Holi 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: होली की रात 12 बजे पीपल के वृक्ष के नीचे करें यह उपाय, सारी बाधाएं होंगी दूर
Holi 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, होली का त्यौहार हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार हमेशा होलिका दहन के एक दिन बाद मनाया जाता है। हर राशि के लिए जानिए कौन सा गुलाल है जरूरी। यहां देखें होली 2022 की तिथि, शुभ मुहूर्त, समय, पूजा विधि, मंत्र और सामग्री। जानिए होली के दिन कुछ उपाय जो समस्याओं को चुटकियों में करेगी दूर....
Holi 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List: पूरे भारत में होली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, होली का त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर पड़ता है। होली का त्यौहार मनाने के पीछे भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद और उनके चौथे अवतार भगवान नरसिम्हा की कहानी है। इसके साथ इस दिन कामदेव का पूर्ण जन्म भी हुआ था। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने पूतना का वध किया था। हर राशि के जातक के लिए कुछ विशेष रंग के गुलाल से खेल सकते हैं होली। जानिए होली की पौराणिक कथा कैसे इस दिन भगवान कृष्ण ने किया था पूतना वध।
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होली का त्योहार हमेशा होलिका दहन के एक दिन बाद बनाया जाता है। होली से पहले लोग अपने घर की साफ सफाई करते हैं और अपने घर में स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं। इस दिन पूजा करने के बाद लोग होली खेलते हैं और एक दूसरे को रंग लगाकर सभी मतभेद को दूर करते हैं। भारत के विभिन्न राज्यों में तरह-तरह की होली खेली जाती है। कोई रंगों से होली खेलता है तो कोई लठ मार होली खेलकर इस त्यौहार का मजा लेता है।
होली के दिन लोग एक दूसरे के घर जाते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। लोग एक दूसरे को स्वादिष्ट मिठाइयां भी खिलाते हैं। इस लाइव ब्लॉग के जरिए जानें इस वर्ष होली कब पड़ रही है। यहां जानें होली 2022 की तिथि, शुभ मुहूर्त, समय, पूजा विधि, पूजा सामग्री और मंत्र।
होली की रात करें यह उपाय
जीवन में आ रहीं सभी बाधाओं को दूर करने के लिए होली की रात 12:00 बजे पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करें।
होली पर करें भगवान हनुमान की पूजा
आज पूरे भारत में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार होली के दिन लोगों को भगवान हनुमान की पूजा अवश्य करनी चाहिए। कहा जाता है कि होली पर सच्चे मन से भगवान हनुमान की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
होली पर करें भगवान नरसिंह की पूजा
होली पर अपना घर साफ करके देवी-देवता की पूजा जरूर करें। इस दिन भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की पूजा करना लाभदायक माना गया है। कहा जाता है कि नरसिंह भगवान की पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
होली पर करें यह काम
होली के दिन सभी लोगों का सम्मान करें। ऐसा करने से अपका मान-सम्मान बढ़ता है।
होली पर घर में बनाएं यह पकवान
आज होली का त्यौहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन लोग अपने घरों में स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं। अगर आप आज होली पर कुछ टेस्टी बनाना चाहती हैं और अपने घर वालों के साथ दोस्तों को भी खुश करना चाहती हैं तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और होली स्पेशल रेसिपी जानें.
होली पर करें यह उपाय
होली के दिन रंगो से खेलने से पहले मंदिर में देवी-देवताओं को रंगों का टीका लगाएं। इसके बाद बुजुर्गों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें।
होली के दिन नींबू का टोटका
आपके घर में अगर कोई व्यक्ति काफी दिनों से बीमार है और इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है तो होली के दिन नींबू का टोटका करने से वह ठीक हो सकता है। एक बड़े आकार का नींबू लेकर बीमार व्यक्ति के सिर के पास सात बार घुमाएं और फिर एक चाकू से मरीज के शरीर को सिर से पांव तक छूते हुए शरीर के बीचों बीच नींबू को दो टुकड़ों में काट दें। शाम के समय नींबू के इन टुकड़ों को घर की दो दिशाओं में फेंक दें। होली के दिन यह टोटका करके देखें, बीमार व्यक्ति को जरूर राहत मिलेगी।
गायब हो गई पूतना
पूतना ने हंसते हुए मां यशोदा के गोद से कृष्ण जी को लेकर गायब हो गई और गांव से बाहर आकर भगवान को स्तनपान कराने लगी। गोद में ही भगवान कृष्ण ने पूतना का वध कर दिया, पूतना का वध करने के पश्चात बालरूपी कृष्ण घांस पर लेटकर खेलने लगे। कहते हैं कि मृत्यु के पश्चात पूतना का शरीर लुप्त हो गया। इसलिए ग्वालों ने उसका पुतला बनाकर जला डाला। इस दिन से प्रत्येक वर्ष होली का पावन पर्व मनाया जाता है। मथुरा और वृंदावन में 40 दिन पहले होली का जश्न देखने को मिलता है।
श्रीकृष्ण ने किया राक्षसी पूतना का वध
होली की दूसरी कथा भगवान श्रीकृष्ण और राक्षसी पूतना से संबंधित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कंस ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पश्चात उनका वध करने के लिए राक्षसी पूतना को भेजा था। कहा जाता है कि पूजतना में 10 हाथियों जितना बल था, वह अत्यंत शक्तिशाली और मायावी थी। कंस ने उसे गकुल में सभी नवजात शिशुओं को मारने का आदेश दिया। वह अपने स्तनों पर विष का लेप लगाकर सुंदर स्त्री का रूप धारण कर नंदबाबा के घर पहुंची। भगवान कृष्ण ने पूतना को देखते ही पहचना लिया।
भोलेनाथ की तपस्या हो गई भंग
देवी पार्वती का भगवान शिव का विवाह कराने के लिए तपस्या को भंग करना अत्यंत आवश्यक था। ऐसे में देवताओं ने तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को मनाया। कामदेव ने प्रेम बांण चलाया और भोलेनाथ की तपस्या भंग हो गई। जिससे भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया। जिससे कामदेव वहीं भस्म हो गए और तीनों लोक में अंधेरा छा गया। कामदेव की पत्नी विलाप करते हुए भोलेनाथ के पास पहुंची और उसने भगवान शिव को इसका कारण बताया।क्षमा याचना के बाद भोलेनाथ ने कामदेव को द्वापर युग में श्री कृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद दिया था। होली के दिन कामदेव का भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म हुआ।
भगवान शिव और माता पार्वती की कथा
धार्मिक ग्रंथों में होली को लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की यह कथा काफी प्रचलित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कालांतर में माता सती देवराज हिमालय के घर माता पार्वती ने पुत्री के रूप में जन्म लिया। जन्म के पश्चात देवर्षि नारद ने बेटी का भाग्य बताते हुए कहा कि इसे जो वर मिलेगा वह भगवान शिव के जैसा होगा। इसे सुनने के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को ही अपना वर मान लिया। तथा माता पार्वती ने भोलेनाथ को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए सभी सुख सुविधाओं को छोड़कर कठिन तपस्या करने लगी।
होली के दिन कामदेव का पुनर्जन्म
मान्यता है कि होली के दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था। वहीं भगवान श्री कृष्ण ने इस दिन राक्षसी पूतना का वध किया था। पौराणिक ग्रंथों में होली को लेकर अनेको कथाएं मौजूद हैं, लेकिन इसमें कामदेव, पूतना और भक्त प्रहलाद की कहानी सबसे प्रमुख है।
कर्क से लेकर मीन तक
कर्क-पीला,नारंगी व लाल
सिंह-लाल,पीला व सफेद
कन्या-हरा,आसमानी व सफेद
तुला-नीला,हरा व बैगनी
वृश्चिक-लाल,पीला व नारंगी
धनु-पीला,लाल व सफेद
मकर-आसमानी,बैगनी व हरा
कुंभ-नीला,हरा व सफेद
मीन-पीला,लाल व नारंगी।
मिथुन राशि के जातक इन रंगों से खेलें होली
मिथुन राशि के जातक हरा,सफेद व बैगनी रंग के गुलाल से खेलें होली
वृष राशि के जातक इन रंग से खेलें होली
वृष-नीला,हरा व सफेद रंग के गुलाल से खेलें होली
मेष राशि वाले इस रंग के गुलाल से खेलें होली
मेष राशि के जातक लाल,पीला व नारंगी रंग के गुलाल से खेलें होली
धनु राशि के जातक इन रंगों से खेलें होली
गुरु ब्रहस्पति की धनु राशि वालों के लिए पीला, लाल और सफेद जैसे रंगों से होली खेलना शुभ रहेगा। गुरु ब्रहस्पति या बगलामुखी या अपने गुरु को पीला रंग लगाएं। इससे आपके सौभाग्य में वृद्धि होगी।
पुष्य नक्षत्र में करें खरीदारी
रविवार और सोमवार को पुष्य नक्षत्र रहने वाला है। माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र में घर के लिए खरीदारी करने से बरकत बनी रहती है। खरीदारी के लिए यह दो दिन शुभ रहेंगे। रविवार को तकरीबन शाम 7:00 बजे से पुष्य नक्षत्र शुरू होगा जो अगले दिन सोमवार को रात 9:00 बजे समाप्त हो जाएगा।
Happy Holi Wishes: रास रचाये गोकुल में कन्हैया
रास रचाये गोकुल में कन्हैया
होली में बन जाए रंग रसिया
सजाए रंगों का साज हर एक द्वारे
आज भी गोपियां रंग लिए कान्हा की राह निहारें
होली की शुभकामनाएं
इस रंग के साथ कन्या राशि वाले खेलें होली
कन्या राशि के जातकों के लिए होली पर हरा, आसमानी और सफेद रंग का प्रयोग करना लाभदायक रहेगा। इस दिन होली खेलने से पहले भगवान गणेश को रंग जरूर लगाएं।
कर्क राशि के लोग करें इन रंगों का इस्तेमाल
कर्क राशि के लोगों को होली पर पीला, नारंगी और लाल रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए होली खेलने से पहले उन्हें पीला गुलाल या हल्दी जरूर लगाएं।
होली पर ऐसे सजाएं अपना घर
होली के आने से पहले लोग तैयारियां शुरू कर देते हैं। इस दिन लोग अपने घर को डेकोरेटिव आइटम से साथ सजाते हैं। अगर आप अपने घर में खूबसूरत रंगोली डिजाइन बनाना चाहते हैं तो नीचे दिए गए इस लिंक पर क्लिक करें।
बुरी नजर से ऐसे बचें
बुरी नजर से बचने के लिए होलिका दहन के दिन होलिका जलने वाली जगह पर कील गाड़ दें। अगले दिन इस कील को निकाल कर अपने घर के मुख्य द्वार के सामने मिट्टी में दबा दें। ऐसा करने से बुरी नजर से रक्षा मिलती है।
होली पर करें गणेश-अंबिका पूजन
मान्यताओं के अनुसार, होली के दिन गणेश-अंबिका पूजन करना शुभ होता है। गणेश-अंबिका पूजन करने से भक्तों की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। गणेश-अंबिका पूजा करने के लिए हाथ में फूल और चावल लेकर गणेश जी का ध्यान करें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।
होली पर ऐसे दें शुभकामनाएं
मेष राशि के लोग इस रंग से खेलें होली
भारत में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे तो होली के दिन लोग अनेक तरह के रंगों से खेलते हैं। लेकिन ऐसा माना जाता है कि राशि के अनुरूप रंगों व गुलाल से होली खेलना शुभ होता है। ऐसे में मेष राशि के जातक इस दिन लाल, पीले और नारंगी रंग या गुलाल से होली खेलें।
होली पर करें माता काली की पूजा
माना जाता है कि होलाष्टक से होलिका दहन तक महामृत्युंजय मंत्र का जप करना लाभदायक है। इस समय माता काली की पूजा करने से सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य का फल मिलता है। होली के दिन नारियल और काली मिर्च माता काली के मंदिर में अर्पित करें।
जन्मांक 2 वालों के लिए कैसा रहेगा दिन
जन्मांक 2 वालों के लिए होली के दिन शुभ अंक 1 रहेगा। इस दिन आपको व्यवसाय में नामांक 1 और 9 वाले व्यक्ति से लाभ मिलेगा। इस दिन नेत्र रोग की समस्या आ सकती है।
होली पर कैसे करें भगवान कृष्ण की पूजा?
होली पर भगवान कृष्ण और राधा की पूजा करना विशेष माना गया है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण और राधा ने पहली बार होली खेली थी। होली पर घर के मुख्य द्वार पर राधा कृष्ण की प्रतिमा लगानी चाहिए। इस दिन श्री कृष्ण की पूजा में रंग, अबीर, गुलाल, पिचकारी इत्यादि घर के मंदिर में जरूर रखना चाहिए। श्री कृष्ण को मटमैला गुलाल और राधा जी को खिले रंग का गुलाल लगाना चाहिए।
होली पर कैसा रहेगा जन्मांक 1 वालों का दिन
होली पर जन्मांक 1 वालों के लिए शुभ अंक 9 रहेगा। होली का दिन आप लोगों के लिए बिजनेस डील में लाभ दे सकता है। इसके साथ जॉब में भाग्य स्वामी मंगल व सूर्य सफलता के कारण बन सकते हैं। इस दिन कफ जनित रोग से परेशानी हो सकती है।
कब से प्रारंभ हो रही है पूर्णिमा तिथि?
पूर्णिमा तिथि आज यानी 17 मार्च से दोपहर 1:29 से प्रारंभ हो गई है। यह पूर्णिमा तिथि कल यानी 18 मार्च को 12:47 पर समाप्त हो जाएगी।
इस उपाय से होगी आर्थिक तंगी दूर
ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन की रात पति-पत्नी को चंद्रमा की रोशनी में खड़ा होना चाहिए। चंद्रमा की रोशनी को देखते हुए एक थाली में छुआरा और मखाना ले लें। इसके बाद दीपक जलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के बाद धूप बत्ती दिखाएं। ऐसा माना जाता है कि यह उपाय करने से आर्थिक तंगी दूर हो जाती है।
होली पर करें यह उपाय
वृष राशि के लोग होलिका दहन के दिन चांदी की कटोरी में गुलमोहर के पत्ते, कच्चा दूध, 5 चुटकी चीनी, 5 चुटकी चावल डालकर होलिका की अग्नि में अर्पित कर दें। इसके साथ शिव गायत्री मंत्र का जाप करें।
18 या 19 मार्च कब है होली?
इस वर्ष पूर्णिमा दो दिन पड़ रही है। ऐसे में पूर्णिमा तिथि पर भद्रकाल भी है जिसकी वजह से होली और होलिका दहन की तिथि को लेकर संशय की स्थिति है। ऐसा कहा जाता है कि होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में सूर्यास्त के बाद होना चाहिए। लेकिन इस बार बीच में ही भद्रकाल है इसीलिए भद्रकाल के समाप्त होने का इंतजार किया जाएगा। इस काल के खत्म होने के बाद होलिका दहन होगा जिसके बाद होली मनाई जाएगी। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 17 मार्च से शुरू होकर 18 मार्च को दोपहर 12:52 पर समाप्त हो रही है। जिसके बाद दोपहर के 12:52 से प्रतिपदा तिथि लग जाएगी जो 19 मार्च को दोपहर 12:13 तक रहेगी। माना जाता है कि प्रतिपदा तिथि में ही रंगो की होली खेली जाती है। लेकिन कुछ लोग 18 मार्च और 19 मार्च दोनों दिन होली खेलेंगे।
होलिका दहन की आवश्यक पूजा सामग्री
ये है होलिका दहन की आवश्यक पूजा सामग्री
-गाय के गोबर से बनी होलिका
-गेंहू की बालियां
-हरा नारियल
-कच्चा सूत
-रोली
-साबुत हल्दी
-साबुत मूंग
-बताशे
-मीठे पकवान
-मौसमी फल
-फूल
-जल का लोटा
-गुलाल
होली पर ऐसे करें गणेश जी की पूजा
होली के दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए मोदक का प्रसाद घास अर्पित करें। उनकी विधि विधान से पूजा करने के साथ ही गणेश जी को मेवायुक्त ठंडाई का भोग लगाएं। इससे गणेश जी प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे। साथ ही गणेश जी को श्वेतार्क के फूल भी अर्पित करें। इसके बाद 2 चुटकी गुलाल उनके चरणों पर लगाए।
पढ़ें नरसिंह भगवान की आरती
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे,
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे।।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी।।
अद्भुत रूप बनाकर,अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।।
होलिका दहन की कथा हिंदी में, शाम को पूजा के समय जरूर पढ़ें ये पौराणिक कहानी
सबके ह्रदय विदारण।
दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी,
दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी।।
ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे।।
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।।
होली की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीनकाल में हिरण्याकश्यप नामक राक्षस ने अपने तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर एक वरदान प्राप्त कर लिया, कि उसे संसार का कोई भी प्रांणि, देवी देवता या जीव जन्तु ना मार सके। यहां तक कि कोई शस्त्र भी उसका वध ना कर सके। वरदान प्राप्त करने के बाद हिरण्याकश्यप घमंड में इतना चूर हो गया कि वह ईश्वर होने का दावा करने लगा। उसके घर में एक पुत्र पैदा हुआ, जिसका नाम प्रहलाद था। प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और उस पर श्रीहरि भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि थी।
जब हिरण्याकश्यप को जब इस बात का पता चला तो उसने प्रहलाद को चेतावनी दी कि वह उसके अलावा किसी की भी पूजा ना करे। प्रहलाद के ना मानने पर हिरण्याकश्यप प्रहलाद को जान से मारने की कोशिश करने लगा। उसने प्रहलाद को आठ दिनों तक बंदी बनाकर रखा, आठवें दिन हिरण्याकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रहलाद को आग में लेकर बैठ जाए। होलिका को आग में ना जलने का वरदान प्राप्त था। लेकिन आग में बैठते ही होलिका जलकर भस्म हो गई और भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद को एक खरोंच भी नहीं आई। इस दिन से बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होली का पावन पर्व मनाया जाने लगा।
हनुमानजी की पूजा इस तरह से करनी चाहिए
होली पर वीर बजरंग बली हनुमानजी को चोला चढ़ाना चाहिए। गुड़ से बनी मीठी रोटियों का भोग लगाना चाहिए। अगर घर मे हनुमानजी है तो होली पर हनुमानजी को सिंदूरी रंग का गुलाल लगाने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही सीता राम जपने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
होली पर इस तरह करनी चाहिए गणेशजी की पूजा
होली के दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए मोदक का प्रसाद घास अर्पित करें। उनकी विधि विधान से पूजा करने के साथ ही गणेश जी को मेवायुक्त ठंडाई का भोग लगाएं। इससे गणेश जी प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे। साथ ही गणेश जी को श्वेतार्क के फूल भी अर्पित करें। इसके बाद 2 चुटकी गुलाल उनके चरणों पर लगाए।
01:29 बजे से पूर्णिमा तिथि
इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 17 मार्च 2022 को दोपहर 01:29 बजे से शुरू होकर 18 मार्च दोपहर 12:52 मिनट तक रहेगी। जबकि 17 मार्च को ही 01:19 बजे से भद्राकाल शुरू हो जाएगा और देर रात 12:58 बजे तक रहेगा, ऐसे में भद्राकाल होने के कारण शाम के समय होलिका दहन (When is Holika Dahan in 2022) नहीं किया जा सकेगा। चूंकि होलिका दहन के लिए रात का समय उपर्युक्त माना गया है, ऐसे में 12:58 बजे भद्राकाल समाप्त होने के बाद होलिका दहन संभव हो सकेगा। रात के समय होलिका दहन करने के लिए शुभ समय 12:58 बजे से लेकर रात 2:12 बजे तक है।
पुष्य नक्षत्र में करें खरीदारी
रविवार और सोमवार को पुष्य नक्षत्र रहेगा। पुष्य नक्षत्र में खरीदारी के लिए दो दिन शुभ रहेंगे। ये शुभ नक्षत्र रविवार की तकरीबन शाम 7 बजे शुरू होगा और अगले दिन सोमवार को रात 9 बजे तक रहेगा।
एक साथ तीन खास योग
होलिका दहन पर गजकेसरी, वरिष्ठ और केदार नाम के 3 राजयोग बन रहे हैं। होली पर ऐसा दुर्लभ संयोग कम ही बनता है।
फाल्गुन महीने का स्वामी शनि
फाल्गुन महीने का स्वामी शनि है। शुक्र-शनि आपस में मित्र हैं और दोनों ही मकर राशि में साथ होकर युति बना रहे हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि कम होगा बीमारी का संक्रमण, मंहगाई पर लगेगी रोक।
रात में करें हनुमानजी के ये उपाय
होली की रात हनुमानजी से संबंधित उपाय करना बहुत ही शुभ होता है। होलिका दहन की शाम को बरगद को 21 पत्ते तोड़कर उन पर केसर से श्रीराम लिखकर माला बना लें। रात को 12 बजे हनुमानजी की प्रतिमा पर ये माला चढ़ाएं।
भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करें
होलिका दहन पर भगवान विष्णु और शिवजी पूजा भी करनी चाहिए। साथ ही इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से बीमारियां दूर होने लगती हैं और हर तरह के दोष भी खत्म होते हैं। फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर प्रह्लाद का जीवन विष्णु भक्ति की वजह से ही बचा था।
होलिका दहन का सही समय (Holika Dahan Time)
17 मार्च, गुरुवार की शाम 6 से 7.30 तक प्रदोष काल में होलिका पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। 17 मार्च को भद्रा का योग दोपहर तकरीबन 1.30 से रात 1 बजे तक रहेगा। इस कारण शाम में गोधूलि बेला के समय भद्रा का प्रभाव होने से होलिका दहन नहीं किया जा सकेगा।
बहुत कारगर है बंगलामुखी उपासना
इस समय बंगलामुखी अनुष्ठान बहुत ही सटीक व सफलतम उपाय है। माता पीताम्बरा पीठ का दर्शन व पूजन प्रत्येक मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। घर के पास किसी मन्दिर में या नदी के तट पर यह अनुष्ठान बहुत तेज कार्य करता है।पीला वस्त्र,हल्दी व सरसो का प्रयोग होता है। बंगलामुखी मन्त्र का जप हल्दी की माला पर ही करें व पूरे नियम से किया जाय तो प्रत्येक कार्यों में सफलता मिलती है।राजनीति में सफलता के लिए यह अनुष्ठान बहुत ही श्रेयस्कर है। महाविद्या का प्रयोग भी इस समय करते हैं। प्रत्यंगरा व विपरीत प्रत्यंगरा का तांत्रिक प्रयोग भी इस समय किया जा सकता है।
Holi Puja Upay: हनुमानबाहुक का करें पाठ
होलिका दहन की रात्रि में हनुमानबाहुक का प्रयोग किसी भी बीमारी से मुक्त कर सकता है।हनुमानबाहुक की पूजा भी रोग व कष्ट मुक्ति के लिए रामबाण उपाय है।लाल मूंगे की माला से हनुमान जी के 12 नामों का जप किसी भी कष्ट से मुक्ति दिला देता है। इस बीच प्रतिदिन गाय को भरपेट भोजन दें। अन्न का दान करें। भगवान शिव को इत्र, जल व अबीर गुलाल अर्पित करें जिससे जीवन में सभी खुशियां आपको स्वतः शिव कृपा से प्राप्त हो जाएंगी।
तंत्र पूजा का दुर्लभ अवसर
होलाष्टक से होलिका दहन तक महामृत्युंजय मंत्र का जप व हवन बहुत ही लाभ करता है। इस समय यदि आप चाहें तो माता काली की पूजा व बटुक भैरव उपासना भी कर सकते हैं। बटुक भैरव सुख,समृद्धि व ऐश्वर्य प्रदान करते हैं। नारियल व काली मिर्च को माता काली मंदिर में अर्पण करें।
उत्तर प्रदेश में तीन दिन होली की छुट्टी!
उत्तर प्रदेश में 18 और 19 मार्च को होली की छुट्टी रहेगी। 20 मार्च को रविवार है, उस दिन भी सामान्यता छुट्टी रहेगी। इस तरह कुल तीन दिन यानी 18, 19 और 20 का अवकाश रहेगा।
द्वारिकाधीश मंदिर में होली
होली मनाने के लिए बेस्ट हैं यह पांच जगह
ऐसे तो हर कोई अपने-अपने अंदाज से होली का त्यौहार मनाता है लेकिन भारत में ऐसी पांच जगह हैं जहां की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां जानें होली खेलने के लिए बेस्ट जगह।
बरसाने की लठमार होली
वृंदावन की फूलों वाली होली
शांतिनिकेतन की सांस्कृतिक कार्यक्रमों वाली होली
पंजाब के आनंदपुर साहिब की होली
उदयपुर की शाही स्टाइल वाली होली
होली पर क्यों पहनने चाहिए सफेद कपड़े?
माना जाता है कि होली के दिन सफेद कपड़े पहन कर होली खेलने से सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। इसके साथ सफेद रंग सुख-समृद्धि, शांति और भाईचारे का प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि सफेद कपड़े पहन कर होलिका दहन करना भी शुभ है। यह रंग मन को शांत रखता है और नकारात्मकता से बचाता है। सफेद रंग के कपड़े पहनने से गर्मी से भी बचा जा सकता है। दरअसल, होली जिस महीने में पड़ती है उस महीने से गर्मी शुरू हो जाती है। इसलिए होली के दिन सफेद रंग के कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है।
होली पर इन जातकों की चमकेगी किस्मत
इस वर्ष होली का पर्व मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए शुभ होने वाला है। बाकी राशियों के जातकों को थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है।
होली पर करें इस मंत्र का जाप
परिवार में हमेशा सुख समृद्धि बनाए रखने के लिए होली वाले दिन पूजा के समय नीचे दिए गए मंत्र का जाप जरूर करें।
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशे: अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम:
होली के दिन दान ना करें पहने हुए कपड़े
माना जाता है कि कपड़ों से भी टोना-टोटका किया जाता है। ऐसे में होली के दिन दूसरों को अपने पहने हुए कपड़े ना दें। इसके साथ अपने कपड़ों का भी ध्यान रखें।
होली पर नई दुल्हन घर में बनाएं यह पकवान
होली का त्योहार भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घर में तरह-तरह के पकवान बनाते हैं। अगर आपकी नई-नई शादी हुई है तो आप होली के दिन अपने घर में मीठे में मालपुआ, गुलाब जामुन, रसगुल्ला समेत कई तरह की मिठाई बना सकती हैं। इसके साथ अगर आप कुछ स्पेशल बनाना चाहती हैं तो पोटली समोसा और रोज लस्सी भी जरूर ट्राई करें।
उग्र रूप में मौजूद होते हैं यह ग्रह
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के 8 दिनों में अष्टमी तिथि पर चंद्रमा, नवमी तिथि पर सूर्य, दशमी पर शनि, एकादशी पर शुक्र, द्वादशी पर गुरु, त्रयोदशी पर बुध, चतुर्दशी पर मंगल और पूर्णिमा पर राहु उग्र रूप में मौजूद होते हैं।
होलाष्टक के दौरान ना करें यह कार्य
होलाष्टक के 8 दिन तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दौरान जनेऊ संस्कार, विवाह संस्कार, गृह प्रवेश और नामकरण संस्कार जैसे शुभ कार्य वर्जित हैं।
क्या है होलाष्टक का महत्व?
हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक, होलाष्टक के दौरान भगवान की भक्ति करनी चाहिए। होलाष्टक में पेड़ की शाखा काट कर जमीन पर लगाते हैं और उस पर रंगीन कपड़े बांध देते हैं। इस शाखा को प्रहलाद का रूप माना जाता है। जिस दिन से यह शाखा को जमीन में गाड़ा जाता है उस दिन से इस क्षेत्र में होलिका दहन तक कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
होलाष्टक के दौरान करें यह काम
होलाष्टक के समय आर्थिक परेशानी से छुटकारा पाने के लिए रोजाना आठ गोमती चक्र की पूजा करनी चाहिए। गोमती चक्र लेकर ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके बाद इन चक्रों को आठवें दिन शिवलिंग पर अर्पित कर देना चाहिए।
इस उपाय से शत्रु होंगे दूर
होलिका दहन पर भगवान नरसिम्हा की तस्वीर अपने घर में लाएं और विधि अनुसार पूजा करें। मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से नरसिम्हा भगवान का आशीर्वाद मिलता है और शत्रु दूर होते हैं। भगवान नरसिम्हा के आशीर्वाद से धन संबंधित परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।
होलिका दहन पर करें यह उपाय
आर्थिक तंगी दूर करने के लिए होलिका दहन के बाद घर के पूजा स्थल पर नारियल अर्पित करें। इसके बाद दीपक जलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी खुश हो जाती हैं।
होलिका दहन के बाद क्यों खेली जाती है होली?
ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन या छोटी होली के अगले दिन ही होली खेलना चाहिए। पंचांग के अनुसार होली 19 मार्च को मनाई जानी चाहिए लेकिन परंपरा के अनुसार 18 मार्च को ही होली खेली जाएगी।
होलिका दहन का समय
भद्रकाल के दौरान होलिका दहन नहीं करना चाहिए। होलिका दहन का मुहूर्त 17 मार्च को रात 9:06 से 10:16 तक है। इसके बाद भद्रा का समापन देर रात 1:12 पर होगा। अगर वह भद्रा के बाद होलिका दहन करना चाहते हैं तो 1:12 से 18 मार्च को सुबह 6:28 के बीच में कर सकते हैं।
छोटी होली पर करें यह उपाय
छोटी होली यानी होलिका दहन के दिन होलिका दहन की राख को घर के कोने में छिड़क दें। ऐसा करने से नकारात्मक उर्जा भाग जाती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। यह भी कहा जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी का वास होता है।
क्या है होलिका दहन का महत्व?
हिरण्यकश्यप का बेटा प्रहलाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहा करता था। बेटे प्रहलाद की भक्ति हिरण्यकश्यप को पसंद नहीं आती थी। इसलिए उसने अपने बेटे प्रहलाद को सजा दिया कि वह होलिका के साथ आग में बैठ जाए। होलिका हिरण्यकश्यप की बहन थी जिसे आग नुकसान नहीं पहुंचा सकती थी। इसीलिए उसने अपने बेटे को होलिका की गोद पर बैठकर आग में बैठने की सजा सुनाई। जब होलिका का प्रहलाद को लेकर आग में बैठी तब वह जल गई लेकिन प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ। भगवान विष्णु की भक्ति ने प्रहलाद की जान बचा ली थी। जिसके बाद भगवान विष्णु ने नरसिम्हा का अवतार धारण किया और हिरण्यकश्यप का वध कर दिया। इस दिन को होलिका दहन कहा जाता है और इस दिन लोग होलिका जलाकर अपने सभी पापों को मिटा देते हैं।
होली की तिथि और मुहूर्त?
पंचांग के अनुसार, होली इस वर्ष 18 मार्च को पड़ रही है। पूर्णिमा तिथि 17 मार्च को 01:29 PM से प्रारंभ होगी और 18 मार्च को 12:47 पर समाप्त होगी।
होलिका दहन में इन पेड़ों की लकड़ियां ना जलाएं
होलिका दहन के दिन इन लकड़ियों को जलाना अशुभ माना गया है:-
1. होलिका दहन में वट यानी बरगद के पेड़ की लकड़ी जलाना अशुभ माना जाता है।
2. होलिका दहन में आम की लकड़ी को नहीं जलाना चाहिए। ऐसा करना काफी अशुभ माना जाता है।
होली के पर्व पर ना करें इन चीजों का दान
होली के मौके पर इन चीजों का दान ना करें
1. किताब और कॉपियों का दान ना करें
2. स्टील के बर्तन दान करने से घर में रहती है अशांति
3. प्लास्टिक के आइटम दान करने से आती है मुसीबतें
4. भूल से भी ना करें उपयोग किए हुए तेल का दान
5. पहने हुए कपड़े दान करने से स्वास्थ्य में आती है कमी
कब करना चाहिए होलिका दहन
हिंदू धर्म ग्रन्थों के अनुसार, होलिका दहन (Hoilika Dahan 2022 Date) पूर्णिमा तिथि में सूर्यास्त के बाद करना चाहिए, लेकिन यदि इस बीच भद्राकाल हो, तो भद्राकाल में होलिका दहन नहीं करना चाहिए, इसके लिए भद्राकाल के समाप्त होने का इंतजार करना चाहिए। होलिका दहन के लिए भद्रामुक्त पूर्णिमा तिथि का होना बहुत जरूरी है। हिंदू शास्त्रों में भद्राकाल को अशुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भद्राकाल में किया गया कोई भी काम सफल नहीं होता और उसके अशुभ परिणाम मिलते हैं। इस हिसाब से पंचांग देखें तो होली 19 मार्च (when is Holi in 2022) को मनाई जानी चाहिए।
होलिका दहन 2022 कब होगा
इस बार 17 तारीख को भद्रा काल है और मध्य रात्रि में भी भद्रा का साया बना हुआ है। इसलिए मध्यरात्रि से पहले होलिका दहन कर लें।
When is Holi in 2022 (होली कब है 2022)
हिंदू पंचांग के अनुसार रंगों का त्योहार होली का पावन पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। ऐसे में इस बार रंग गुलाल वाली होली 19 मार्च 2022, शनिवार को है। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को दोपहर 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। हालांकि कुछ लोग 18 मार्च को भी होली मना रहे हैं।
कब मनाई जाती है होली
रंगों का त्योहार होली देश के प्रमुख त्योहारों में से है जिसके पीछे कई मान्यताएं हैं। होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को आता है। रंग वाली होली से पहले होलिका दहन किया जाता है।


