Chitragupta Puja Vidhi in Hindi 2025: चित्रगुप्त पूजा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो भाई दूज के दिन, यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह पूजा भगवान चित्रगुप्त की कृपा पाने और अच्छे कर्मों का लेखा-जोखा रखने के लिए की जाती है। भगवान चित्रगुप्त को यमराज के सहायक और जीवों के कर्मों का हिसाब रखने वाला माना जाता है। खासकर कायस्थ समुदाय में इस पूजा का विशेष महत्व है।
कौन हैं भगवान चित्रगुप्त और क्यों की जाती है पूजा?
भगवान चित्रगुप्त को कर्मों का लेखाकार माना जाता है। पुराणों के अनुसार, वह हर व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं और यमराज को मृत्यु के बाद आत्मा के अगले जन्म का निर्णय लेने में मदद करते हैं। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन उनकी पूजा करने से कर्मों में शुद्धता आती है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। खासकर व्यापारियों, लेखकों, और कायस्थ समुदाय के लिए यह पूजा करने से समृद्धि और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
चित्रगुप्त पूजा की तारीख और शुभ मुहूर्त
2025 में चित्रगुप्त पूजा 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाई जाएगी, जो कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि है। इस तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर को शाम 8:16 बजे से होगी और 23 अक्टूबर को रात 10:09 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं।
- प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 6:27 बजे से 8:43 बजे तक (लगभग 2 घंटे 16 मिनट)
- सायंकाल मुहूर्त: दोपहर 3:28 बजे से शाम 5:43 बजे तक (लगभग 2 घंटे 15 मिनट)
इन मुहूर्त में पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है। अगर मुहूर्त मिस हो जाए, तो सूर्योदय के बाद या सूर्यास्त से पहले का समय चुनें।
चित्रगुप्त पूजा की सामग्री
चित्रगुप्त पूजा को घर पर या मंदिर में विधिपूर्वक करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले घर को अच्छे से साफ करें और पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। पूजा स्थान पर रंगोली बनाएं और एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं। चित्रगुप्त जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अगर तस्वीर नहीं है, तो एक सादा कागज पर 'श्री चित्रगुप्ताय नमः' लिखकर उसे स्थापित करें। पूजा सामग्री में कलम, दवात, कागज, रोली, चंदन, फूल, धूप, दीप, मिठाई, फल, और पंचमेवा शामिल करें। व्यापारी नया खाता-बही भी तैयार रखें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और चित्रगुप्त जी को पीले आसन पर विराजमान करें।
ऐसे करें चित्रगुप्त पूजा
गणेश वंदना से शुरू करें और 'ॐ गणेशाय नमः' का जाप करें। चित्रगुप्त जी के चित्र को स्थापित कर चंदन-रोली का तिलक लगाएं। दीप-धूप जलाएं और फूल अर्पित करें। कलम-दवात पर स्वास्तिक बनाएं और कागज पर 'श्री चित्रगुप्ताय नमः' लिखकर समर्पित करें। मंत्र जाप करें 'ॐ चित्रगुप्ताय विद्महे कलमदण्ड हस्ताय धीमहि तन्नो चित्रगुप्त प्रचोदयात्' । इसका कम से कम 21 बार जाप करें। पूजा के समय 'ॐ चित्रगुप्ताय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें और चित्रगुप्त स्तोत्र का पाठ करें। आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करें और कागज को तिजोरी में रखें अंत में, गरीबों को अन्न-वस्त्र दान करें।
अर्पित करें ये भोग
चित्रगुप्त जी को खीर, हलवा, या मिश्री का भोग लगाएं। भाई दूज के दिन होने के कारण बहनें भाइयों के लिए बनाए गए व्यंजन भी चढ़ा सकते हैं। इसके बाद चित्रगुप्त जी की आरती करें। पूजा के बाद कागज पर अपने अच्छे कर्मों की कामना लिखें और इसे चित्रगुप्त जी को अर्पित करें।
चित्रगुप्त पूजा से मिलते हैं ये लाभ
यह पूजा कर्म बंधनों को मुक्त करती है, मानसिक स्पष्टता बढ़ाती है और वित्तीय वर्ष की सकारात्मक शुरुआत सुनिश्चित करती है। विद्यार्थियों को परीक्षा में सफलता, प्रोफेशनल्स को प्रमोशन और व्यापारियों को लाभ मिलता है।
पूजा के दौरान बरतें सावधानियां
पूजा के समय मन को शांत और सकारात्मक रखें। क्रोध या नकारात्मक विचारों से बचें। राहुकाल (दोपहर 12:05 बजे से 1:30 बजे तक) में पूजा शुरू न करें। अगर कायस्थ समुदाय से हैं, तो कुलदेवता के रूप में विशेष श्रद्धा रखें। कागज और कलम को पूजा के बाद संभालकर रखें, क्योंकि यह चित्रगुप्त जी का प्रतीक है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
