बेहद शक्तिशाली हैं भगवान गणेश के ये 12 मंत्र, जपने मात्र से बन जाता है हर एक काम, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर कर लें जाप
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 5, 2026, 11:25 AM IST
Lord Ganesha Powerful Mantra: हिंदू कैलेंडर के आखिरी महीने फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आज है। इस कारण आज द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। माना जाता है कि आज के दिन भगवान गणेश के 12 शक्तिशाली मंत्रों का जाप करना चाहिए। इन मंत्रों का जाप करने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं कि इस दिन किन मंत्रों का जाप किया जा सकता है?
भगवान गणेश के 12 मंत्र
Lord Ganesha Powerful Mantra: आज 5 जनवरी 2026 को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है और दिन गुरुवार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। यह तिथि भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत जीवन की परेशानियों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। दरअसल, चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की जन्म तिथि भी माना जाता है।
इस कारण इस दिन गणेश जी की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने से कष्टों का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर की गई पूजा को खास फलदायी माना गया है। माना जाता है कि इस दिन अगर भगवान गणेश के 12 शक्तिशाली मंत्रों का जाप किया जाए तो सभी प्रकार भौतिक और शारीरिक परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है।
गणेश जी के 12 शक्तिशाली मंत्र
संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के 12 नाम मंत्रों का जाप विशेष फल देता है। मान्यता है कि इन मंत्रों का जप करने से विघ्न दूर होते हैं और मन शांत रहता है। ये 12 मंत्र इस प्रकार हैं।
ॐ सुमुखाय नमः
ॐ एकदंताय नमः
ॐ कपिलाय नमः
ॐ गजकर्णाय नमः
ॐ लंबोदराय नमः
ॐ विकटाय नमः
ॐ विघ्ननाशाय नमः
ॐ विनायकाय नमः
ॐ धूम्रकेतवे नमः
ॐ गणाध्यक्षाय नमः
ॐ भालचंद्राय नमः
ॐ गजाननाय नमः
इन मंत्रों का 11 या 21 बार जाप करने से पूजा का प्रभाव बढ़ता है और गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है।
गुरु ग्रह भी होगा मजबूत
आज का दिन गुरुवार है, जो गुरु ग्रह का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और ज्ञान के कारक हैं, जबकि गुरु ग्रह ज्ञान, भाग्य और मार्गदर्शन का प्रतीक होता है। ऐसे में गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी पड़ना गणेश उपासना को और भी प्रभावशाली बना देता है। इस दिन की गई गणेश पूजा से गुरु ग्रह को मजबूती मिलने की मान्यता है, जिससे करियर, शिक्षा और निर्णय क्षमता बेहतर होती है।
संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें पूजा
संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश का ध्यान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। गणेश जी को दूर्वा, फूल, सिंदूर, चावल और लड्डू अर्पित किए जाते हैं। धूप-दीप जलाकर मंत्र जाप किया जाता है। दिनभर व्रत रखकर संयम और शुद्धता का पालन किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व होता है। शाम को चंद्र उदय के बाद पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है और फिर चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है। चंद्रमा को जल या दूध से अर्घ्य अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है और मन से जुड़े कष्ट दूर होने की मान्यता है। चंद्र पूजा के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।