अध्यात्म

बिहार में नहाय खाय कैसे होता है? जानें यूपी-बिहार के नहाय खाय की पूरी विधि

Chhath Puja Day 1 Nahay Khay Vidhi In Bihar: आज के छठ महापर्व की शुरूआत हो गई है और पहले ही दिन नहाय खाय मनाया जाता है। नहाय खाय यूपी और बिहार में कैसे किया जाता है, इसके बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं।

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बिहार में नहाय खाय कैसे होता है (pic credit: canva)

Chhath Puja Day 1 Nahay Khay Vidhi In Bihar: बिहार की मिट्टी में अध्यात्म, संस्कृति और परंपराओं की गहरी जड़ें हैं। छठ महापर्व इन्हीं परंपराओं का सबसे बड़ा उदाहरण है। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मइया की उपासना की जाती है और इस महापर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है। आज यानी 25 अक्टूबर को नहाय खाय ही है और यहां हम आपको बताते हैं कि बिहार में नहाय-खाय कैसे किया जाता है।

बिहार में नहाय खाय की विधि-

  • नहाय खाय के दिन व्रती महिलाएं सुबह सुबह गंगा, किसी पवित्र नदी या तालाब में स्नान करती हैं।
  • स्नान के बाद व्रती नये कपड़े पहनकर श्रृंगार करती हैं।
  • इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है।
  • स्नान के बाद ही नहाय खाय का प्रसाद यानी कद्दू-भात और चना दाल भी बनाया जाता है।
  • प्रसाद बनाते हुए छठी मैया के गीत गाए जाते हैं।
  • बता दें व्रती आज के दिन लहसुन-प्याज या कोई भी बाजार का सामान नहीं खाती हैं।
  • जब नहाय खाय का प्रसाद बन जाता है तो व्रती इस प्रसाद को खाती हैं।
  • बाद में पूरे परिवार को यही प्रसाद खिलाया जाता है।

नहाय खाय का महत्व-

नहाय-खाय के साथ ही घर का वातावरण आध्यात्मिक और पवित्र बन जाता है, मानो सूर्य की ऊर्जा हर कोने में नई चेतना भर देती है। नहाय-खाय के दिन से ही घरों में भक्ति गीत की आवाज गूंजने लगती है। नहाय खाय के दिन महिलाएं छठी मैया के गीत गाती हैं। नहाय-खाय हमें यह सिखाता है कि भक्ति की शुरुआत शरीर की सफाई से नहीं, बल्कि मन की शुद्धि से होती है। जब हम सरल, सात्त्विक और अनुशासित जीवन अपनाते हैं, तभी सच्ची उपासना संभव होती है। यह दिन एक नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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