अध्यात्म

Chhath Aarti Lyrics: जय छठी मईया आरती, छठ पूजा की आरती

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  • Updated Oct 30, 2022, 03:41 PM IST

Chhath Mata Ki Aarti: छठ पर्व में सूर्य देव के साथ छठी मैया की भी पूजा होती है। छठी मैया की पूजा बिना उनकी आरती के अधूरी मानी जाती है।

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छठ माता की आरती

छठ व्रत में सूर्य देव के साथ-साथ छठी मैया की भी उपासना की जाती है। इस दिन महिलाएं 36 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं यानी अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं करती हैं। ये व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, खुशहाल जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। ये सबसे कठिन उपवास माना जाता है। इस व्रत में सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और फिर छठी मैया की आरती गाकर पूजा संपन्न की जाती है। यहां देखें छठ माता की आरती।

छठ माता की आरती (Chhath Mata Ki Aarti)

जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥ जय छठी मैया…

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥ जय छठी मैया…

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥ जय छठी मैया…

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥ जय छठी मैया…

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥ जय छठी मैया…

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥ जय छठी मैया…

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥ जय छठी मैया…

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥ जय छठी मैया…

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥ जय छठी मैया…

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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