अध्यात्म

खरना पूजा कैसे की जाती है? छठ पूजा के खरना में क्या किया जाता है? जानें खरना के नियम और पूरी विधि

Chhath Kharna Puja kaise Hota Hai (खरना पूजा कैसे करें): आज खरना पूजा का शुभ दिन है। खरना को लोहंडा भी कहा जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। यहां से आप जान सकते हैं कि खरना पूजा कैसे की जाती है। खरना की पूरी विधि और नियम यहां मौजूद है।

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खरना पूजा कैसे की जाती है? (pic credit: canva)

Chhath Kharna Puja kaise Hota Hai (खरना पूजा कैसे करें): खरना पूजा छठ महापर्व का दूसरा दिन होता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद छठी मइया की पूजा कर प्रसाद बनाते हैं और ग्रहण करते हैं। खरना के दिन गुड़ की खीर, रोटी और केला का प्रसाद मिलता है। खरना पूजा करने के कुछ खास नियम और विधि होती है। यहां से आप खरना पूजा करने की पूरी विधि जान सकते हैं। यहां खरना पूजा करने का पूरा तरीका बताया गया है।

खरना पूजा मंत्र (Kharna Puja Mantra)-

  • ॐ ह्रीं षष्ठीदेव्यै स्वाहा
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
  • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते। अनुकंपय मां भक्त्या गृहाणार्ध्य दिवाकर:।।

खरना पूजा विधि (Chhath Kharna Puja Vidhi)-

खरना के दिन सूर्योदय से पहले उठकर आपको स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके बाद छठी माता और सूर्य देव का ध्यान करते हुए पूरे दिन भर निर्जला व्रत का संकल्प आपको लेना चाहिए। छठ पर्व पवित्रता का प्रतीक भी है, इसलिए खरना वाले दिन व्रत का संकल्प लेने के बाद आपको पूरे दिन शुद्धता बरतनी चाहिए। फिर पूरे दिन छठ के गीत सुनने चाहिए।

खरना की मुख्य पूजा शाम के समय होती है इसलिए शाम की पूजा से पहले व्रत लेने वाले व्यक्ति को पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजों को साफ करना चाहिए, साथ ही पूजा स्थल की भी सफाई करनी चाहिए। शाम को प्रसाद बनाने के लिए अगर आप मिट्टी का चूल्हा और मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करें तो इसे शुभ माना जाता है। शाम को सूर्यास्त के बाद प्रसाद आपको बनाना चाहिए। इस दिन प्रसाद में गुड़ या फिर दूध और चावल की खीर बनाई जाती है। प्रसाद के रूप में आप गेहूं के आटे की रोटी, पूड़ी और केला भी शामिल कर सकते हैं। प्रसाद तैयार होने के बाद आपको छठी माता और सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान आप मंत्रों का जप और छठी माता की पूजा कर सकते हैं। इसके बाद केले के पत्ते में आपको खीर, पूड़ी आदि छठी मैय्या और सूर्य देव को अर्पित करना चाहिए। पूजा संपन्न होने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि व्रत का प्रसाद किसी एकांत स्थान पर बैठकर करें। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाती है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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