Holika Dahan 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: होली की रात शुभ होता है हनुमान पूजन, जानिए पूरी पूजन विधि
Holika Dahan 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: होली से पहले परंपरागत तरीके से होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन लोग होलिका जला कर अच्छाई की बुराई पर जीत का जश्न मनाते हैं। यहां देखें होलिका दहन 2022 इस वर्ष कब पड़ रही है। होली की रात हनुमान जी की पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है। इससे साथ जानें होलिका दहन का मुहूर्त, मंत्र, सामग्री, आरती और पूजा विधि।
Holika Dahan 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List: सनातन धर्म में होलिका दहन बहुत विशेष पर्व माना गया है जिसे छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। परंपरा के अनुसार, होलिका दहन की शाम को होलिका जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की जान बचा ली थी और नरसिम्हा भगवान का अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। होली की रात हनुमान जी की पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है।
Holi 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: होली पर करें यह चमत्कारिक उपाय, शत्रुओं से मिलेगा निजात
नरसिम्हा भगवान को भगवान विष्णु का चौथा अवतार माना गया है। होलिका दहन के दौरान भगवान नरसिम्हा की पूजा विधि अनुसार करना चाहिए। इस दिन होलिका जलाने के साथ लोग अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, शांति और बेहतर जीवन के लिए उपाय भी करते हैं।
मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन हमेशा भद्रमुक्त पूर्णिमा पर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि भद्रकाल के दौरान होलिका दहन करना अशुभ है। इस लाइव ब्लॉग के माध्यम से जानें होलिका दहन 2022 की तिथि, शुभ मुहूर्त, समय, पूजा विधि, सामग्री और मंत्र।
होली की रात में करें स्नान
होली की रात हनुमानजी से जुड़ा यह उपाय कुछ इस प्रकार है - इसके लिए होली की रात में स्नान आदि करके पवित्र हो जाएं। यदि आप चाहें तो किसी हनुमान मंदिर जाएं या अपने घर पर ही हनुमानजी की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर पूजा करें।
शुभ होता है हनुमान पूजन
होली की रात हनुमान जी की पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है। कहा जाता है कि इससे सभी कामों में सफलता और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। जो भी भक्त सच्चे मन से हनुमान जी का यह उपाय करता है, उसे हनुमान जी वरदान जरूर देते हैं।
होलिका दहन में ना करें इन लकड़ियों का इस्तेमाल
मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के दिन कभी भी पीपल, आंवला, नीम, बरगद, केला, आम और बेल की लकड़ियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इन लकड़ियों का पूजनीय माना गया है।
होलिका दहन के लिए क्या है सही समय
आज यानी 17 मार्च को होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा है। आज शाम 6:00 से 7:30 तक प्रदोष काल में होलिका पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय था। भद्रा के होने की वजह से आज रात तकरीबन 1:00 बजे के बाद ही होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा।
होलिका दहन पर करें यह उपाय
आज यानी 17 मार्च को होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन लोगों को भाग्योदय के लिए विशेष उपाय करना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन नारियल और सुपारी अर्पित करने से भाग्य जाग सकता है। इस उपाय करना लाभदायक माना गया है।
होलिका दहन पर रहेगा यह नक्षत्र
इस वर्ष होलिका दहन 17 मार्च यानी आज के दिन पड़ रही है। शुक्र के पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में आज होलिका दहन होगा। मान्यताओं के अनुसार, यह ग्रह वैभव, सुख-समृद्धि, उत्सव, हर्ष और ऐश्वर्य प्राप्त करवाता है।
क्यों होली की रात मानी गई है विशेष
मान्यताओं के अनुसार, होली की रात का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि होली की रात में की गई तंत्र साधना शीघ्र सफल होती है। इस वर्ष मंगल, शुक्र और शनि की युति मकर राशि में रहेगी और मंगल सूर्य की ओर मौजूद रहेगा जिसकी वजह से तंत्र के लिए यह रात बेहद खास होने वाली है।
क्या है होलिका दहन की धार्मिक मान्यता
हिंदू धर्म में होलिका दहन विशेष पर्व माना गया है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन कभी भी भद्रकाल के समय नहीं करना चाहिए। भद्रकाल के दौरान होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है। होलिका दहन के लिए भद्र काल के समाप्त होने का इंतजार जरूर करें।
होलिका दहन पर करें सुंदरकांड का पाठ
माना जाता है कि होलिका दहन के दिन सुंदरकांड का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन हनुमान मंदिर में बैठकर सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना गया है। सुंदरकांड का पाठ करते समय अपने पास शुद्ध घी का दीपक जलाकर रखें और पाठ पूरा होने पर अपनी मनोकामनाएं भगवान हनुमान के समक्ष रखें।
होलिका दहन पर करें ये उपाय
होलिका दहन के दिन घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए एक नारियल लें फिर अपने परिवार के सदस्यों पर सात बार वार लें। होलिका की अग्नि में इस नारियल को डाल दें और सात बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करने के बाद मिठाई का भोग जरूर लगाएं।
नरसिंह भगवान की आरती, देखें यहां
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे,
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे।।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी।।
अद्भुत रूप बनाकर,अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।।
सबके ह्रदय विदारण।
दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी,
दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी।।
ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे।।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।।
शीघ्र विवाह के लिए करें यह उपाय
अगर आपकी शादी में दिक्कतें आ रही हैं या विवाह में देरी हो रही है तो होलिका दहन के दिन विशेष उपाय जरूर करें। होलिका दहन पर उड़द दाल, सूखा नारियल, काला तिल और सुपारी लेकर सात बार लड़के या लड़की के सिर से घुमाकर होलिका की अग्नि में डाल दें।
रात में कब होगा होलिका दहन
इस समय भद्र काल चल रहा है जिसकी वजह से होलिका दहन रात में नहीं होगा। होलिका दहन सुबह 1:30 बजे से सूर्योदय के पहले किया जाएगा।
कब है धूलेंडी?
आज यानी गुरुवार को होलिका दहन मनाया जा रहा है। शुक्रवार को सुबह 4:30 बजे से ब्रह्म मुहूर्त में होलिका दहन होगा। इसके बाद धूलेंडी का पर्व मनाया जाएगा।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन पर शुभ मुहूर्त आज रात 9:16 से लेकर 10:16 तक रहेगा। पंचांग के अनुसार, ऐसे में होलिका दहन की पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटे 10 मिनट का समय रहेगा।
कब से शुरू हो रहा है भद्रकाल
होलिका दहन पर बद्रकाल दोपहर 1:19 बजे से शुरू हो जाएगा और देर रात 12:48 तक रहेगा। ऐसे में इस काल में होलिका दहन करना अशुभ माना गया है। रात के 12: 48 के बाद से होलिका दहन करना शुभ रहेगा।
ऐसे करें होलिका दहन की तैयारी
होलिका दहन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद होलिका व्रत रखना चाहिए। दोपहर के समय जहां होलिका दहन करना चाहते हैं उस जगह को साफ कर लें। इसके बाद उस स्थान पर होलिका का सभी सामान रख दें। फिर गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं। प्रतिमा बनाने के बाद नरसिम्हा भगवान की पूजा करें और भगवान को पूजन सामग्री अर्पित करें।
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घर में आकर मारेंगे पिचकारी
Happy Holi 2022
होलिका दहन के लिए पूजा सामग्री
होलिका दहन के लिए गोबर से बनी माला, रोली, अक्षत, एक लोटा जल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, गुलाल, नारियल, बताशे, गंध, फूल, फल और गेहूं की बालियां अपने पास रखें।
भद्राकाल के बाद करें होलिका दहन
होलिका दहन के लिए रात का समय उपर्युक्त माना गया है, ऐसे में 12:58 बजे भद्राकाल समाप्त होने के बाद होलिका दहन संभव हो सकेगा। रात के समय होलिका दहन करने के लिए शुभ समय 12:58 बजे से लेकर रात 2:12 बजे तक है।
होलिका दहन से पहले क्या करना चाहिए?
- होलिका दहन से पहले आपको और आपके सभी परिवार के सदस्यों को हल्दी का उबटन,सरसो तेल में मिलाकर पूरे बदन पर करना चाहिए।
- फिर सूखने के बाद उसे शरीर से छुड़ाकर एक कागज में जमा कर लें।
- फिर आप 5 या 11 गाय के उपले, एक मुट्ठी सरसो के दाने, नारियल का सूखा गोला लें।
- फिर नारियल के सूखे गोले में जौ,तिल,सरसो का दाना,शक्कर,चावल और घी भर लें।
- फिर उसे होलिका की जलती हुई अग्नि में प्रवाहित कर दें। साथ में उबटन के निकाले गए अंश को भी अग्नि में डाल दें
- होलिका दहन होने से पहले या फिर बाद में शाम के वक्त घर में उत्तर दिशा में शुद्ध घी का दीपक जलाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख शांति आती है।
- होलिका का परिक्रमा करने का भी बहुत महत्व है। ऐसा करने से हर तरह की परेशानियां, रोग और दोष खत्म हो जाते हैं। इसलिए आप परिक्रमा जरूर करें।
पढ़ें नरसिंह भगवान की आरती
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे,
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे।।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी।।
अद्भुत रूप बनाकर,अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।।
सबके ह्रदय विदारण।
दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी,
दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी।।
ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे।।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।।
होली पर ऐसे करें गणेश जी की पूजा
होली के दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए मोदक का प्रसाद घास अर्पित करें। उनकी विधि विधान से पूजा करने के साथ ही गणेश जी को मेवायुक्त ठंडाई का भोग लगाएं। इससे गणेश जी प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे। साथ ही गणेश जी को श्वेतार्क के फूल भी अर्पित करें। इसके बाद 2 चुटकी गुलाल उनके चरणों पर लगाए।
भगवान राम की पूजा करने से होगा लाभ
होली पर सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए आपको भगवान राम की विशेष प्रकार से पूजा करनी चाहिए। साथ ही होली की अग्नि में भूनी गईं गेहूं जौ की बालियों का भोग लगाना चाहिए। भगवान आपके भंडार सदैव भरे रखेंगे और आपको भी कभी पैसों की कमी नहीं होगी।
दुर्गा मां की पूजा इस तरह करने से लाभ प्राप्त होगा
होली के दिन मां दुर्गा को आप लाल चुन्नी लाल साड़ी लाल चूड़ी भी चढ़ा सकते हैं। साथ ही सुहाग से सम्बंधित श्रंगार की हर वस्तु देवी जी को अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होगी और आपके सारे कष्ट दूर होंगे।
शत्रु से शांति के लिए उपाय
शत्रु से शांति के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना कर सात गोमती चक्र होलिका के में डाल दें शत्रु से छुटकारा मिल जाएगा ।
नवविवाहिता से क्यों नहीं कराया जाता होलिका दहन
होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इस वजह से मान्यता है कि नवविवाहित महिलाओं को इस अग्नि को जलते हुए नहीं देखना चाहिए। इसी वजह से नवविवाहिता स्त्री से होलिका दहन भी नहीं कराया जाता है।
होली पर हनुमान चालीसा का जाप
होली की रात हनुमान जी की पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है। कहा जाता है कि इससे सभी कामों में सफलता और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। जो भी भक्त सच्चे मन से हनुमान जी का यह उपाय करता है, उसे हनुमान जी वरदान जरूर देते हैं। यदि आप पूजा ना कर पाएं तो होली की रात हनुमान चालीसा का जप कर सकते हैं। यह भी फलदायी व कष्टहारक माना जाता है।
सुंदरकांड का पाठ करें
होलिका दहन की रात 10 बजे बाद किसी हनुमान मंदिर में बैठकर सुंदरकांड का पाठ करें। शुद्ध घी का दीपकर जलाए रखें और जब सुंदरकांड का पाठ पूरा हो तो हनुमान जी के समक्ष अपने मन की बात रख दें।
रोगी करें इस मंत्र का जाप
रोगी को स्वस्थ होने के लिए इस रात्रि आरोग्य मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जाप करें और होलिका आरोग्य मंत्र हैः अच्युतानंद गोविंद नामोच्चारणभेषजात।नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यम् सत्यम् वदाम्यहम्।
रोजगार के लिए करें ये उपाय
रोजगार पाने के लिए होली की रात 12:00 बजे एक नींबू लेकर चौराहा पर चार टुकड़े कर के चारों दिशाओं पर फेंक दें और बगैर पीछे मुड़े घर वापस आ जाएं।
होलिका पूजन व दहन विधि
होलाष्टक से ही लोग होलिका दहन की तैयारियां शुरू कर देते हैं। होलिका दहन से पहले इसकी पूजा का भी विधान है। इस दिन सभी कार्यों को करने के बाद स्नान कर लें, इसके बाद होलिका पूजन वाले स्थान पर पूर्व दिशा में मुख करके बैठ जाएं। तथा गाय के गोबर से भगवान प्रहलाद और होलिका की प्रतिमा बनाएं और जल, रोली, अक्षत, फल, फूल, कच्चा सूत, गुड़, साबूत हल्दी, मूंग, गुलाल, बताशे और गेहूं की हरी बालियां एकत्रित कर होलिका की पूजा करें। होलिका की पूजा करने के बाद इसकी परिक्रमा करें। इस दिन भगवान नरसिंह की पूजा अर्चना का भी विधान है।
होलिका पूजन सामग्री
होली पर होलिका पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है और ऐसा माना जाता है कि होलिका पूजन कई प्रकार की बाधाओं को दूर कर जीवन में सुख समृद्धि लाती है। होलिका पूजन में गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाते हैं। फूलों की माला, रोली, मूंग, मीठे बताशे, फूल, कच्चा सूत, हल्दी,गुलाल, रंग, गेंहू की बालियां,सात प्रकार के अनाज,होली पर बनने वाले पकवान, मिठाइयों आदि के साथ होलिका दहन की पूजा की जाती है।
होलिका दहन पर बनेंगे ये तीन शुभ योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार गुरु ग्रह की दृष्टि संबंध चंद्रमा से होने के कारण गजकेसरी योग का निर्माण होने वाला है। इसके अलावा इस दिन वरिष्ठ और केदार योग भी बनने वाले हैं।
होलिका दहन पर महिलाएं करें इस नियम का पालन
मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के समय महिलाओं का सिर खुला नहीं होना चाहिए। होलिका दहन पर पूजा के समय भी उनके सिर पर कपड़ा जरूर होना चाहिए।
होलिका की राख से जुड़े उपाय
- धूल की वंदना करनी चाहिए और होलिका विभूति को यानि होली की राख को धारण करना चाहिए। साथ ही मिट्टी से स्नान करने की भी परंपरा है।
- होली के दिन घर के आंगन में एक वर्गाकार आकृति बनाकर उसके मध्य में कामदेव की पूजा करनी चाहिए। प्रार्थना करते हुए कहना चाहिए- कामदेवता मुझपर प्रसन्न हों। साथ ही जितना हो सके ब्राह्मण आदि को दान करना चाहिए।
- वास्तु शास्त्र के अनुसार होली जलाने के बाद इसकी राख को लाकर घर के आग्नेय कोण, यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। आग्नेय कोण को घर में अग्नि तत्व का सही स्थान माना जाता है और यहीं पर अपनी रसोई रखनी चाहिए।
मान्यता के अनुसार, इस दिशा में होली की राख रखने से व्यापार और व्यावसायिक जीवन में लाभ होता है और व्यक्ति उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ता है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति भी बनी रहती है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 9:20 से शुरू होगा और रात 10:31 मिनट तक रहेगा। यानी होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 01 घंटा 10 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त रात 12:58 से रात 2:12 बजे तक है। इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त शुरू हो जाएगा।
होलिका दहन के दिन बरतें ये सावधानी
होलिका दहन के दिन इन चीजों को लेकर सावधानी बरती जानी चाहिए-
- होलिका दहन के दिन उजला खाद्य पदार्थ नहीं खाना चाहिए।
- मांगलिक कार्य भी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह होलाष्क अवधि में आता है ।
होलिका दहन पूजा मंत्र
होली पर कई टोटके भी किए जाते हैं। होली पर इस मंत्र का जाप भाग्य उदय करने वाला और मुसीबतें दूर करने वाला माना जाता है।
देखें मंत्र :
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै: अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम:
ध्यान रखें कि इस मंत्र का जप एक, तीन या पांच माला यानी विषम संख्या में किया जाता है।
होलिका दहन से जुड़े विधान
होलिका दहन में मनोकामना पूर्ण करने के लिए ज्योतिषियों ने होलिका में अलग-अलग तरह की सामग्री चढ़ाने की विधि बताई है। मान्यता है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए काले तिल के दाने वैवाहिक समस्या के निवारण के लिए हवन सामग्री, बीमारी से मुक्ति पाने के लिए हरी इलाइची और कपूर चढ़ाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक अगर होलिका की आग में कौड़ियां डाली जाती हैं तो इससे जीवन में नकारात्मक शक्तियां खत्म हो जाती है और आस पास की अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं ।
सुख- समृद्धि के लिए उपाय
बाधा शांति और सुख समृद्धि के लिए होलिका की रात मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं ।
व्यापार- नौकरी में सफलता के लिए उपाय
व्यापार या नौकरी में सफलता वह तरक्की चाहते हैं तो 21 गोमती चक्र किसी भी शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें तरक्की जरूर होगी।
भूलकर भी ना करें यह गलती
मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के दिन किसी को भी उधार नहीं देना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन के दिन उधार देने से घर से बरकत चली जाती है और आर्थिक समस्याएं आने लगती हैं। इस दिन किसी भी व्यक्ति को उधार देने से बचें।
होलिका दहन में अर्पित करें यह तीन चीजें
ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन में उंबी दहन करने से ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है इसके साथ घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। उंबी के साथ इस दिन गोबर के बड़कुले की माला भी अर्पित करनी चाहिए। नारियल अर्पित करना भी शुभ माना गया है।
मेष राशि के जातक करें यह उपाय
इस वर्ष होलिका दहन पर मेष राशि के जातक मंगल ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें। होलिका दहन पर सौंफ, जौ और लाल दाल का दान करना शुभ रहेगा। इसके साथ घर में पड़ी कांस की पुरानी वस्तुओं को भी हटाएं। अगले दिन गहरे लाल रंग से होली खेलें।
होलिका दहन पर करें सात्विक भोजन
माना जाता है कि होलिका दहन के दिन लोगों को सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए। इसके साथ इस दिन लोगों को बुजुर्गों का सम्मान भी करना चाहिए।
होलिका दहन पर ऐसे खाद्य पदार्थों से रहें दूर
माना जाता है कि सफेद खाद्य पदार्थों का उपयोग टोना-टोटका करने के लिए किया जाता है। ऐसे में लोगों को होलिका दहन के दिन सफेद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
होलिका दहन की अग्नि ना देखें नवविवाहित स्त्रियां
होलिका दहन इस वर्ष 17 मार्च के दिन पड़ रही है। होलिका दहन के दिन लोगों को नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। कहा जाता है कि होलिका दहन के दिन नवविवाहित स्त्रियों को होलिका दहन की अग्नि नहीं देखनी चाहिए।
होलिका दहन पर महिलाएं करें इस नियम का पालन
मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के समय महिलाओं का सिर खुला नहीं होना चाहिए। होलिका दहन पर पूजा के समय भी उनके सिर पर कपड़ा जरूर होना चाहिए।
भद्रा पूंछ और मुख में ना करें होलिका दहन
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, कभी भी भद्रा पूंछ और मुख में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। इसे अशुभ माना गया है। इसके साथ राहु काल के दौरान भी होलिका दहन वर्जित माना गया है।
होलिका दहन पर करें इस मंत्र का जाप
होलिका दहन के दौरान होलिका जलाते समय नीचे दिए गए मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। इस मंत्र का जाप करते हुए तीन परिक्रमा करें। परिक्रमा करने के साथ आप इस मंत्र के साथ अर्घ्य भी दे सकते हैं।
असृक्पाभयसंत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिषै:। अतस्तवां पूजायिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव।।
भद्रा पूंछ और मुख में नहीं किया जाता है होलिका दहन
हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार, भद्रा पूंछ और मुख में होलिका दहन नहीं किया जाता है। इस दौरान होलिका दहन करना वर्जित माना गया है। कहा जाता है कि भद्रा के समय होलिका दहन करना अशुभ और अमंगलकारी है।
होलिका दहन की पूजा सामग्री
होलिका दहन पर पूजा के लिए यह सामग्री इक्ट्ठा कर लें। प्रहलाद की प्रतिमा, गोबर की होलिका, रोली, अक्षत, फूल, फल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, पांच प्रकार के अनाज, मूंग, बताशे, मिठाईयां और कलश।
होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन की पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके करना चाहिए। पूजा से पहले अपने आसपास पानी की बूंदे छिड़कें, उसके बाद गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं। पूजा की थाली में रोली, चावल, साबुत हल्दी, कच्चा सूत, फूल, फल, बताशे और एक कलश पानी रखें। नरसिम्हा भगवान को यह सभी सामग्री अर्पित करें और इन सभी सामग्रियों को होलिका दहन के स्थान पर ले जाएं। होलिका जलाने से पहले अपना नाम, पिता का नाम, और गोत्र का नाम लेते हुए गणेश जी को याद करें और होलिका में अर्पित करें। इसके बाद प्रहलाद का नाम लेकर फूल चढ़ाएं और नरसिम्हा भगवान का नाम लेते हुए पांच अनाज अर्पित करें। दोनों हाथों में अक्षत, हल्दी और फूल लें। अब सूत को लेकर होलिका पर लपेटते हुए परिक्रमा करें। अंत में गुलाल डालकर चांदी या तांबे के कलश से जल अर्पित करेंं।
कब है होलिका दहन का मुहूर्त?
भद्रा की वजह से होलिका दहन की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति हो गई है, लेकिन पंचांग के अनुसार होलिका दहन कल यानी 17 मार्च को है।
कब बन रहा है उत्तम मुहूर्त
होलिका दहन इस वर्ष 17 मार्च को पड़ रही है। होलिका दहन के दिन लोग आग के साथ अपने पापों को भी जला देते हैं। माना जाता है कि होलिका दहन की वजह से घर में सकारात्मकता आती है। होलिका दहन पर रात को 2:12 के बाद ब्रह्म मुहूर्त शुरू हो जाएगा जो बेहद उत्तम माना जा रहा है।
कब करना चाहिए होलिका दहन
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद होलिका दहन करना शुभ माना गया है। लेकिन अगर इस बीच भद्रकाल हो तो भद्रकाल में होलिका दहन नहीं किया जाता है। होलिका दहन के लिए भद्रकाल के समाप्त होने का इंतजार करना चाहिए। माना जाता है कि होलिका दहन करने के लिए भद्रामुक्त पूर्णिमा तिथि होना जरूरी है।
नवविवाहिता से क्यों नहीं कराया जाता होलिका दहन
होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इस वजह से मान्यता है कि नवविवाहित महिलाओं को इस अग्नि को जलते हुए नहीं देखना चाहिए। इसी वजह से नई ब्याहता स्त्री से होलिका दहन भी नहीं कराया जाता है।
होलिका दहन किस मुहूर्त में करें
होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर प्रदोष काल में किया जाता है। ज्योतिषियों के जानकारों मुताबिक फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा रहित प्रदोष काल में ही होलिका दहन को सही माना गया है।
होलिका दहन की राख होती है पवित्र
होलिका के जलने के बाद बची राख को अगली सुबह शरीर पर लगाने की परंपरा भी है। इस राख को बेहद पवित्र माना जाता है और पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक शरीर पर इसे लगाने से ये तन और मन की बुराइयां दूर हो जाती हैं।
होलिका दहन कब होता है
फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है। सूरज डूबने के बाद शुभ मुहूर्त में ही होलिका दहन किया जाना चाहिए। इसे छोटी होली भी कहा जाता है। होलिका दहन के बाद ही रंगों से खेला जाता है।

