Makar Sankranti 2023: माघ मास की मकर संक्रांति, जिसे दान का पर्व भी कहा जाता है। दान का अपना अलग विज्ञान होता है। दान मानव के प्रारब्ध एवं वर्तमान के काले बिंदुओं का शाेषण कर मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। दान गरिमा तब पूर्ण होती है जब मानव परोपकार के लिए अपने शरीर काभी त्याग करने को तत्पर रहता है। मकर संक्रांति का पर्व दान की इसी परंपरा को आगे ले जाते हुए बांट कर खाओ प्रभु के गुण गाओ, कि एकात्मक धारणा को आगे ले जाता है।
मकर संक्रांति क्योंकि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का समय है इसलिए हर राशि पर इसका प्रभाव निश्चित रूप से पड़ता ही है। इस पर्व पर यदि जातक अपनी राशि के अनुसार दान करे तो उसके ग्रह दोष समाप्त होते हैं। विशेष मकर संक्रांति पर उड़द की दाल और तिल का दान प्रत्येक राशि के लिए शुभ माना गया है। कहा जाता है कि सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर उनसे भेंट करने जाते हैं। उड़द की दाल को शनि दोष शांत करने के लिए उपयुक्त बताया गया है। चावल चंद्रमा, शुक्र ग्रह के लिए नमक, बृहस्पति ग्रह की शांति के लिए हल्दी, बुध ग्रह के लिए सब्जियां खिचड़ी में प्रयोग होती हैं। यदि राशि अनुसार दान की जानकारी का अभाव है तब भी आप खिचड़ी दान कर सकते हैं। ये नवग्रह शांति का अचूक उपाय है।
राशि और आपके दान की वस्तु
− मेष राशि के जातक तिल गुड का दान करें। तांबे की वस्तु भी दान कर सकते हैं।
− वृष राशि के जातक तिल का दान करें। चांदी की वस्तु भी दान कर सकते हैं।
− मिथुन राशि के जातक पीली वस्तु का दान करेंगे तो शुभ फलदायी होगा।
− कर्क राशि के जातक सफेद तिल का दान करें। चावल भी दान करना फलदायी रहेगा।
− सिंह राशि के जातक गुड़, गेंहू का दान करेंगे तो शुभ रहेगा।
− कन्या राशि के जातकों के लिए हरी मूंग और तिल का दान अच्छा रहेगा।
− तुला राशि के जातक सतनाजा यानी सात तरह के अनाज दान करें। साथ में गुड़ भी रखें।
− वृश्चिक राशि के जातकों के लिए लाल वस्त्र के संग दही का दान करना उचित रहेगा।
− धनु राशि के जातक पीले वस्त्र का गरीबों को और ब्राह्मणाें को दान करें।
− मकर राशि के जातक शुद्ध घी और दाल चावल की खिचड़ी दान कर सकते हैं।
− मीन राशि के जातक चने की दाल संग तिल का दान करें तो शुभ फल की प्राप्ति होगी।
दान का आशय क्या
संसार के सभी धर्माें में सहयोगी की अनूठी परंपरा विद्यमान है। पुण्य का यह क्रम गहरी आस्था उत्पन्न करता है। परमार्थ का यह स्वरूप अनोखी शांति प्रदान करता है। यह लौकिक जीवन में परालौकिक विनिमय का वो चक्र है जिसमें व्यक्ति को इस बात का विश्वास है कि जो मैंने दिया है उसका प्रतिफल कहीं न कहीं प्राप्त होना ही है।
डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
