनाया जाता है?

ईद के दिन की शुरुआत सुबह नहाने के बाद प्रातः प्रार्थना से होती है जिसे सलात-उल-फज्र कहा जाता है। इसके बाद लोग अपने परिवार के साथ खजूर का या किसी मीठे पकवान का सेवन करते हैं और नये कपड़े पहनते हैं। परंपरा अनुसार ईद के दिन पुरुष सामूहिक रूप से नमाज अदा करते हैं जिसके लिए वो ईदगाह या किसी विशाल स्थल पर जाते हैं। वहीं महिलाएं मेहंदी लगाती हैं और घर पर रहकर या समूह में जाकर नमाज पढ़ती हैं। नमाज के बाद सभी एक दूसरे से गले मिलकर ईद मुबारक बोलते हैं। साथ ही एक-दूसरे के घर जाकर गिफ्ट्स देते हैं।

क्यों मनाया जाता है ईद-उल-फितर?

ईदुल-फितर सिर्फ पकवानों और नए कपड़ों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह रूहानी और सामाजिक संदेश का मेल है। इस ईद में माना जाता है कि रमजान के पूरे महीने रोजे रखने और इबादत करने के बाद अल्लाह अपने बंदों को 'ईद' के रूप में इनाम देता है। इस दिन लोग मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करते हैं और गले मिलकर आपसी गिले-शिकवे दूर करते हैं। ईद की नमाज से पहले हर मुसलमान के लिए 'फितरा' (एक निश्चित दान) देना जरूरी होता है। जिसे जकात कहते है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, पहली बार ईद उल-फितर जंग-ए-बद्र की जीत के बाद 624 ईसवी में मनाई गई थी।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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