सिद्धार्थ एस कुमार, अंक ज्योतिषचार्य
नवरात्रि का पर्व हमारे जीवन में काफी अहमियत रखता हैं। हर वर्ष में पांच नवरात्रि होती हैं - चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri), शारदीय नवरात्रि, पौष, माघ और आसाढ़ नवरात्रि। इन नवरात्रि में से चार नवरात्रि (माघ, चैत्र, आषाढ, और शारदीय नवरात्रि) प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है वही पौष नवरात्रि (शाकम्भरी नवरात्रि) अष्टमी तिथि से शुरू हो कर पूर्णिमा तक मनाया जाता हैं।
चैत्र नवरात्रि और नव वर्ष (Chaitra Navratri And Hindu Nav Varsh 2023)
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा (प्रथम) तिथि से शुरू होता है। इस वर्ष ये तिथि (उदय तिथि अनुसार) , २२ मार्च २०२३ को पर रहा हैं और उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जायेगी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिन्दू नव वर्ष (चंद्र वर्ष) की शुरुआत मानी जाती है। इस नव चंद्र वर्ष की शुरुआत , बुधवार से हो रही हैं इसीलिए इस वर्ष का राजा बुध देव को माना गया है। नए वर्ष का राजा बुध देव होने की वजह से वाणी से जुड़े कार्यक्षेत्र में लाभ देखा जा सकता है। साथ ही साथ इस वर्ष अनुमान से अधिक बारिश हो सकती हैं।
चैत्र नवरात्रि और पंचक (Chaitra Navratri And Panchak)
इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत पंचक में ही होगी। पंचक का प्रारम्भ १९ मार्च से हुआ था जो की २३ मार्च तक रहेगा। पंचक का प्रारम्भ रविवार से हुआ हैं इसलिए इस पंचक को रोग पंचक कहा जाता है। सामान्य जीवन में पंचक के अशुभ प्रभाव भी देखें जाते हैं। आम तौर पर पंचक का नवरात्रि पर प्रभाव कम ही होता हैं लेकिन इस वर्ष पंचक की निर्माण के साथ साथ और गृह नक्षत्रों की स्तिथि के सामायिक विश्लेषण से ये समय बहुत ज्यादा अच्छा नहीं है। विशेष व्यक्तियो और बड़े पदों आसन्न व्यक्तियों के जीवन में रोग आने की संभावना हो सकती है। उनके जीवन में स्वस्थ्य का उतार चढ़ाव हो सकता है। साथ ही साथ पशु पक्षियों को भी रोग हो सकता हैं और उनसे जुड़े कार्यक्षेत्र में लोगो को नुक्सान हो सकता है।
चैत्र नवरात्रि और ग्रह नक्षत्र (Chaitra Navratri And Grah-Nakshtra)
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन पांच ग्रह (गुरु देव, सूर्य देव, बुध देव, चंद्र देव, और अरुण देव) का मीन राशि में एक युति का निर्माण होग। साथ ही साथ नवरात्रि में चार ग्रह देवता अपनी स्तिथि का परिवर्तन भी करेंग। इस समय शुक्र देव और राहु देव भी मेष राशि में युति में रहेंगे। गृह नक्षत्रों के समसायिक अध्यन सत्ता पक्ष और जनता की बीच दूरी को दर्शाता है। सरकार द्वारा लिए गए फैसलों पर भारी जन विरोध देखा जा सकता है। सीमा पर भी तनाव की स्थिति बन सकती हैं और सरकार और आतंरिक और बाहरी दोनों सीमा पर ध्यान देने की जरुरत पर सकती हैं। महिला से जुडी हुई कोई घटना (जैसे की कोई क्राइम या कोई सेक्स स्कैंडल) पूरे देश को हतप्रभ और हैरान कर सकती हैं।
माता का वाहन (Mata Ka Vahan)
इस वर्ष माता का आगमन नौका पर हो रहा है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पूरे नौ दिन की होगी | नौका पर माता का आगमन सर्व सिद्धि धायक और साथ ही साथ किसानो के लिए काफी लाभदायक होता है। इस वर्ष फ्रूट्स, वेजिटेबल और गन्ने की खेती काफी अच्छी होगी और किसानो अच्छा मुनाफा होगा। साथ ही साथ वर्षा की अधिक्तता की वजह काफी हिस्सों में पानी से जुडी हुई समस्या जैसे की बाढ़, पानी से जुडी बिमारी आने की संभावना रहती है।
घटस्थापना का मुहूर्त (Ghatasthapana Muhurat 2023)
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि के घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.05 से 12.35 बजे सबसे शुभ मुहूर्त है। मंदिरो और अन्य धार्मिक और सामजिक मंच के लिए सुबह 6.23 से 7.32 बजे भी शुभ मुहूर्त हैं।
घट स्थापना मुहूर्त शुभ मुहूर्त- 06:23 AM से 07:32 AM तक (01 घंटा 09 मिनिट)
प्रतिपदा तिथि - 21 मार्च 2023 को रात्रि 10:52 बजे - 22 मार्च 2023 को रात्रि 08:20 बजे
मीण लग्न - 22 मार्च 2023 को 06:23 - 07:32 पूर्वाह्न
चैत्र नवरात्रि विशेष उपाय (Chaitra Navratri Upay)
इस वर्ष की गृह स्थिति को ध्यान में रखते हुए चैत्र नवरात्रि में देवी भागवत और रामायण को पढ़ना और सुनना देश दुनिया के लिए काफी लाभदायक रहेगा। इस नवरात्रि घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली और दीपक करना भी काफी लाभदायक रहेगा
