Chhath Puja Day 1 Nahay Khay Vidhi In Bihar: बिहार की मिट्टी में अध्यात्म, संस्कृति और परंपराओं की गहरी जड़ें हैं। छठ महापर्व इन्हीं परंपराओं का सबसे बड़ा उदाहरण है। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मइया की उपासना की जाती है और इस महापर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है। आज यानी 25 अक्टूबर को नहाय खाय ही है और यहां हम आपको बताते हैं कि बिहार में नहाय-खाय कैसे किया जाता है।
बिहार में नहाय खाय की विधि-
- नहाय खाय के दिन व्रती महिलाएं सुबह सुबह गंगा, किसी पवित्र नदी या तालाब में स्नान करती हैं।
- स्नान के बाद व्रती नये कपड़े पहनकर श्रृंगार करती हैं।
- इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है।
- स्नान के बाद ही नहाय खाय का प्रसाद यानी कद्दू-भात और चना दाल भी बनाया जाता है।
- प्रसाद बनाते हुए छठी मैया के गीत गाए जाते हैं।
- बता दें व्रती आज के दिन लहसुन-प्याज या कोई भी बाजार का सामान नहीं खाती हैं।
- जब नहाय खाय का प्रसाद बन जाता है तो व्रती इस प्रसाद को खाती हैं।
- बाद में पूरे परिवार को यही प्रसाद खिलाया जाता है।
नहाय खाय का महत्व-
नहाय-खाय के साथ ही घर का वातावरण आध्यात्मिक और पवित्र बन जाता है, मानो सूर्य की ऊर्जा हर कोने में नई चेतना भर देती है। नहाय-खाय के दिन से ही घरों में भक्ति गीत की आवाज गूंजने लगती है। नहाय खाय के दिन महिलाएं छठी मैया के गीत गाती हैं। नहाय-खाय हमें यह सिखाता है कि भक्ति की शुरुआत शरीर की सफाई से नहीं, बल्कि मन की शुद्धि से होती है। जब हम सरल, सात्त्विक और अनुशासित जीवन अपनाते हैं, तभी सच्ची उपासना संभव होती है। यह दिन एक नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
