अध्यात्म

Chhath Mata Ki Aarti: जय छठी मईया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए...इस आरती के बिना अधूरा है छठ पर्व

Chhath Mata Ki Aarti: छठ पर्व में छठी मैया की आरती जरूर करनी चाहिए। इससे माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यहां देखें छठ आरती के लिरिक्स।

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Chhath Mata Ki Aarti

Chhath Mata Ki Aarti: छठ पर्व में श्रद्धालु सूर्य भगवान और छठी मैया की उपासना करते हैं। ये पर्व उत्तर भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है। लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश में इस पर्व की रौनक देखने लायक होती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार छठ व्रत रखने से घर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही संतान को लंबी आयु की प्राप्ति होती है। जिन लोगों को संतान प्राप्ति की चाह है उनके लिए भी छठ व्रत कल्याणकारी माना जाता है। छठ पूजा के दिन छठी मैया की पूजा करते समय उनकी ये आरती जरूर गानी चाहिए। यहां देखें छठ माता की आरती के लिरिक्स।

Chhath Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi (छठ मईया की आरती लिरिक्स)

जय छठी मईया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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