बसंत पंचमी पर किस दिशा में करें सरस्वती पूजा? जानिए सही दिशा, पूजन का तरीका आदि सबकुछ
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 23, 2026, 08:16 AM IST
Basant Panchami Saraswati Puja Direction 2026: 23 जनवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व माता सरस्वती को समर्पित है। इस दिन माता सरस्वती का पूजन करने से जीवन में सफलता प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कि माता सरस्वती का पूजन किस दिशा में और कैसे करने शुभ रहेगा।
सरस्वती पूजा किस दिशा में करें
Basant Panchami Saraswati Puja Direction 2026: 23 जनवरी 2026, दिन शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन माता सरस्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इसी दिन माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इस कारण बसंत पंचमी की पूजा बेहद खास होती है, लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते कि सरस्वती पूजा किस दिशा में करनी चाहिए, ताकि पूजा का पूरा फल मिल सके। शास्त्रों के अनुसार पूजा की दिशा का सही होना बहुत जरूरी माना गया है।
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?
बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा के लिए उत्तर दिशा और पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा को ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा कहा जाता है, इसलिए इस दिशा में बैठकर सरस्वती पूजा करने से पढ़ाई, लेखन और कला से जुड़े कार्यों में लाभ मिलता है। वहीं पूर्व दिशा सूर्य की दिशा मानी जाती है, जो नई शुरुआत और बौद्धिक विकास का प्रतीक है। पूजा करते समय चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें और माता सरस्वती की प्रतिमा या चित्र भी उसी दिशा में स्थापित करें।
बसंत पंचमी ऐसे करें पूजा
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए आपको माता सरस्वती की मूर्ति या चित्र, पीले या सफेद फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप, घी या तेल, जल से भरा कलश, पीले फल और मिठाई की आवश्यकता होगी। इसके साथ किताबें, कॉपियां, कलम, पेंसिल, डायरी, लैपटॉप या वाद्य यंत्र भी पूजा स्थल पर रखें, क्योंकि इन्हें विद्या और कला का प्रतीक माना जाता है। 23 जनवरी 2026 को सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल को साफ कर उत्तर या पूर्व दिशा में चौकी पर पीला या सफेद कपड़ा बिछाएं।
माता सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाने के बाद सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें, फिर माता सरस्वती को चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें। पूजा के समय किताबें और लेखन सामग्री माता के सामने रखें और सरस्वती मंत्रों का जाप करें। अंत में फल या मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ ही सरस्वती माता से जीवन में तरक्की के लिए प्रार्थना करें। माता का ध्यान करें और मंत्रों का जाप करें।
इन मंत्रों का कर लें जाप
सरस्वती माता की पूजा में ‘ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे, कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥’और ‘ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः ॥’ आदि मंत्रों का जाप करें।
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का महत्व
बसंत पंचमी को विद्या आरंभ का श्रेष्ठ दिन माना जाता है। इस दिन सही दिशा में बैठकर श्रद्धा के साथ की गई सरस्वती पूजा से पढ़ाई में मन लगता है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और ज्ञान का विकास होता है। इसके साथ ही सभी प्रकार से मनोरथों की पूर्ति होती हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।