अध्यात्म

Basant Panchami 2027: अगले साल बसंत पंचमी कब मनाई जाएगी, क्या है सरस्वती पूजा 2027 की डेट

Basant Panchami 2027 mein kab hai (Basant Panchami 2027 Date): माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन सरस्वती पूजा भी होती है। यहां देखें कि बसंत पंचमी 2027 में कब पड़ेगी, क्या है सरस्वती पूजा 2027 की डेट, बसंत पंचमी सरस्वती पूजा किस दिन है 2027 में की जानकारी।

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Basant Panchami 2027 mein kab hai

Basant Panchami 2027 mein kab hai (Basant Panchami 2027 Date): बसंत पंचमी ऋतु बसंत का स्वागत करने वाला पर्व है। इसे वसंत पंचमी (vasant panchami) भी कहा जाता है। इस दिन सरस्वती पूजा भी होती है क्योंकि यह दिन मां सरस्वती, ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी, की उपासना और पूजा के लिए समर्पित है। यहां आप देख सकते हैं कि 2027 में बसंत पंचमी कब मनाई जाएगी, सरस्वती पूजा कब है 2027 की।

Basant Panchami 2027 mein kab hai

बसंत पंचमी का पर्व हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। बसंत पंचमी 2027 का त्योहार 11 फरवरी को गुरुवार के दिन मनाया जाएगा।

बसंत पंचमी 2027 की तिथि

बसंत पंचमी 2027 की तिथि का आरंभ 11 फरवरी 2027 को सुबह लगभग 3:04 बजे से होगा। वहीं इसका समापन 12 फरवरी सुबह लगभग 3:18 बजे होगा। इस तरह 11 फरवरी 2027 को पूरा दिन पंचमी की तिथि रहेगी।

बसंत पंचमी 2027 सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त (समय)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी 2027 पर सरस्वती पूजा का सबसे शुभ समय (मुहूर्त) 11 फरवरी को सुबह लगभग 07:03 बजे से दोपहर 12:35–12:36 बजे तक रहेगा।

बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी ऋतु बसंत (वसंत) का स्वागत करने वाला पर्व है। यह दिन मां सरस्वती, ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी, की उपासना और पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन पीला रंग विशेष महत्व रखता है। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, पीले फूल चढ़ाते हैं और पीले भोजन बनाते हैं। स्कूलों और घरों में बच्चों के विद्या आरंभ (अक्षराभ्यास/आचार्य पूजा) भी इसी दिन किया जाता है

मां सरस्वती कौन हैं

मां सरस्वती हिंदू धर्म में ज्ञान, विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मानी जाती हैं। उन्हें ब्रह्मा की मानस पुत्री कहा जाता है और वे सृष्टि को ज्ञान का प्रकाश देती हैं। मां सरस्वती का स्वरूप श्वेत वस्त्रधारी, वीणा धारण किए और कमल पर विराजमान बताया गया है, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है। वे अज्ञान, अंधकार और भ्रम को दूर कर विवेक प्रदान करती हैं। विद्यार्थी, कलाकार और विद्वान बुद्धि व सफलता की कामना से मां सरस्वती की पूजा करते हैं।

मां सरस्वती की वंदना

या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता।

या वीणा वरदण्ड मण्डित करा, या श्वेत पद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती, निःशेष जाड्यापहा॥

अर्थात -

जो कुंद के फूल, चंद्रमा और हिम के समान श्वेत हैं, श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथों में वीणा शोभायमान है और जो कमल आसन पर विराजमान हैं- वे भगवती मां सरस्वती हमारी रक्षा करें और हमारे अज्ञान को दूर करें।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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