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Chhath Puja 2022: उगते सूर्य को अर्घ्य देते वक्त न करें ये गलतियां, नहीं मिलेगा पूजा का फल

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 30, 2022, 09:09 AM IST

Surya Arghya: छठ पूजा के समापन पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन इस दिन बहुत से लोग सूर्य देव को गलत तरीके से अर्घ्य देते हैं। आइए जानते हैं कि सूर्य को अर्घ्य देते समय कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए।इस बार उगते सूर्य को 31 अक्टूबर को अर्घ्य दिया जाएगा।

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उगते सूर्य को अर्घ्य देते वक्त न करें ये गलतियां

KEY HIGHLIGHTS
  • 31 अक्टूबर को दिया जाएगा उगते सूर्य को अर्घ्य
  • उगते सूर्य को अर्घ्य देते समय ना करें ये गलतियां
  • सूर्य देव की तपस्या में इन 5 बातों का रखें ख्याल

Chhath Puja 2022 Surya Arghya: छठ का महापर्व तीन दिन तक मनाया जाता है। छठ पूजा को सूर्य षष्ठी भी कहते हैं। इस तीन दिवसीय त्योहार में छठी मैय्या और सूर्य देव की उपासना की जाती है। छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। छठ पूजा के दूसरे दिन खरना होता है। इस दिन अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके बाद तीसरे दिन संध्या अर्घ्य पूजन और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस बार उगते सूर्य को 31 अक्टूबर को अर्घ्य दिया जाएगा। कहते हैं कि उगते सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ विशेष नियमों का ख्याल रखना पड़ता है। आइए जानते हैं कि इस दौरान हमें कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए।

इस दिशा में रखें मुख

सूर्य देव को अर्घ्य देते समय अपना चेहरा हमेशा पूर्व दिशा की ओर ही रखें। सूर्य सच्ची श्रद्धा के साथ अर्घ्य देने वालों की ही मनोकामना पूरी करते हैं।

कैसा पात्र करें इस्तेमाल

सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के पात्र का ही प्रयोग करें। भूलकर भी स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन या पात्र का इस्तेमाल न करें।

कैसे पकड़ें जल का पात्र

सूर्य देव को अर्घ्य देते समय जल के पात्र को हमेशा दोनों हाथों से पकड़ें और हाथों को सिर के ऊपर सीधा रखें। अर्घ्य देते समय पात्र में अक्षत और लाल रंग का फूल रखना ना भूलें।

पानी की धार पर किरणों को देखें

सूर्य को अर्घ्य देते समय पानी की धार पर पड़ रही किरणों को देखना बहुत शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस मंत्र का करें जाप

भगवान सूर्य को अर्घ्य देते समय सिर्फ औपचारिकता पूरी न करें, बल्कि पूरे मंत्रोच्चारण के साथ अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय इस मंत्र का स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यम् रूपं हि मण्डलमृचोथ तनुर्यजूंषि।सामानि यस्य किरणा: प्रभवादिहेतुं ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम्।। मंत्र का जाप करें। माना जाता है कि इस महापर्व पर सही विधान से की गई पूजा आपके घर में सुख समृद्धि लेकर आती है। इसलिए यह जरूरी है कि पूजा के समय छोटी—छोटी बातों का ध्यान रखा जाए।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।)

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