Chaiti Chhath Aarti, Chhathi Maiya Ki Aarti: हिंदू धर्म में सूर्य उपासना का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह चार दिवसीय व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को होता है। इस दिन व्रती उपवास रखकर भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करते हैं। संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य देने के बाद पूजा संपन्न होती है। छठ पूजा में विशेष रूप से छठी मैया की आरती गाई जाती है, जिससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। यह आरती भक्तों की आस्था को प्रकट करती है और छठी मैया की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन मानी जाती है।
छठी मैया की आरती-
ॐ जय छठी मइया, सुख संपत्ति दैया।
जो कोई तुमको ध्यावे, मनवांछित फल पावे॥
सूर्य की उपासना करूँ, तेरा ध्यान लगाऊँ।
भक्ति भाव से जो आए, उसके संकट मिटाऊँ॥
सूप भर अर्घ चढ़ाऊँ, नारियल पूजन करूँ।
गन्ना और फल धराऊँ, प्रेम दीप जलाऊँ॥
तुमने ही महिमा फैलाई, सबके कष्ट मिटाई।
जो भी सच्चे मन से ध्यावे, उसकी नैया पार लगाई॥
करो कृपा हे मैया, दूर करो संकट हमारा।
भक्तों की लाज निभाना, सुख-समृद्धि देना सारा॥
ॐ जय छठी मइया, सुख संपत्ति दैया।
जो कोई तुमको ध्यावे, मनवांछित फल पावे॥
चैती छठ पूजा का महत्व-
छठ पूजा न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव की आराधना से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य लाभ होता है। छठी मैया की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस पूजा के दौरान श्रद्धालु पवित्र जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा करने से इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है।
