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Navratri 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: मां कालरात्रि को चढ़ाएं गहरे रंग का लाल चादर, सातवें दिन लगाए ये है पूरा भोग

Chaitra Navratri 2022 Start Date, Puja Vidhi, Kalash Sthapna Muhurat, Timings, Samagri, Mantra: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज यानि 2 अप्रैल से प्रारंभ हो गया है। इन 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। अगर आप भी नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं तो यहां जानें तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त। हर दिन हर माता को अलग-अलग भोग चढ़ाया जाता है। जानिए सातवें दिन का भोग।

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलटाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलUpdated Apr 2, 2022, 22:08 IST
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Navratri 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: मां कालरात्रि को चढ़ाएं गहरे रंग का लाल चादर, सातवें दिन लगाए ये है पूरा भोग

Navratri 2022 Date, Puja Vidhi, Kalash Sthapna Muhurat, Samagri, Mantra: भारत में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हर्षोल्लास और श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। इन 9 दिनों में मां शक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा विधि अनुसार की जाती है। वैसे तो वर्ष में कुल 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व अधिक है। मान्यताओं के अनुसार, देवी दुर्गा की विधि अनुसार पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। मां शैलपुत्री को मातृ शक्ति यानी स्नेह, करुणा और ममता का स्वरूप माना जाता है। हर दिन हर माता को अलग-अलग भोग चढ़ाया जाता है। नवरात्र में जानिए जानिए सातवें दिन के भोग।।

Navratri 2022 Puja Vidhi And Shubh Muhurat: इस दिन होगा देवी दुर्गा का आगमन, नोट करें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्र आज से प्रारंभ, मां शैलपुत्री की पूजा की देखें सामग्री

कहा जाता है कि जो भक्त विधि अनुसार और श्रद्धा भाव से मां दुर्गा की आराधना करता है उसे यश, वैभव, सुख, समृद्धि, ज्ञान और स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। देवी दुर्गा की पूजा करने से शत्रुओं का विनाश होता है और हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। 

Navratri 2022 Colours: यह हैं नवरात्र के नौ शुभ रंग, दिन के अनुसार जानें रंगों का महत्व 

अगर आप भी देवी दुर्गा को समर्पित चैत्र नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं तो यहां जानें इस वर्ष चैत्र नवरात्रि कब से प्रारंभ हो रही है। इसके साथ इस लाइव ब्लॉग के जरिए चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय, मंत्र, आरती आदि नोट कर लें।

APR 02, 2022 20:04 IST

माता कालरात्रि को चढ़ाएं गहरे रंग का लाल चादर

देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप देवी कालरात्रि को समर्पित होता है। इस दिन देवी मां को गहरे लाल रंग का प्रसाद चढ़ाएं। गुड़ चढ़ाना उन्हें बेहद प्रसन्न करता है।

APR 02, 2022 19:09 IST

मां कात्यायनी के लिए लौकी, शहद का प्रसाद

मां दुर्गा का छठवां रूप कात्यायनी का है और इस दिन माता को प्रसन्न करने के लिए लौकी, शहद या हरे रंग का प्रसाद भोग में बनाना चाहिए।

APR 02, 2022 18:27 IST

स्कन्दमाता को पीला रंग पसंद


नवरात्र का पांचवां दिन देवी स्कन्दमाता का होता है। देवी माता को पीला रंग बेहद पसंद है। इस दिन देवी मां को पीला भोग लगाना चाहिए,जैसे केला या बेसन का हलवा या बेसन के लड्डू आदि।

APR 02, 2022 17:41 IST

देवी माता को लाल भोग चढ़ना चाहिए

नवरात्र का चौथे दिन मां कुष्मांडा को समर्पित होता है। इस दिन देवी माता को लाल भोग चढ़ना चाहिए। जैसे मालपुआ, हलवा या लाल मिठाई।

APR 02, 2022 17:12 IST

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का प्रसाद

नवरात्रि का तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। देवी चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी चीजें बेहद पसंद हैं और यही भोग उन्हें चढ़ाना चाहिए।   

APR 02, 2022 16:39 IST

देवी ब्रह्मचारिणी को पसंद है मिश्री, चीनी और पंचामृत

नवरात्रि में दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। देवी ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत बहुत पसंद है। ये भोग चढाकर आप उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं।

APR 02, 2022 16:04 IST

मां शैलपुत्री को चढ़ाएं ये भोग

नवरात्रि का पहला दिन देवी शैलपुत्री को समर्पित है। पर्वराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री का प्रिय रंग सफेद हैं। देवी मां को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के प्रथम दिन आपको उन्हें सफेद रंग का भोग अर्पित करना चाहिए। मखाने की खीर, सफेद मिठाई या फूल मखाना माता को भोग लगाने से देवी प्रसन्न होती हैं।

APR 02, 2022 15:22 IST

श्री रामरक्षास्तोत्र का पाठ बहुत ही पुण्यदायी

नवरात्र में प्रतिदिन ब्रम्हमुहूर्त में श्री रामरक्षास्तोत्र का पाठ बहुत ही पुण्यदायी है। किसी भी प्रकार के रोग व भय से मुक्त करने के लिए यह बहुत ही रामबाण उपाय है। घर के सभी सदस्य मिलकर घर पर माता का संकीर्तन करें व सुंदरकांड का पाठ करें।

APR 02, 2022 14:46 IST

Chaitra Navratri 2022: नमो नमो दुर्गे सुख करनी

नमो नमो दुर्गे सुख करनी
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी...
नवरात्रि की पावन शुभकामनाएं...

APR 02, 2022 14:26 IST

अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती ल‍िर‍िक्‍स ह‍िंदी में  

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

तेर भक्त जानो पर मैया भीड़ पड़ी है भारी,
दानव दल पर टूट पड़ो माँ कर के सिंह सवारी ।
सो सो सिंहों से है बलशाली,
है अष्‍ट भुजाओं वाली,
दुखिओं के दुखड़े हारती ।

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

माँ बेटे की है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता ।
सबपे करुना बरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखिओं के दुखड़े निवारती ।

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना,
हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना ।
सब की बिगड़ी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,

सतिओं के सत को सवारती ।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली। वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
मैया भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली, भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती, हम सब उतारे तेरी आरती॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

APR 02, 2022 14:02 IST

Navratri 2022 Upay

आज से नवरात्र प्रारंभ हो गए हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की विधि अनुसार पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा में लाल रंग की चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि लाल रंग मां दुर्गा का प्रिय रंग माना गया है। इसलिए माता रानी की पूजा में लाल फूल और लाल चुनरी के साथ आसन पर भी लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।

APR 02, 2022 13:34 IST

ऐसे जलाएं अखंड ज्योत

नवरात्र मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए बहुत शुभ अवसर माना गया है। इन नौ दिनों में लोग व्रत रख कर मां को खुश करने की कोशिश करते हैं। मां जगदंबे को प्रसन्न करने के लिए उनके आगे मिट्टी के 9 दीपक में अखंड ज्योत जलाएं। इसके साथ इस अखंड ज्योत को बुझने मत दें।

APR 02, 2022 13:05 IST

कन्या राशि के जातक करें यह उपाय

कन्या राशि के स्वामी बुध माने गए हैं। कन्या राशि वाले लोगों को मां दुर्गा की पूजा के दौरान उन्हें गुड़हल, गुलाब, गेंदा और हरसिंगार जैसे सुगंधित पुष्प अर्पित करने चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय करने से मनोरथ पूर्ण होती हैं। इसके साथ बुध के साथ अन्य ग्रहों की अनुकूलता भी प्राप्त होती है।

APR 02, 2022 12:38 IST

Chaitra Navratri 2022: कर्क राशि के जातक ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा

चंद्र को कर्क राशि का स्वामी माना गया है। मां शक्ति को प्रसन्न करने के लिए कर्क राशि के जातक नवरात्रि पर देवी को सफेद और गुलाबी फूल अर्पित करें जैसे श्वेत कमल, गेंदा, श्वेत कनेर, सदाबहार, गुडहल, चमेली, रातरानी। मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय करने से चंद्र जनित दोषों से मुक्ति मिलती है।

APR 02, 2022 12:08 IST

Maa Durga Ke Mantra: मां दुर्गा के मंत्र

1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
    शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।


2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

APR 02, 2022 11:38 IST

Chaitra Navratri 2022 Upay

अगर आपके घर में हमेशा झगड़ा या कलेश होता रहता है तो नवरात्र के पहले दिन से अंतिम दिन तक पान के पत्ते पर केसर लगा कर मां दुर्गा को अर्पित करें। ऐसा करने से घर में सुख, शांति बनी रहेगी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। 

APR 02, 2022 11:14 IST

Chaitra Navratri Puja Vidhi: नवरात्र में जरूर करें दुर्गा चालीसा का पाठ

मां दुर्गा चालीसा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥

शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥

अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥

शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥

दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥

देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

APR 02, 2022 10:48 IST

Navratri 2022: आज से शुरू हो रहा है नया संवत्सर

आज चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन से हिंदू कैलेंडर के अनुसार नया विक्रम संवत भी आरंभ हो रहा है। इस दिन से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2079 प्रारंभ हो रहा है। नव संवत्सर शुरू होने पर आज सभी 9 ग्रहों का राशि परिवर्तन होने वाला है, जिसकी वजह से सैकड़ों साल बाद दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। इस नए संवत्सर का नाम नल है और राजा शनिदेव और मंत्री गुरु हैं।

APR 02, 2022 10:18 IST

Chaitra Navratri 2022: घटस्थापना क्यों किया जाता है

आज से नवरात्रि प्रारंभ हो गई है, नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का विधान है। मान्यताओं के अनुसार, घटस्थापना करना लाभदायक माना गया है। कहा जाता है कि नवरात्रि पर कलश स्थापना करने से घर की सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर चली जाती हैं। 

APR 02, 2022 09:41 IST

नवरात्र पर बन रहे हैं यह शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2022 Shubh Muhurat)

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त: सुबह 6:03 से 8:31 तक

अभिजीत मुहूर्त: 12:13 am से 12:51 pm तक 

विजय मुहूर्त: 02:29 pm से 03:17 pm तक 

गोधुली मुहूर्त: 05:54 pm से 06:28 pm तक

ब्रह्म मुहूर्त: 04:38 am से 05:24 am तक

अमृत काल: 08:53 am से 10:32 am तक

APR 02, 2022 09:14 IST

मां दुर्गा जी की आरती (Chaitra Navratri 2022 Maa Durga Ji Ki Aarti) 

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको जगमद को।
उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ओम जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।
ओम जय अम्बे गौरी।

शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

तुम ही जग की माता, तुम ही भरता।
भक्तन की दुख हरता सुख संपत्ति करता।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।।
ओम जय अम्बे गौरी।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पावे।।
ओम जय अम्बे गौरी।।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

APR 02, 2022 08:51 IST

चैत्र नवरात्रि पर क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2022 Puja Muhurat)

आज से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो गई है। इस दिन सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहने वाला है। इस दौरान घटस्थापना करने के साथ मां दुर्गा और मां शैलपुत्री की पूजा करें। अगर आप इस मुहूर्त में घटस्थापना नहीं कर पाए तो अभिजित काल में 11:48 से 12:37 तक कलश स्थापना जरूर कर लें।

APR 02, 2022 08:14 IST

माता शैलपुत्री की पौराणिक कथा, मां शैलपुत्री की कहानी (Maa Shailputri Vrat Katha In Hindi)

मां शैलपुत्री को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में उन्होंने सभी देवी देवताओं व राजा महाराजाओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव का औघड़ रूप होने के कारण उन्हें आमंत्रित नहीं किया। जब देवी सती को अपने पिता द्वारा आयोजित इस विशाल यज्ञ के बारे में पता चला तो उनका मन यज्ञ में शामिल होने के लिए व्याकुल होने लगा। उन्होंने भोलेनाथ से अपनी इच्छा जताई, भोलेनाथ ने कहा कि किसी कारण रुष्ट होकर राजा दक्ष ने हमें यज्ञ में शामिल होने का न्योता नहीं दिया है। इसलिए बिना आमंत्रण के यज्ञ में शामिल होना कदाचित उचित नहीं है।

लेकिन देवी सती लगातार यज्ञ में शामिल होने के लिए भगवान शिव से कहती रही, माता सती के आग्रह पर भोलेनाथ ने उन्हें यज्ञ में शामिल होने की अनुमति दे दी। जब माता सती यज्ञ में पहुंची तो उन्होंने देखा के राजा दक्ष भगवान शिव के बारे में अपशब्द कह रहे थे। पति के इस अपमान को देख माता सती ने यज्ञ में कूदकर अपने प्रांण त्याग दिए। इसके बाद माता सती ने दूसरा जन्म शैलपुत्री के रूप में पर्वतराज हिमालय के घर लिया।

APR 02, 2022 07:53 IST

मां शैलपुत्री के मंत्र, Maa Shailputri Mantra

मां शैलपुत्री के मंत्र, Maa Shailputri Mantra

ओम् ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:।

ओम् शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।

ध्यान मंत्र (maa shailputri dhyan mantra)

वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।

APR 02, 2022 07:45 IST

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना आज सुबह 6 बजकर 1 मिनट से सुबह 8 बजकर 31 मिनट के बीच कर सकते हैं। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त में दोपहर 12 बजे से लेकर 12 बजकर 50 मिनट के बीच घटस्थापना कर सकते हैं। 

APR 02, 2022 07:40 IST

मां शैलपुत्री की आरती, Maa Shailputri Aarti

शैलपुत्री मां बैल पर सवार, करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।

पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि सिद्धि परवान करे तू। दये करे धनवान करे तू।

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने तेरी उतारी।
उसकी सगरी आस जगा दो। सगरे दुख तकलीफ मिटा दो।

घी का सुंदर दीप जलाकर। गोला गरी का भोग लगा कर।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित शीश झुकाएं।

जय गिरिराज किशोरी। शिव मुख चंद चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

APR 02, 2022 07:17 IST

शैलपुत्री की पूजा से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है

सफेद वस्त्र धारण किए हुए माता के दाहिने हांथ में त्रिशूल और बाएं हांथ में कमल का फूल शोभायमान है तथा माथे पर चंद्रमा सुशोभित है। माता बैल पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं। माता को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को सफेद रंग का फूल चढ़ाने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है। धार्मिक ग्रंथों की मानें तो मां शैलपुत्री सभी जीव जंतुओं की रक्षक मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सती ने शैलपुत्री के रूप में पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया था। 

APR 02, 2022 07:09 IST

मां शैलपुत्री की पूजा विधि

मां शैलपुत्री को मातृ शक्ति यानी स्नेह, करुणा और ममता का स्वरूप माना जाता है। माता अत्यंत सरल एवं सौम्य स्वभाव की हैं। पूर्व जन्म में मां शैलपुत्री राजा दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी थी। मान्यता है कि नवरात्रि के पहले दिन विधि विधान से मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और सभी कष्टों का निवारण होता है। तथा माता का आशीर्वाद अपने भक्तों पर सदैव बना रहता है।

APR 02, 2022 06:58 IST

पहले द‍िन होती है मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। मार्केण्डय पुराण के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज यानी शैलराज हिमालय की पुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने की वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। कहा जाता है कि माता शैलपुत्री का वाहन बैल है। जिसकी वजह से उन्हें वृषारूढ़ा के नाम से भी जाना जाता है। मां शैलपुत्री का स्वरूप बहुत अद्भुत माना गया है जो बैल की सवारी करती हैं। उनके बाएं हाथ में कमल और दाएं हाथ में त्रिशूल होता है। जो भक्त मां शैलपुत्री की पूजा करता है वह भयमुक्त रहता है। इसके साथ उसे शांति, यश, कीर्ति, धन, विद्या और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

APR 02, 2022 06:45 IST

देवी दुर्गा का घोड़े पर सवार होकर आने का मतलब

कहा जाता है कि जब देवी दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आती हैं तब युद्ध और विभीषिका जैसे हालात उत्पन्न होते हैं। और जब वह भैंस पर सवार होकर आती हैं तब कष्ट, रोग और प्रकृति के प्रकोप के प्रभाव बढ़ते हैं। वहीं, जब मां दुर्गा हाथी की सवारी से प्रस्थान करती हैं तब बरसात ज्यादा होती है। इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि जब मां शक्ति नौका पर आती हैं तब यह समय बहुत उत्तम माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब वह डोली में आती हैं और महामारी का अंदेशा होता है और जय माता रानी मुर्गा पर सवार होकर आती हैं तब दुख और कष्ट बढ़ता है। मान्यता के अनुसार, जब वह मनुष्य की सवारी से जाती हैं तब सुख-शांति बनी रहती है। 

APR 02, 2022 06:37 IST

यहां जानें क्या है चैत्र नवरात्रि का महत्व (Chaitra Navratri 2022 Mahatva) 

मां दुर्गा को समर्पित नवरात्रि के 9 दिन बेहद शुभ माने जाते हैं। कहा जाता है नवरात्रि का व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विशेष फल की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और सुख, समृद्धि, यश, वैभव, धन, सफलता आदि का वरदान मिलता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, जो भक्त नवरात्रि के 9 दिन व्रत रखता है उसका तन,‌मन और आत्मा शुद्ध हो जाती है। नवरात्रि का व्रत रखने वाले लोगों को उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। 

APR 02, 2022 06:29 IST

घोड़े पर सवार होकर आ रहीं माता

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है। वर्ष 2022 में चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल से शुरू हो रही है जो पूरे 9 दिन तक चलेगी। मां दुर्गा को समर्पित इन 9 दिनों में उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि व्रत रखने से तथा देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मां भगवती की साधना के लिए उत्तम चैत्र नवरात्र 2 अप्रैल से शुरू होकर 10 अप्रैल को समाप्त हो जाएगा। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है, इस दिन लोग मां दुर्गा के साथ उनके पहले स्वरूप की भी पूजा करते हैं। कहा जा रहा है कि इस वर्ष मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आने वाली हैं और भैंस पर उनकी विदाई होगी। 

APR 02, 2022 00:33 IST

माता शैलपुत्री की पौराणिक कथा, मां शैलपुत्री की कहानी (Maa Shailputri Vrat Katha In Hindi)

मां शैलपुत्री को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में उन्होंने सभी देवी देवताओं व राजा महाराजाओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव का औघड़ रूप होने के कारण उन्हें आमंत्रित नहीं किया। जब देवी सती को अपने पिता द्वारा आयोजित इस विशाल यज्ञ के बारे में पता चला तो उनका मन यज्ञ में शामिल होने के लिए व्याकुल होने लगा। उन्होंने भोलेनाथ से अपनी इच्छा जताई, भोलेनाथ ने कहा कि किसी कारण रुष्ट होकर राजा दक्ष ने हमें यज्ञ में शामिल होने का न्योता नहीं दिया है। इसलिए बिना आमंत्रण के यज्ञ में शामिल होना कदाचित उचित नहीं है।

लेकिन देवी सती लगातार यज्ञ में शामिल होने के लिए भगवान शिव से कहती रही, माता सती के आग्रह पर भोलेनाथ ने उन्हें यज्ञ में शामिल होने की अनुमति दे दी। जब माता सती यज्ञ में पहुंची तो उन्होंने देखा के राजा दक्ष भगवान शिव के बारे में अपशब्द कह रहे थे। पति के इस अपमान को देख माता सती ने यज्ञ में कूदकर अपने प्रांण त्याग दिए। इसके बाद माता सती ने दूसरा जन्म शैलपुत्री के रूप में पर्वतराज हिमालय के घर लिया।

APR 02, 2022 00:15 IST

Chaitra Navratri 2022: करें मां दुर्गा के मंत्र का जाप

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

APR 01, 2022 23:55 IST

Chaitra Navratri 2022: कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 2 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है। ऐसे में घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 2 अप्रैल को सुबह 6:10 से लेकर 8: 31 तक रहेगा। इसके साथ कलश स्थापना के लिए दोपहर में 12:00 से 12:50 तक भी शुभ मुहूर्त रहने वाला है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान होता है। इस दिन मां दुर्गा के साथ उनके पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा भी की जाती है। 

APR 01, 2022 23:39 IST

पहला दिन - 2 अप्रैल 2022: घटस्थापना/प्रतिपदा तिथि 

नवरात्रि का पहला दिन घटस्थापना से प्रारंभ होता है, इस दिन धर्म शास्त्रों के अनुसार लाल रंग का महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि लाल रंग जुनून, शुभता और बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। यह रंग मां शैलपुत्री का भी प्रिय माना गया है। 

APR 01, 2022 23:13 IST

Chaitra Navratrri 2022: मां शैलपुत्री के मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:

 

APR 01, 2022 22:33 IST

Chaitra Navratri 2022: मां शैलपुत्री जी की आरती

शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार। 
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी। 

पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे। 
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू। 

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी। 
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो। 

घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के। 
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं। 

जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे। 
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

APR 01, 2022 21:51 IST

Chaitra Navratri 2022 Puja Samagri

चौकी, लाल कपड़ा, लाल झंडा, कलश, कपूर, जौ, कुमकुम, लौंग, बताशे, आम के पत्ते, कलावा, नारियल, केले, घी, धूप, माचिस, जयफल, मिश्री, ज्योत, मिट्टी, मिट्टी का बर्तन, एक छोटी चुनरी, पान-सुपारी, एक बड़ी चुनरी, दीपक, माता का श्रृंगार का सामान, देवी की प्रतिमा या फोटो, फूलों का हार, उपला, सूखे मेवे, मिठाई, अगरबत्ती, लाल फूल, गंगाजल और दुर्गा सप्तशती या दुर्गा स्तुति आदि।

APR 01, 2022 21:26 IST

पहले दिन मां शैलपुत्री की होती है पूजा

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। मां शैलपुत्री का स्वरूप बहुत अद्भुत माना गया है जो बैल की सवारी करती हैं। उनके बाएं हाथ में कमल और दाएं हाथ में त्रिशूल होता है। जो भक्त मां शैलपुत्री की पूजा करता है वह भयमुक्त रहता है। इसके साथ उसे शांति, यश, कीर्ति, धन, विद्या और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

APR 01, 2022 20:46 IST

Chaitra Navratri 2022 Mantra: मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान करें इन मंत्रों का जाप

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्.
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

 

APR 01, 2022 20:18 IST

इस वर्ष घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा

कहा जा रहा है कि इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आने वाली हैं। माना जाता है कि जब दुर्गा मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं तब युद्ध और विभीषिका जैसे हालात उत्पन्न होते हैं।

APR 01, 2022 19:44 IST

Chaitra Navratri 2022 Maa Durga Ji Ki Aarti

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशिदिन ध्.वत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको जगमद को।
उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ओम जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।
ओम जय अम्बे गौरी।

शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

तुम ही जग की माता, तुम ही भरता।
भक्तन की दुख हरता सुख संपत्ति करता।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।।
ओम जय अम्बे गौरी।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति।।
ओम जय अम्बे गौरी।।

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पावे।।
ओम जय अम्बे गौरी।।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।


 

APR 01, 2022 19:15 IST

Chaitra Navratri 2022: किस दिशा में करना चाहिए घटस्थापना, जानें यहां 

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना के साथ होती है। कहा जाता है कि, घटस्थापना घर में पूर्व या उत्तर दिशा में करना चाहिए। इस दिशा में घट स्थापित करना शुभ एवं लाभदायक माना गया है।

APR 01, 2022 18:46 IST

Chaitra Navratri 2022 Ghatsthapna Muhurat 2022: किस मुहूर्त में करें घटस्थापना, जानें शुभ मुहूर्त 

वर्ष 2022 में चैत्र नवरात्रि पर घट स्थापना करने के लिए शुभ मुहूर्त 2 अप्रैल को सुबह 6:10 से 8:31 तक रहने वाला है। इसके साथ कलश स्थापना के लिए दोपहर 12:00 से 12:50 तक भी शुभ मुहूर्त रहेगा।

APR 01, 2022 18:16 IST

Chaitra Navratri 2022 Puja Vidhi: नवरात्रि में कैसे करें मां दुर्गा की आराधना? 

नवरात्रि के पहले दिन सुबह नित्य क्रिया से निवृत होने के बाद स्नान करें। इसके बाद अपने घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और आम के पत्तों का तोरण करें। इसके बाद अपने पूजा घर में लकड़ी की चौकी या आसन पर देवी दुर्गा की मूर्ति या प्रतिमा को स्थापित करें। देवी दुर्गा की मूर्ति या प्रतिमा को स्थापित करने से पहले चौकी पर स्वास्तिक बनाएं और अक्षत और रोली से टीका करने के बाद देवी दुर्गा को स्थापित करें। इसके बाद ईशान कोण में घट स्थापित करें।

APR 01, 2022 18:15 IST

Chaitra Navratri 2022 Shubh Muhurt: चैत्र नवरात्रि पर बन रहा है यह शुभ योग 

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की पहली तिथि पर रवि पुष्य नक्षत्र रहेगा। इसके साथ इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का शुभ योग भी बनने वाला है। 

APR 01, 2022 18:14 IST

Chaitra Navratri 2022 Start And End Date: चैत्र नवरात्रि 2022 का पंचांग

घटस्थापना/प्रतिपदा तिथि - 2 अप्रैल- घटस्थापना, शैलपुत्री पूजा

द्वितीया तिथि- 3 अप्रैल- ब्रह्मचारिणी पूजा

तृतीया तिथि- 4 अप्रैल- चन्द्रघन्टा पूजा

चतुर्थी तिथि- 5 अप्रैल- कुष्माण्डा पूजा

पंचमी तिथि- 6 अप्रैल- स्कन्दमाता पूजा

षष्ठी तिथि- 7 अप्रैल- कात्यायनी पूजा

सप्तमी तिथि- 8 अप्रैल- कालरात्रि पूजा

अष्टमी तिथि- 9 अप्रैल- दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजा

नवमी तिथि- 10 अप्रैल- महानवमी, सिद्धिदात्री पूजा

नवरात्रि व्रत पारण तिथि- 11 अप्रैल- नवरात्रि व्रत पारण

APR 01, 2022 18:14 IST

Chaitra Navratri 2022: कब से प्रारंभ हो रही है चैत्र नवरात्रि 2022

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2022 में चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल, शनिवार से प्रारंभ हो रही है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए 9 दिनों तक व्रत रखते हैं और श्रद्धा भाव से मां शक्ति की पूजा करते हैं।