Chaturdashi kab hai 2026 (चतुर्दशी कब से कब तक रहेगी), chaitra shukla chaturdashi 2026 date: हिंदू पंचांग में हर तिथि का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। चतुर्दशी तिथि को प्रदोष व्रत के पारण के लिए शुभ मानी जाती है। वहीं यह तिथि अमावस या पूर्णिमा से एक दिन पहले की वजह से भी महत्व रखती है। अभी चल रहे चैत्र मास की बात करें तो कई लोग इस समय कन्फ्यूज हैं कि 31 मार्च 2026 को चतुर्दशी है या 1 अप्रैल को। यदि आप भी यही जानना चाहते हैं तो पंचांग के अनुसार यहां पूरी और स्पष्ट जानकारी दी जा रही है। यहां देखें चैत्र शुक्ल चतुर्दशी कब है 2026 में।
चैत्र शुक्ल चतुर्दशी कब है 2026
दृक पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस प्रकार रहेगी:
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 31 मार्च 2026, सुबह लगभग 06:56 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 1 अप्रैल 2026, सुबह लगभग 07:06 बजे
इसका अर्थ है कि चतुर्दशी तिथि दो दिनों तक प्रभाव में रहेगी, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि विद्यमान रहती है, वही दिन प्रमुख माना जाता है। इसलिए चतुर्दशी का मुख्य पालन 1 अप्रैल 2026 को किया जाएगा।
चतुर्दशी तिथि का धार्मिक महत्व
चतुर्दशी तिथि भगवान शिव से जुड़ी मानी जाती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी विशेष रूप से आध्यात्मिक साधना, उपवास और आत्मशुद्धि का समय मानी जाती है। शास्त्रों में इसे रिक्ता तिथि कहा गया है, जिसका स्वामी भगवान शिव माने जाते हैं। इस दिन व्यक्ति अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता का त्याग कर आत्मचिंतन करता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए जप-तप और ध्यान से मानसिक शांति, बाधा निवारण और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
चतुर्दशी के दिन क्या करें
चतुर्दशी तिथि को साधना और संयम का दिन माना गया है। इस दिन ये कार्य शुभ माने जाते हैं:
- भगवान शिव का जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
- शाम के समय दीपक जलाकर ध्यान करें
- जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान करें
- क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूरी रखें
चतुर्दशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए
चतुर्दशी तिथि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है जो कि इस प्रकार हैं -
- नए शुभ कार्य या मांगलिक शुरुआत टालें
- झगड़ा, अपशब्द या कठोर व्यवहार न करें
- मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से बचें
- अनावश्यक खर्च या जोखिम भरे निर्णय न लें
क्योंकि यह तिथि साधना प्रधान मानी जाती है, इसलिए इस दिन भोग से अधिक योग पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
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