Chitra Calender 2026: चैत्र मास हिंदू पंचांग का पहला महीना माना जाता है और इसी से नववर्ष की शुरुआत होती है। यह महीना वसंत ऋतु में आता है, जब प्रकृति में नई ऊर्जा, हरियाली और ताजगी दिखाई देती है। आध्यात्मिक दृष्टि से चैत्र मास नवजीवन, शुद्धि और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है। इसी महीने में चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है, जो माता दुर्गा की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। इसके अलावा कई स्थानों पर हिंदू नववर्ष (जैसे गुड़ी पड़वा, उगादी आदि) भी इसी समय मनाया जाता है। चैत्र मास में व्रत, दान, पूजा-पाठ और ध्यान करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। यहां से आप चैत्र मास के व्रत-त्योहार की पूरी लिस्ट देख सकते हैं।
चैत्र कैलेंडर 2026-
4 मार्च 2026- होली, धुलेंडी
6 मार्च 2026- संकष्टी चतुर्थी
11 मार्च 2026- शीतला अष्टमी
15 मार्च 2026- पापमोचिनी एकादशी
16 मार्च 2026- प्रदोष व्रत
17 मार्च 2026- मासिक शिवरात्रि
18 मार्च 2026- चैत्र अमावस्या
19 मार्च 2026- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ, कलश स्थापना, गुड़ी पड़वा, उगादी, नव वर्ष आरंभ
20 मार्च 2026- चेटी चंड
21 मार्च 2026- गणगौर पूजा
24 मार्च 2026- चैती छठ
26 मार्च 2026- राम नवमी
27 मार्च 2026- नवरात्रि पारण
29 मार्च 2026- कामदा एकादशी
31 मार्च 2026- महावीर जयंती
2 अप्रैल 2026- हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा
कब से कबतक रहेगा कृष्ण और शुक्ल पक्ष?
चैत्र पक्ष में कृष्ण पक्ष की शुरुआत 4 मार्च से होगी और यह पक्ष 18 मार्च को समाप्त होगी। वहीं, शुक्ल पक्ष 19 मार्च, से आरंभ होगा और यह 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त होगा।
चैत्र मास में क्या करें-
प्रतिदिन सुबह सूर्य को जल अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। हल्का भोजन करें। फल, साग और मौसमी सब्जियां लें। नीम की कोमल पत्तियां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं।गर्मी की शुरुआत में पंखा, घड़ा, सूती वस्त्र, चप्पल आदि का दान शुभ माना गया है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठें। प्राणायाम करें। इससे मानसिक तनाव कम होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।सुबह घर की सफाई करें। सकारात्मक वातावरण बनता है।
चैत्र मास में क्या न करें-
गर्मी बढ़ने लगती है। गुड़ की तासीर गर्म मानी जाती है। इसलिए सीमित मात्रा में ही लें। मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों से बचें। व्रत काल में विशेष संयम रखें। ताजा भोजन ही ग्रहण करें। बासी भोजन से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। घर में शांति रखें। कटु शब्दों से बचें। सूर्यास्त के बाद झाड़ू न लगाएं।
