यहां विराजते हैं 'कुंवारों के देवता', दर्शन मात्र से बनते हैं शादी के योग
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 22, 2025, 11:18 AM IST
Kuwaron Ke Devta Ka Mandir Kaha Hai: मध्यप्रदेश में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जहां कुंवारों के देवता विराजमान हैं। माना जाता है अगर किसी व्यक्ति की शादी नहीं हो रही हो तो वह इस मंदिर में दर्शन कर सकता है। इस मंदिर में दर्शन मात्र से शादी के योग बन जाते हैं। इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन को आते हैं और अपनी झोली भरकर ही वापस जाते हैं। आइए जानते हैं कि इस मंदिर में दर्शन करने कैसे जाएं।
यहां है कुंवारों के देवता का मंदिर
Kuwaron Ke Devta Ka Mandir Kaha Hai: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक अनोखा धार्मिक स्थल है, जहां अविवाहित युवक-युवतियां अपनी विवाह की कामना लेकर पहुंचते हैं। यहां स्थापित बिल्लम बावजी को स्थानीय लोग 'कुंवारों के देवता' के रूप में पूजते हैं। भक्तों की गहरी आस्था है कि इनके दर्शन और पूजन से योग्य जीवनसाथी मिलता है और विवाह के योग शीघ्र बन जाते हैं। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है, और अब यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। नीमच शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर जावद कस्बे की पुरानी धान मंडी क्षेत्र में यह देवस्थल स्थित है, जो श्री रिद्धि-सिद्धि गणपति मंदिर से जुड़ा हुआ है। यहां बिल्लम बावजी की चल मूर्ति विशेष अवधि में विराजमान की जाती है और दूर-दूर से लोग मनौती मांगने आते हैं। कई भक्तों का दावा है कि उनकी कामना यहां पूरी हुई और शादी हो गई।
कब होते हैं बिल्लम बावजी के दर्शन?
यह परंपरा मुख्य रूप से होली के बाद रंगपंचमी से शुरू होती है और रंग तेरस तक चलती है। इस दिनबिल्लम बावजी की मूर्ति को गणपति मंदिर से निकालकर विधि-विधान से पूजा की जाता है और नगर भ्रमण कराए जाने के साथ ही और पुरानी धान मंडी क्षेत्र में गणेश मंदिर के पास निर्धारित स्थान पर विराजमान किया जाता है। यह अवधि लगभग 9 दिनों की होती है, इस दौरान अविवाहित युवक-युवतियां रोजाना पूजा करने आते हैं और विवाह की मनोकामना मांगते हैं। माता-पिता भी अपने बच्चों की शादी के लिए यहां आते हैं और मन्नत मांगते हैं।
कैसे करें पूजन?
यहां पूजा की विधि सरल है। यहां भक्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक किसी भी समय दर्शन कर सकते हैं। सबसे पहले मंदिर में स्थापित सिद्धिविनायक गणेश जी की पूजा करें। उसके बाद धूप जलाएं, नारियल फोड़ें और बिल्लम बावजी को मीठा पान अर्पित करें। अंत में प्रतिमा के सामने दंडवत प्रणाम कर विवाह की मन्नत मांगें। पूजा के बाद चढ़ाया गया मीठा पान कुंवारे लड़के या लड़की को ग्रहण करना चाहिए, मान्यता है कि इससे मनोकामना जल्द पूरी होती है। परिजन भी अपने बच्चों के लिए मन्नत मांगते हैं और विधिवत पूजा कराते हैं।
50 साल से चली आ रही है परंपरा
स्थानीय भक्तों और पुजारियों का कहना है कि 50 वर्षों से अधिक समय से यह परंपरा चली आ रही है और पीढ़ी दर पीढ़ी लोग यहां आते हैं। पहले भक्तों की संख्या कम थी, लेकिन मनोकामनाओं के पूरा होने से अब यहां भारी भीड़ लगती है। पिछले कुछ वर्षों में हजारों कुंवारों ने दर्शन किए, जिनमें से सैकड़ों की शादियां हो चुकी हैं।
दूर-दूर से आते हैं भक्त
यह देवस्थल अब केवल नीमच या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा है। इटारसी, शाजापुर, ग्वालियर, अलीराजपुर जैसे जिलों के अलावा राजस्थान के भीलवाड़ा और महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों से लोग यहां पहुंचते हैं। कुछ भक्त तो मुंबई जैसे दूर के शहरों से भी आते हैं। 9 दिनों के इस विशेष दरबार में कुंवारों के साथ-साथ शादीशुदा दंपति भी आते हैं। कोई विवाह के लिए, तो कोई संतान सुख के लिए मन्नत मांगता है। यह स्थान कुंवारों के लिए चमत्कारिक देवस्थल बन चुका है, जहां सच्ची श्रद्धा से हर मनोकामना पूरी होने की उम्मीद रहती है।