Jitiya Vrat 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: जीवित्पुत्रिका व्रत की ऐसे हुई शुरुआत, जानें पूजा मंत्र-विधि और कथा
Jivitputrika, Jitiya Vrat 2022 Date Kab Hai, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। इस दिन माताएं संतान के सुखी जीवन और दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। यहां जानें इस वर्ष जितिया व्रत कब रखा जा रहा है।
Jivitputrika, Jitiya Vrat 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List: हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर जितिया व्रत रखा जाता है। यह व्रत हिंदू धर्म में बहुत विशेष माना गया है। जीवित्पुत्रिका का व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। माना जाता है कि संतान प्राप्ति के लिए भी जिउतिया का व्रत रखना लाभदायक है।
हर साल जीवित्पुत्रिका का व्रत नहाए-खाय से प्रारंभ होता है और पारण पर समाप्त हो जाता है। इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए नहाए-खाय की तिथि विश्वकर्मा पूजा के दिन पड़ रही है। जीवित्पुत्रिका या जितिया या जिउतिया व्रत वर्ष के कुछ सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस दिन माताएं अपने संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और पारण तिथि पर ही अपना व्रत तोड़ती है।
पढ़ें- Jitiya Vrat 2022 Date, Puja Timings
इस वर्ष रक्षाबंधन और जन्माष्टमी तिथि की तरह जितिया व्रत की तिथि को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में आप इस लाइव ब्लॉग के माध्यम से जिउतिया व्रत की सही तिथि जान सकते हैं। इसके साथ यहां जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए पूजा का मुहूर्त, व्रत विधि, शुभ मुहूर्त, कथा, आरती, व्रत व उपाय समेत अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देखें।
Jitiya Vrat 2022: वर्ष 2022 में जितिया व्रत कब है?
भारत के विभिन्न प्रदेशों में जितिया या जीवित्पुत्रिका के व्रत को जिउतिया और जीमूतवाहन व्रत भी कहा जाता है। इस वर्ष 17 सितंबर यानी आज नहाए-खाय की तिथि के बाद 18 सितंबर को निर्जला व्रत और 19 सितंबर को व्रत का पारण है।
जितिया व्रत 2022 की बहुत-बहुत बधाई!
बच्चों के लिए भी सेहत का वरदान लाए।
आपको और आपके पूरे परिवार को
जितिया पर्व की बहुत बधाई।
मनचाही मुराद पूरी हो आपकी
संतान को मिले लंबी उम्र
सुख, सौभाग्य और संतति दें,
हरे लें सारे दुख और क्लेश।
जितिया व्रत 2022 की बहुत-बहुत बधाई!
Happy Jitiya 2022: मुबारक हो आपको जितिया का त्यौहार

जितिया शुभ योग
जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तक चलता है। इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन सिद्धि योग बन रहा है जो इस व्रत के महत्व में वृद्धि करेगा।
जीवित्पुत्रिका व्रत की ऐसे हुई शुरुआत
महाभारत के युद्ध के समय अपने पिता की मृत्यु के बाद अश्वत्थामा बेहद नाराज हुए। इसी गुस्से में वह पांडवों के शिविर में घुस गए. शिविर के अंदर उस वक्त 5 लोग सो रहे थे। अश्वत्थामा को लगा कि, वो लोग पांडव हैं और अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए उन्होंने उन पांचों को मार डाला।
हालांकि असल में वह द्रौपदी की पांच संताने थीं। इस बात की खबर जब अर्जुन को मिली तो उन्होंने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उनकी दिव्यमणि छीन ली, अब अश्वत्थामा के गुस्से की आग और बढ़ चली और उन्होंने बदला लेने के लिए अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को उसके गर्भ में ही नष्ट कर दिया।
लेकिन भगवान कृष्ण ने अपने सभी पुण्य का फल उत्तरा की उस अजन्मी संतान को देकर उसे फिर से जीवित कर दिया मर कर पुनः जीवित होने की वजह से उस बच्चे का नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। उसी समय से बच्चों की लंबी उम्र के लिए और मंगल कामना करते हुए जितिया का व्रत रखे जाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
जितिया व्रत पूजा मंत्र
पूजा मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
जितिया व्रत पूजा सामग्री
इस व्रत में भगवान जीमूत वाहन, गाय के गोबर से चील-सियारिन की पूजा का विधान है। जीवित्पुत्रिका व्रत में खड़े अक्षत(चावल), पेड़ा, दूर्वा की माला, पान, लौंग, इलायची, पूजा की सुपारी, श्रृंगार का सामान, सिंदूर, पुष्प, गांठ का धागा, कुशा से बनी जीमूत वाहन की मूर्ति, धूप, दीप, मिठाई, फल, बांस के पत्ते, सरसों का तेल, खली, गाय का गोबर पूजा में जरूरी है।
जितिया व्रत 2022: बीच में नहीं छोड़ना चाहिए व्रत
मान्यता के अनुसार जितिया व्रत बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। एक बार उपवास रखने पर हर वर्ष व्रत रखना अनिवार्य होता है। खाने में लहसुन, प्याज, मांसाहार का प्रयोग वर्जित होता है और इसमें जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें। व्रत के सभी नियमों का पालन करना चाहिए।
Jitiya Vrat 2022: पारण के बाद करें दान
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें। इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें। इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है। पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है। पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें।
Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत का महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। महाभारत युद्ध में जब द्रोणाचार्य का वध कर दिया गया तो उनके पुत्र आश्वत्थामा ने क्रोध में आकर ब्राह्रास्त्र चल दिया जो कि अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहा शिशु नष्ट हो गया। तब भगवान कृष्ण ने इसे पुनः जीवित किया। इस कारण इसका नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। मान्यता है कि इस व्रत से संतान की प्राप्ति होती है और उनके सुख समृद्धि में वृद्धि होती है।
इन राज्यों में मुख्य रुप से रखा जाता है व्रत
जीवित्पुत्रिका व्रत बिहार, उत्तर प्रदेष, बंगाल और झारखंड राज्य में मुख्य रूप से रखा जाता है। इस व्रत में महिलाएं निर्जला व्रत रखकर संतान की सलामती की कामना करती हैं।
Happy Jitiya 2022: जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं
जीवित्पुत्रिका व्रत है
गवाह ममत्व का
मां को नमन जो
प्रतिरूप है ईश्वर का
बारम्बार नमन
जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं
चिराग हो तुम घर का
राग हो तुम मन का
रहो सलामत
युगों युगों तक
फैलाओ यश कीर्ति
Happy Jitiya 2022
Jitiya Vrat Shubh Muhurat: जितिया व्रत तिथि और मुहूर्त
उदयातिथि के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर 2022 को रखा गया। इस व्रत का पारण 19 सितंबर 2022 को किया जा रहा है। जितिया व्रत (18 सितंबर) के दिन सिद्धि योग सुबह 06:34 तक था। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:51 से दोपहर 12:40 तक, लाभ व अमृत मुहूर्त- सुबह 9:11 से दोपहर 12:15 तक, उत्तम मुहूर्त- दोपहर 1:47 से 3:19 तक रहा।
Jitiya Vrat Puja Mantra: पूजा मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
Jitiya Vrat Aarti: जितिया व्रत की आरती के लिरिक्स
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप..
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप..
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप..
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप..
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप..
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप..
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥
ओम जय कश्यप…
Jivitputrika Vrat Katha: जितिया व्रत की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जितिया व्रत का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार जब युद्ध में अश्वत्थामा के पिता की मृत्यु हो गई तो वह बहुत क्रोधित हो गया। पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए वह पांडवों के शिविर गया और उसने वहां जाकर 5 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी। उसे लगा कि वह 5 लोग पांडव थे।
लेकिन उसकी इस गलतफहमी की वजह से पांडव जिंदा बच गए। जब पांडव अश्वत्थामा के सामने आए तो उसे पता चला कि उसने पांडवों की जगह द्रोपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी है। अर्जुन को जब इस बात का पता चला तो वह बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उससे दिव्य मणि छीन ली।
इस बात का बदला लेने के लिए अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रही संतान को मारने की योजना बनाई। उसने गर्भ में पल रहे बच्चे को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया, जिसकी वजह से उत्तरा का गर्भ नष्ट हो गया। लेकिन उस बच्चे का जन्म लेना आवश्यक था इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने उत्तरा के मरे हुए संतान को गर्भ में फिर से जीवित कर दिया।
उत्तरा का संतान गर्भ में मर कर जीवित हुआ था, इसलिए इस व्रत का नाम जीवित्पुत्रिका पड़ा। तभी से सभी माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करने लगी। तभी से यह व्रत संसार में विख्यात हो गया।
व्रत से हर मुराद होती है पूरी
जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है, कि इस व्रत को करने से मन की हर मुराद पूरी करती हैं। यह व्रत खासकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल जैसे राज्यों में मनाया जाता हैं।
खाया जाता है नोनी साग
जितिया व्रत के पारण में नोनी साग खाया जाता है। नोनी साग खाने से पेट की समस्या नहीं होती है। इसके अलावा लीवर को भी मजबूत बनाता है नोनी साग।
पारण की सामग्री
जितिया पारण की पूजा में अक्षत (चावल), पेड़ा, दूर्वा की माला, पान, लौंग, इलायची, पूजा की सुपारी, श्रृंगार का सामान, सिंदूर, पुष्प, गांठ का धागा, कुशा से बनी जीमूतवाहन की मूर्ति, धूप, दीप, मिठाई, फल, बांस के पत्ते, सरसों का तेल, खली, गाय का गोबर होना जरूरी है।
महिलाएं करती हैं जितिया लॉकेट धारण
जीवित्पुत्रिका व्रत के पारण के बाद महिलाएं लाल रंग का धागा अपने गले में पहनती हैं। व्रती महिलाएं जितिया का लॉकेट भी धारण करती हैं। पूजा हो जाने के बाद तेल बच्चों के सिर पर आशीर्वाद के तौर पर लगाने की परंपरा है।
स्नान के बाद ही करें पारण
जितिया व्रत के पारण के दिन प्रातः काल स्नानादि कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद उन्हें विधि पूर्वक पूजा करने के बाद ही व्रत पारण करना चाहिए।
क्षमता के अनुसार करें दान
जितिया व्रत के पारण के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान और दक्षिणा दें। व्रत पारण का समय सुबह 6.10 बजे के बाद होता है।
सूर्योदय के बाद व्रत का पारण शुभ
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय के बाद व्रत पारण करना शुभ होता है। इसके अलावा दोपहर तक पारण जरूर कर लें।
मुहूर्त के अनुसार करें व्रत का पारण
जितिया व्रत का पारण मुहूर्त के अनुसार ही करना चाहिए। जितिया व्रत का पारण हमेशा व्रत रखने वाले दिन के अगले दिन किया जाता है।
जितिया व्रत की आरती
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप..
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप..
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप..
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप..
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप..
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप..
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥
ओम जय कश्यप…
मान साफ होने पर फलित होता है व्रत
जितिया का व्रत तभी फलित होता है, यदि आपका मन साफ हो। ऐसे में मन, वचन और कर्म में इस दिन शुद्धता लाएं।
संतान के लिए रखें व्रत
जितिया व्रत संतान के लिए रखा जाता है। ऐसे में कोशिश करें संतान को इस दिन किसी भी तरह का कोई भी दुख नहीं पहुंचाए। किसी के प्रति घृणा भी न रखें।
संतान को पूजा पाठ में करें शामिल
जितिया व्रत के दिन अपनी संतान को भी पूजा पाठ में शामिल करने की पूरी कोशिश करें। वहीं, व्रत के दिन संतान के द्वारा दान कराने से उसे लंबी उम्र और स्वस्थ शरीर मिलता है।
गोबर से बनाए चील और सियार की मूर्ति
जितिया व्रत में चील और सियार की गोबर से मूर्ति बनाकर उनकी विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा कुश से निर्मित जीमूतवाहन मूर्ति की पूजा करनी चाहिए।
करना चाहिए ब्रह्मचर्य का पालन
जितिया व्रत रख रही महिलाओं को तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और काम की भावनाओं से दूर रहना चाहिए।
न बोले कोई भी अपशब्द
जितिया व्रत रख रही महिलाएं इस दिन भूलकर भी कोई अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। इसके अलावा मन में किसी भी प्रकार के कोई भी गलत विचार भी न रखें।
बीच में भूलकर नहीं छोड़ना चाहिए व्रत
मान्यताओं के अनुसार जितिया व्रत यदि शुरु कर दिया है तो इसे भूलकर भी नहीं छोड़ना चाहिए। वहीं, कोई घर में कोई महिला व्रत की परंपरा शुरू करती हैं तो बहू को इस व्रत की परंपरा को आगे बढ़ाना होगा।
जितिया पर वायरल हो रहा है ये भोजपुरी गीत
जीवित्पुत्रिका व्रत कथा
इस व्रत का संबंध महाभारत काल से है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध के समय अश्वत्थामा अपने पिता की मौत से काफी विचलित हो गया था। उसके अंदर इतनी ज्यादा नफरत पैदा हो गयी थी की उसने अपने पिता के मौत की बदला लेने के लिए रात को सो रहे द्रौपदी के पांच बेटों को पांडव समझकर उनकी हत्या कर दी। उसका मन इतने से भी जब नहीं भरा तो उसने अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ में पल रहे उसकी संतान को भी मार डाला। अश्वत्थामा के बढ़ते आतंक को देखकर अर्जुन ने उसे बंदी बना लिया और श्री कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ को फिर से जीवित कर दिया। बता दें कि, अभिमन्यु की पत्नी का नाम उत्तरा था और उसने जिस संतान को जन्म दिया उसका नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। आगे जाकर जीवित्पुत्रिका ही राजा परीक्षित के नाम से मशहूर हुए। इसके बाद से ही महिलाएं अपने संतान की लंबी उम्र के लिए जीवित्पुत्रिका का व्रत रखने लगीं।
जितिया व्रत तिथि और मुहूर्त
अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 17 सितंबर 2022 को दोपहर 2.14 मिनट से शुरू होगी। अष्टमी तिथि का समापन 18 सितंबर 2022 को शाम 04.32 मिनट तक रहती है। उदयातिथि के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर 2022 को रखा जाएगा, इस व्रत का पारण 19 सितंबर 2022 को किया जाएगा।
जितिया व्रत पूजा विधि
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें। इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें। इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है। इनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है। पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है, पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें।
Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत पूजा मंत्र
पूजा मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
व्रत रखने से बच्चों के जीवन में आती है सुख-समृद्धि
जीमूतवाहन की प्रतिमा जल में स्थापित करके पूजा शुरू की जाती है। पूजा में धूप, दीप, अक्षत, फूल, माला अर्पित कर पूजा की जाती है। प्रतिमा पर सिंदूर का टीका लगाया जाता है, कहते हैं इससे मनचाहा वरदान मिलता है। बच्चों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत पूजा सामग्री
इस व्रत में भगवान जीमूत वाहन, गाय के गोबर से चील-सियारिन की पूजा का विधान है। जीवित्पुत्रिका व्रत में खड़े अक्षत(चावल), पेड़ा, कुशा से बनी जीमूत वाहन की मूर्ति, धूप, दीप, मिठाई, फल, बांस के पत्ते, सरसों का तेल, दूर्वा की माला, पान, लौंग, इलायची, पूजा की सुपारी, श्रृंगार का सामान, सिंदूर, पुष्प, गांठ का धागा, खली, गाय का गोबर पूजा में जरूरी है।
जितिया शुभ योग
जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तक चलता है। ये व्रत मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेष, बंगाल, झारखंड में धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन सिद्धि योग बन रहा है जो इस व्रत के महत्व में वृद्धि करेगा।
बीच में जितिया व्रत छोड़ना माना जाता है अपशगुन
मान्यता के अनुसार जितिया व्रत बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। एक बार उपवास रखने पर हर वर्ष व्रत रखना अनिवार्य होता है। खाने में लहसुन, प्याज, मांसाहार का प्रयोग वर्जित होता है। जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें। व्रत के सभी नियमों का पालन करना चाहिए।
Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत का महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। महाभारत युद्ध में जब द्रोणाचार्य का वध कर दिया गया तो उनके पुत्र आश्वत्थामा ने क्रोध में आकर ब्राह्रास्त्र चल दिया जो कि अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहा शिशु नष्ट हो गया। तब भगवान कृष्ण ने इसे पुनः जीवित किया. इस कारण इसका नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। तभी से माताएं इस व्रत को पुत्र के लंबी उम्र की कामना से करने लगी। मान्यता है कि इस व्रत से संतान की प्राप्ति होती है और उनके सुख समृद्धि में वृद्धि होती है।
जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं
जितिया व्रत पर आप सबको बधाई।
आपके घर में सुख शांति, समृद्धि का वास हो आपकी संतान दीर्घायु हो।
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं
Jitiya Vrat 2022 Inauspicious Muhurat: जितिया व्रत 2022 पर किस मुहूर्त में ना करें पूजा
राहुकाल- दोपहर 12:01 से 12:30 तक
यमगंड- सुबह 07:30 से 09 तक
गुलिक काल- सुबह 10:30 मिनट से 12 तक
दुर्मुहूर्त काल- दोपहर 11:47 से 12:35 तक
Jitiya Vrat 2022 Date and Time in Hindi: वर्ष 2022 में जितिया व्रत कब है?
भारत के विभिन्न प्रदेशों में जितिया या जीवित्पुत्रिका के व्रत को जिउतिया और जीमूतवाहन व्रत भी कहा जाता है। इस वर्ष 17 सितंबर यानी आज नहाए-खाय की तिथि है। 18 सितंबर को निर्जला व्रत किया जाएगा और 19 सितंबर को व्रत का पारण होगा।
Jivitputrika (Jitiya) Vrat Katha: जितिया व्रत की पौराणिक कहानी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जितिया व्रत का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार जब युद्ध में अश्वत्थामा के पिता की मृत्यु हो गई तो वह बहुत क्रोधित हो गया। पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए वह पांडवों के शिविर गया और उसने वहां जाकर 5 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी। उसे लगा कि वह 5 लोग पांडव थे। लेकिन उसकी इस गलतफहमी की वजह से पांडव जिंदा बच गए। जब पांडव अश्वत्थामा के सामने आए तो उसे पता चला कि उसने पांडवों की जगह द्रोपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी है। अर्जुन को जब इस बात का पता चला तो वह बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उससे दिव्य मणि छीन ली।
इस बात का बदला लेने के लिए अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रही संतान को मारने की योजना बनाई। उसने गर्भ में पल रहे बच्चे को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया, जिसकी वजह से उत्तरा का गर्भ नष्ट हो गया। लेकिन उस बच्चे का जन्म लेना आवश्यक था इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने उत्तरा के मरे हुए संतान को गर्भ में फिर से जीवित कर दिया। उत्तरा का संतान गर्भ में मर कर जीवित हुआ था, इसलिए इस व्रत का नाम जीवित्पुत्रिका पड़ा। तभी से सभी माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करने लगी। तभी से यह व्रत संसार में विख्यात हो गया।
इन राज्यों में ज्यादा सेलिब्रेट किया जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत
ऐसा कहा जाता है, कि इस व्रत को करने से मन की हर मुराद पूरी करती हैं। यह व्रत खासकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल जैसे राज्यों में मनाया जाता हैं। जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। आपको बता दें यह व्रत निर्जला होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कथा पढ़ने या सुनने (Jivitputrika Vrat Katha hindi mein) से संतान की लंबी आयु होती है।
Jitiya Vrat 2022 Puja Muhurat: जीवित्पुत्रिका व्रत पर कैसे करें पूजा?
जितिया व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें फिर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें। स्नान करने के बाद इस दिन साफ वस्त्र धारण करें। अब भगवान के सामने व्रत करने का संकल्प लें। फिर शाम को प्रदोष काल में कुश से जीमूतवाहन की मूर्ति बनाएं। जीमूतवाहन को जलपात्र में स्थापित करें फिल उन्हें दीप, बांस के पत्ते, फूल, खल्ली, माला, धूप, सरसों का तेल आदि अर्पित करें। इसके बाद गाय के गोबर और मिट्टी के मिश्रण से सियार और चील बनाएं। इनकी मूर्ति पर खीरा, सिंदूर, चूड़ा और दही चढ़ाएं। फिर कथा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
Jivitputrka Vrat 2022 Shubh Muhurta: जितिया व्रत पर शुभ मुहूर्त
सिद्धि योग- 18 सितंबर 2022 को सुबह 06:34 तक
अभिजीत मुहूर्त- 18 सितंबर 2022 को सुबह 11:51 से दोपहर 12:40 तक
लाभ व अमृत मुहूर्त- 18 सितंबर 2022 को सुबह 9:11 से दोपहर 12:15 तक
उत्तम मुहूर्त- 18 सितंबर 2022 को दोपहर 1:47 से 3:19 तक
Jivitputrika Vrat 2022: 19 सितंबर को होगा व्रत का पारण
जितिया का व्रत बेहद कठिन माना जाता है क्योंकि इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि से नवमी तिथि तक चलता है। 18 सितंबर को यह व्रत रखा जाएगा। फिर 19 सितंबर को इस व्रत का पारण किया जाएगा।
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर रखा जाता है जितिया का व्रत
हिंदू पंचांग के अनुसार, जीवित्पुत्रिका या जितिया का व्रत (Jitiya Vrat 2022) हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर रखा जाता है (Jivitputrika Vrat 2022)। अपने संतान के उज्जवल भविष्य व दीर्घायु के लिए माताएं यह व्रत रखती हैं व विधि अनुसार पूजा करती हैं।
प्रसन्न होकर पक्षीराज ने दिया प्राणदान
पक्षीराज ने देखा कि जीमूतवाहन दर्द से कराह रहे हैं तो उन्होंने पाहड़ के शिखर पर उन्हें मुक्त किया। जीमूतवाहन ने सारी घटना बताई, जिसे सुनकर गरुड़ देव ने उन्हें प्राणदान दिया। इसके साथ ही पक्षीराज ने वचन दिया कि वह कभी नाग को अपना भोजन नहीं बनाएंगे। इसके बाद हर अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी में जीमूतवाहन की पूजा की जाती है।
वृद्धा स्त्री के बेटे को बनना था भोजन
वृद्ध स्त्री ने बताया कि आज उसके बेटे शंखचूड़ को पक्षीराज के पास जाना है। वृद्धा की बात सुनते ही जीमूतवाहन ने कहा कि उनके बेटे के बदले में वह पक्षीराज गरुड़ का भोजन बनकर जाएंगे और वह लाल कपड़े में लिपटकर गरुड़ देव के पास पहुंच गए। गरुड़ देव ने उन्हें अपने पंजे में दबोजा और उड़ गए।
वृद्ध स्त्री से मिले जीमूतवाहन
जीमूतवाहन एक दिन जंगल में वे एक वृद्ध स्त्री से मिले। इस वृद्ध स्त्री का संबंध नागवंश से था लेकिन, वह स्त्री काफी डरी और सहमी थी और रो रही थी। जब जीमूतवाहन की नजर उस वृद्धा पर पड़ी तो उन्होंने रोने का कारण पूछा। वृद्धा ने बताया नागों ने पक्षीराज गरुड़ को वचन दिया है कि हर रोज एक नाग उनके पास उनका खाना बनकर आएगा।
गंधर्व राजकुमार थे जीमूतवाहन
जितिया व्रत में जीमूतवाहन भगवान की पूजा की जाती है। जीमूतवाहन एक गंधर्व राजकुमार थे। वह बेहद परोपकारी इंसान थे। उनके पिता ने राजपाट बेटे को सौंपकर वन में रहने के लिए चले गए थे। उनका मन नहीं लगता था। जीमूतवाहन भी राजपाट अपने भाई को सौंपकर वन में चले गए थे। उनका विवाह मलयवती से हुआ था।
इस वक्त होगा राहुकाल
जितिया व्रत के दिन राहुकाल शाम 4:30 बजे से शाम छह बजे तक होगा। सूर्योदय सुबह 06 बजकर 11 मिनट पर होगा। वहीं, सूर्यास्त छह बजकर 26 मिनट पर होगा।
जितिया व्रत के दिन अभिजीत, विजय और गोधुली मुहूर्त
18 सितंबर 2022 का अभिजीत मुहूर्त- 11:53 am से 12:45 pm तक।
18 सितंबर 2022 का विजय मुहूर्त- 02:31 pm से 03:26 pm तक
18 सितंबर 2022 का गोधुली मुहूर्त--06:41 pm से 07:06 pm तक
अहिरावती ने भगवान से मांगा वरदान
कपूरावती परेशान थीं कि उसकी बहन के घर से रोने की आवाज क्यों नहीं आ रही है। जब बहन के घर गई तो बेटों को जिंदा देख चौंक गई। भगवान जीमूतवाहन प्रकट हुए। उन्होंने दोनों बहनों को उनके पिछले जन्म की कथा सुनाई। दुख में कपूरावती की जान चली गई। बहन अहिरावती ने वरदान मांगा कि आज के दिन यदि कोई व्रत रखेगी और भगवान की पूजा करेगी तो उसे कोई कष्ट नहीं होगा। इसी के बाद से जितिया व्रत शुरू हुआ।
बच्चों के काट दिए सिर
अहिरावती ने सात बच्चों को जन्म दिया। वहीं, कपूरवती के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते थे। ईष्या से कपूरवती ने अपनी बहन के सातों बच्चों के सिर काटकर बहन के पास घड़े में रखकर वापस भेज दिए। उस दिन भी अहिरावति का जितिया व्रत था। अहिरवती ने भगवान जीमूतवाहन को याद किया। सातों घड़ों पर जल छिड़क दिया। बच्चे दोबारा जीवित हो गए।
कन्याओं के रूप में हुआ जन्म
जितिया व्रत वाले दिन नगर में मृत्यु हो गई। मृत शरीर को निर्जन स्थान पर लाया गया। सियारिन ने व्रत भूलकर मांस खा लिया। वहीं, चील ने व्रत पारण के दिन ही खोला। अगले जन्म में चील अहिरावती और सियारिन कपूरवती बनीं। अहिरावती अपने राज्य की रानी बनी। कपूरवती राजा के छोटे भाई की पत्नी बनी।
सियार और चील की पूजा
जितिया व्रत में सियार और चील की पूजा की जाती है। इसके पीछे की व्रत कथा भी सुनी जाती है। नगर के एक वीरान जगह पर पीपल का पेड़ था। इसमें एक चील रहता था। वहीं, नीचे सीयारिन रहती थीं। कुछ महिलाओं ने उन्हें देखकर जितिया व्रत रखा।
मछली खान का है रिवाज
जितिया व्रत की शुरुआत से पूर्व मछली भी खाई जाती है। बिहार के मिथिला क्षेत्र में व्रत की शुरुआत मछली खाकर होती है। मछली खाकर व्रत शुरू करना बेहद शुभ होता है।
पूजा में चढ़ाया जाता है सरसों का तेल और खल
जितिया व्रत की पूजा के दौरान जीमूतवाहन को सरसों का तेल और खल चढ़ाया जाता है। पारण के बाद ये तेल बच्चों के सिर पर लगाया जाता है। इसे पूजा का आशीर्वाद माना जाता है।
जितिया व्रत 2022 की पूजा के लिए मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
इन मुहूर्त में नहीं करनी चाहिए पूजा
राहुकाल- दोपहर 12:01 से 12:30 तक
यमगंड- सुबह 07:30 से 09 तक
गुलिक काल- सुबह 10:30 मिनट से 12 तक
दुर्मुहूर्त काल- दोपहर 11:47 से 12:35 तक
हैप्पी जितिया व्रत 2022
आज जितिया का पावन दिन है आया,
मां ने रखा है लाडले के लिए निर्जला व्रत,
लंबी हो उम्र उसकी, रहे खुशहाल और निरोग,
यही कामना करतीं मां हर वर्ष.
हैप्पी जितिया व्रत 2022
जितिया व्रत की आरती
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप...
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप...
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप...
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप...
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप...
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप...
जितिया पर होगी किसकी पूजा
जितिया पर व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन जीमूतवाहन देव की पूजा करती हैं। इस दिन कुश से जीमूतवाहन की मूर्ति बनाई जाती है। फिर उनकी विधि अनुसार पूजा की जाती है।
नहाए-खाय पर ना करें इन चीजों का सेवन
नहाए-खाय पर व्रत रख रही महिलाओं को लहसुन-प्याज, मांसाहार या तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
जीवित्पुत्रिका व्रत पर पूजा मुहूर्त और शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त और योग बनने वाले हैं। इस दिन महिलाएं अपनी संतान के लिए व्रत रखती हैं और उनके दीर्घायु की कामना करती हैं। 18 सितंबर को इस बार सिद्धि योग बन रहा है। इसके साथ इस दिन अभिजीत, लाभ, अमृत और उत्तम नाम के मुहूर्त रहेंगे।
जितिया व्रत का पारण कब?
2022 में जितिया व्रत कल यानी 18 सितंबर को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 19 सितंबर को किया जाएगा। 19 सितंबर को सुबह अमृत मुहूर्त 06 बजकर 08 मिनट से 07 बजकर 40 मिनट तक रहने वाला है। इस मुहूर्त में पारण करना लाभदायक रहेगा।
ब्रह्माचार्य का करें पालन
जो महिला जितिया का व्रत रखती है उसे व्रत के दौरान ब्रह्माचार्य का पालन करना जरूरी होता है। इसके अलावा उसे मन, वचन और कर्म से भी शुद्ध रहना चाहिए। इस दौरान लड़ाई-झगड़े और कलह-क्लेश से दूर रहना चाहिए।
जितिया व्रत का नियम
जितिया व्रत एक परंपरा की तरह है। इसके नियम के अनुसार, अगर कोई महिला एक बार यह व्रत करती है तो उसे बीच में कभी ये व्रत नहीं छोड़ना चाहिए। पहले सास इस व्रत को करती है फिर घर में जब बहू आ जाती है तो वह यह व्रत रखना शुरू करती है।
जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजन विधि
जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजा प्रदोष काल में होती है। प्रदोष काल में गाय के गोबर से पूजा स्थल को लीपकर स्वच्छ किया जाता है और एक छोटा सा तालाब बनाया जाता है। आप तालाब के निकट जाकर भी पूजा कर सकते हैं। जितिया में शालीवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। इसलिए जीमूतवाहन की कुश निर्मित मूर्ति को जल या फिर मिट्टी के पात्र में स्थापित किया जाता है। इसके बाद पीले और लाल रुई से उन्हें सजाया जाता है। धूप, दीप, अक्षत, फूल, माला जैसी पूजा सामग्रियों के साथ उनका पूजन किया जाता है। इसके बाद महिलाएं संतान की दीर्घायु और उनकी प्रगति के लिए बांस के पात्रों से पूजा करती हैं। पूजा में जीवित्पुत्रिका की व्रत कथा जरूर पढ़ें। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण नवमी के दिन किया जाता है।
जितिया व्रत पर ना करें यह कार्य
भगवान को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है। व्रत रखने से शरीर को भी कई लाभ मिलते हैं। ऐसे में अगर आप जितिया व्रत रख रही हैं तो इस दिन संयम बनाएं रखें। क्रोध से बचें और मन में बुरे विचार ना लाएं।
जितिया व्रत रखने के लिए टिप्स
जितिया व्रत पर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में यह नियम इस व्रत को और कठिन बना देता है। लेकिन कुछ चीजों का ध्यान रख कर आप इस व्रत को आसान बना सकती हैं। इस दिन अपने शरीर को ठंडा रखें, ऐसा करने से आपका शरीर पानी की कमी को संभाल लेगा। इसके साथ डिहाइड्रेशन से बचने के लिए धूप में ना निकलें। इस दिन ऐसा काम ना करें जिसकी वजह से आपको प्यास लगे।
Jitiya Vrat 2022: नहाए-खाय पर क्या खाएं
आज से जितिया व्रत 2022 प्रारंभ हो रहा है। आज जितिया पर्व का पहला दिन है। नहाए-खाय से यह व्रत प्रारंभ होता है। ऐसे तो नहाए-खाय पर सात्विक भोजन किया जाता है। लेकिन कुछ जगहों पर इस दिन मछली और मडुआ रोटी खाने का नियम भी है।
Jitiya Vrat 2022 Mantra: पूजा के समय करें इस मंत्र का जाप
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
Jitiya Vrat 2022 Paran: किन चीजों को खाकर करें जितिया व्रत का पारण
आज यानी 17 सितंबर को नहाए-खाय की तिथि है। कल यानी 18 सितंबर को माताएं निर्जला व्रत रखेंगी, इसके बाद 19 सितंबर को जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण किया जाएगा। नियम के अनुसार, जितिया व्रत का पारण मडुआ और नोनी के साग से किया जाता है। व्रत का पारण करने के लिए महिलाएं सबसे पहले झोर भात अपने मुंह में रखती हैं।
जीवित्पुत्रिका व्रत 2022 तिथि व शुभ मुहूर्त
जीवित्पुत्रिका व्रत हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाता है। इस वर्ष यह तिथि 17 सितंबर और 18 सितंबर दोनों दिन है। ऐसे में लोग कंफ्यूज हैं कि जितिया व्रत कब रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण की अष्टमी तिथि 17 सितंबर को दोपहर 2:14 से प्रारंभ हो रही है जो 18 सितंबर को दोपहर 4:32 बजे समाप्त हो जाएगी। ऐसे में कई पंडितों का कहना है कि 17 सितंबर 2022 को नहाए-खाय होगा और अगले दिन यानी 18 सितंबर को निर्जला व्रत रखा जाएगा। इसके बाद 19 सितंबर को सूर्योदय के बाद इस व्रत का पारण होगा।
इस दिन होगा जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण
पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर नवमी तक जितिया का पर्व मनाया जाता है। इस साल जितिया व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा और 19 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा।
जीवित्पुत्रिका व्रत के नियम
जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत के नियम पूरे तीन दिनों कर चलते हैं। 17 सितंबर को जितिया व्रत की शुरुआत नहाय खाय के साथ होगी। इस दिन महिलाएं स्नानदि करने व पूजा-पाठ करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती है। कुछ जगहों पर इस दिन मछली बनाने व खाने के नियम होते हैं। इसके बाद दूसरे दिन यानी 18 सितंबर को जितिया का व्रत रखा जाता है। इस दिन माताएं जल का एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती। इस दौरान माताएं आमचन तक नहीं करती। फिर 19 सितंबर को तीसरे दिन सुबह सूर्योदय के बाद पूजा करने बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन कई तरह की सब्जियां बनाई जाती है और विशेष भोजन तैयार किए जाते हैं।
कब रखा जाएगा जीवित्पुत्रिका का व्रत
पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर नवमी तक जितिया का पर्व मनाया जाता है। इस साल जितिया व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा और 19 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा।
जीवित्पुत्रिका व्रत का क्या महत्व है? (Jivitputrika Vrat Significance in Hindi)
हिंदू धर्म में जीवित्पुत्रिका व्रत विशेष माना गया है। इस दिन महिलाएं विधि अनुसार निर्जला व्रत रखती हैं और संतान प्राप्ति, संतान की लंबी उम्र, उनके सुखी जीवन और निरोगी जीवन के लिए कामना करती हैं। माना जाता है कि यह व्रत करने से संतान के जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
जितिया व्रत 2022 के पारण का समय (Jitiya Vrat 2022 Paran Time)
इस वर्ष जितिया व्रत का पारण 19 सितंबर, शनिवार को किया जाएगा। इस दिन पारण के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6:10 के बाद से है। यानी आप सुबह 6:10 के बाद से इस व्रत का पारण कर सकती हैं।
जितिया व्रत का मंत्र (Jitiya Vrat Ka Mantra)
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
जीमूतवाहन बहुत जल्द होते हैं प्रसन्न
इस दिन माताएं निर्जला रहकर पूरी श्रद्धा के साथ अपनी संतान की लंबी आयु की कामना के लिए जीमूतवाहन भगवान की पूजा करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को विधि विधान से करने से जीमूतवाहन बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते है। यदि आप भी अपनी संतान की लंबी आयु के लिए इस व्रत को करने की सोच रहे है, तो सबसे पहले इस व्रक की पूजा विधि और मंत्र जरूर जान लेना चाहिए।
जितिया व्रत की पूजा विधि (Jitiya Vrat Ki Puja Vidhi)
- जितिया का व्रत सप्तमी तिथि के दिन से शुरू होता है।
- इस दिन व्रती नहाखा करके जीमूतवाहन की पूजा अर्चना करें।
- अगले दिन सुबह-सुबह नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करके जितिया व्रत का संकल्प करें।
- शाम के समय कुश से जीमूतवाहन की मूर्ति बनाएं।
- अब एक जल पात्र में उन्हें स्थापित करें।
- आप उन्हें लाल और पीला रुई अर्पित करें।
- अपने संतान की सुरक्षा और वृद्धि के लिए जीमूतवाहन को धूप, दीप, बांस के पत्ते, अक्षत, फूल माला, सरसों का तेल और खल्ली अर्पित करें।
- अब गाय के गोबर और मिट्टी से मादा सियार और मादा चील की मूर्ति बनाएं।
Jitiya Vrat 2022 Date, Muhurat
- अब उन्हें सिंदूर खीरा और भीगे हुए केराव चढ़ाएं।
- पूजा करने के बाद जीमूतवाहन और पक्षीराज गरुड़ की कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।
- कथा पढ़ने के बाद अंत में पूरी श्रद्धा के साथ आरती करें।
- अगले दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा करके दिए गए समय पर ही पारण करें।
मडुआ और नोनी से होता है व्रत का पारण
जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण मडुआ और नोनी के साग से होता है। महिलाओं सबसे पहले अपने मुंह में झोर भात रखती हैं।
एक दिन बाद होता है व्रत का पारण
जितिया व्रत पारण अगले दिन किया जाता है। व्रत पारण के बाद ही ही माताएं कुछ ग्रहण करती हैं। व्रत का पारण सूर्योदय के बाद और दोपहर से पहले कर लें।
जानिए राहुकाल समेत पांच अशुभ मुहूर्त का वक्त
जितिया व्रत के दिन राहुकाल शाम 04 बजकर 51 मिनट से 06 बजकर 23 मिनट तक होगा। वहीं, यमगंड दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से 01 बजकर 47 मिनट तक होगा। आडल योग दोपहर तीन बजकर 11 मिनट से 06:08 बजे तक होगा। दुर्मुहूर्त 19 सितंबर को शाम चार बजकर 45 मिनट से पांच बजकर 34 मिनट तक होगा। गुलिक काल दोपहर 03:19 से 04:51 बजे तक होगा।
इन पांच मुहूर्त में न करें पूजा पाठ
जीवित्पुत्रिका व्रत रखने वाली महिलाएं इन मुहूर्त: राहुकाल, यमगण्ड, आडल योग, दुमुर्हूत और गुलिका काल में पूजा न करें।
जितिया व्रत की पूजन सामग्री
जितिया व्रत की पूजा में धूप-दीप, अक्षत, पुष्प, फल, गाय के गोबर से बनी सियारिन और चील की प्रतिमा, जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा, मिट्टी के पात्र आदि सामग्री की जरूरत होगी।
जीवित्पुत्रिका व्रत में पढ़ें शिवजी का ये मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।"
मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र के जाप से जीमूतवाहन भगवान संतान को दीर्घायु करते हैं।
जितिया व्रत की आरती (Jitiya Vrat Aarti)
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप..
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप..
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप..
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप..
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप..
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप..
इन दो काल में ना करें जितिया पर पूजा
यमगंड- सुबह 07:30 से 09 बजे तक
गुलिक काल- सुबह 10:30 से 12 बजे तक
जितिया व्रत पर कब बन रहा है दुर्मुहूर्त काल?
जीवित्पुत्रिका व्रत इस बार 18 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन राहुकाल के साथ दुर्मुहूर्त काल की लगने वाला है। 18 सितंबर को दुर्मुहूर्त काल सुबह 11:47 से दोपहर 12:35 तक रहेगा।
क्या है नहाए-खाय की विधि?
जितिया व्रत नहाए-खाय से प्रारंभ होता है। इस दिन व्रत रख रही महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने चाहिए। अगर पास में गंगा नहीं है तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगा जल मिला लें। इसके बाद नहाए-खाय के दिन महिलाओं को सिर्फ समय का खाना खाना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन का सेवन करने का नियम है। इसके बाद रात में छत के चारों कोने में खाने की चीज रख दें। यह खाना चील या सियारिन के लिए रखा जाता है।
कल से शुरू होगा जितिया का पर्व
जितिया का पर्व इस साल कल यानी 17 सितंबर से शुरू हो रहा है। 17 सितंबर को नहाए-खाय है जिसके बाद परसो यानी 18 सितंबर को व्रत रखा जाएगा।
Jitiya 2022 Muhurat: इन मुहूर्त में ना करें जितिया पर पूजा
राहुकाल- दोपहर 12:01 से 12:30 तक
यमगंड- सुबह 07:30 से 09 तक
गुलिक काल- सुबह 10:30 मिनट से 12 तक
दुर्मुहूर्त काल- दोपहर 11:47 से 12:35 तक

