Chitragupta Puja 2026 Date: कार्तिक महीने में दिवाली के बाद कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है चित्रगुप्त पूजा। यह दिन खासतौर पर कायस्थ समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। उन्हें मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला देवता माना गया है। चित्रगुप्त पूजा को कलम-दवात पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग अपनी कलम, कॉपी, किताबों और बहीखातों की पूजा करते हैं।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि साल 2026 में चित्रगुप्त पूजा कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन कलम-दवात की पूजा क्यों की जाती है, तो यहां जानिए पूरी जानकारी।
चित्रगुप्त पूजा 2026 में कब है (Chitragupta Puja 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चित्रगुप्त पूजा बुधवार, 11 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन भाई दूज और यम द्वितीया का त्योहार भी मनाया जाएगा।
इस बार द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर से शुरू होकर 11 नवंबर की दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 11 नवंबर को चित्रगुप्त पूजा करना शुभ रहेगा।
चित्रगुप्त पूजा 2026 शुभ मुहूर्त (Chitragupta Puja 2026 Shubh Muhurat)
द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 नवंबर 2026 को चित्रगुप्त पूजा के लिए अपराह्न मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से लेकर 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान चित्रगुप्त की पूजा करना शुभ माना जाता है।
- चित्रगुप्त पूजा की तारीख: 11 नवंबर 2026, बुधवार
- द्वितीया तिथि शुरू: 10 नवंबर, दोपहर 2 बजे
- द्वितीया तिथि समाप्त: 11 नवंबर, दोपहर 3 बजकर 53 मिनट
- पूजा का शुभ मुहूर्त: दोपहर 1:10 बजे से 3:20 बजे तक
नोट: ये समय नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार हैं। स्थानीय पंचांग में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
चित्रगुप्त पूजा क्यों मनाई जाती है
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त को सृष्टि के सभी जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने का दायित्व सौंपा गया है। माना जाता है कि मनुष्य अपने जीवन में जो भी अच्छे या बुरे कर्म करता है, उनका पूरा हिसाब भगवान चित्रगुप्त के पास रहता है।
धार्मिक मान्यता है कि मृत्यु के बाद यमराज के सामने जीव के कर्मों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है। इसी आधार पर उसके कर्मों का फल निर्धारित होता है। कायस्थ समाज में भगवान चित्रगुप्त को आराध्य देव के रूप में पूजा जाता है। इस दिन उनकी आराधना करके लोग सुख-समृद्धि, बुद्धि, ज्ञान और अच्छे कर्मों का आशीर्वाद मांगते हैं।
चित्रगुप्त पूजा पर कलम-दवात की पूजा क्यों होती है
चित्रगुप्त पूजा की सबसे खास परंपरा कलम-दवात का पूजन है। इस दिन लोग अपनी कलम, दवात, कॉपी, किताबें, रजिस्टर और बहीखातों को साफ करके पूजा में रखते हैं।
दरअसल, भगवान चित्रगुप्त को लेखन और हिसाब-किताब से जुड़ा देवता माना जाता है। इसलिए उनकी पूजा में लेखन सामग्री का विशेष महत्व है।
इस दिन कई परिवारों में कुछ समय के लिए लिखने-पढ़ने का काम नहीं किया जाता। इसके बाद कलम और पुस्तकों की पूजा करके नए काम की शुरुआत की जाती है। कारोबार करने वाले लोग अपने बहीखातों की पूजा भी करते हैं। यह परंपरा ज्ञान, मेहनत और ईमानदारी से काम करने का संदेश देती है।
चित्रगुप्त पूजा की विधि
चित्रगुप्त पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
पूजा के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- सबसे पहले भगवान चित्रगुप्त के सामने दीपक जलाएं।
- उन्हें रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें।
- अपनी कलम, दवात, कॉपी और बहीखातों को पूजा स्थल पर रखें।
- भगवान चित्रगुप्त का ध्यान करें और उनसे सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करें।
- अपनी आय-व्यय का विवरण लिखकर ईमानदारी से काम करने का संकल्प लें।
- अंत में भगवान की आरती करें और प्रसाद बांटें
चित्रगुप्त पूजा सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है। यह हमें अपने कर्मों के प्रति जिम्मेदार रहने की सीख भी देती है। जीवन में हमारी पहचान केवल हमारी बातों से नहीं, बल्कि हमारे कामों से बनती है।
