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Bajrang Baan Lyrics In Hindi Full : बजरंग बाण की पूरी लिरिक्स यहां पढ़ें, जानिए बजरंग बाण के फायदे और पाठ करने का तरीका

Bajrang Baan Lyrics In Hindi Full : हनुमान जयंती का पर्व बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान हनुमान के किसी भी स्तोत्र का पाठ करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि इस दिन अगर बजरंग बाण का पाठ किया जाए तो प्रभु सभी प्रकार की परेशानियों का अंत कर देते हैं। आइए जानते हैं कि बजरंग बाण क्या है और इसके लिरिक्स क्या हैं।

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बजरंग बाण के लिरिक्स

Bajrang Baan Lyrics In Hindi Full : 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। भगवान हनुमान की भक्ति में कई शक्तिशाली स्तोत्रों का वर्णन मिलता है, लेकिन बजरंग बाण का स्थान उनमें बेहद खास माना जाता है। यह केवल एक भक्ति पाठ नहीं है, बल्कि इसे एक ऐसा प्रभावशाली स्तोत्र माना गया है, जो सीधे संकटों पर प्रहार करने की शक्ति रखता है। यही कारण है कि इसे ‘संकट मोचक’ के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि जब व्यक्ति जीवन में कठिन परिस्थितियों से घिर जाता है, बार-बार प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिलती, या फिर डर, चिंता और नकारात्मकता उसे घेर लेती है, तब बजरंग बाण का पाठ बहुत लाभकारी साबित होता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां मानसिक तनाव, असुरक्षा और अनिश्चितता बढ़ती जा रही है, वहां ऐसे आध्यात्मिक उपाय लोगों को मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करते हैं। बजरंग बाण का पाठ व्यक्ति के मन को स्थिर करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और उसे नकारात्मक शक्तियों से बचाने में मदद करता है। हालांकि, इसे सामान्य पाठ की तरह नहीं, बल्कि पूरी श्रद्धा, विश्वास और सही नियमों के साथ करना चाहिए, तभी इसके प्रभाव को सही तरीके से अनुभव किया जा सकता है। हनुमान जयंती के दिन इसका पाठ करना बेहद ही प्रभावशाली माना जाता है। आइए जानते हैं बजरंग बाण क्या है।

बजरंग बाण के लिरिक्स (Bajrang Baan Lyrics)

(दोहा)

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।

(चौपाई)

जय हनुमन्त संत-हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।

जन के काज विलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धु बहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।

आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।

बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।

अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।

लाह समान लंक जरि गई। जय-जय धुनि सुरपुर में भई।।

अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होइ दुःख करहु निपाता।।

जय गिरधर जय-जय सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।

ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारु वज्र सम कीले।।

गदा वज्र तै बैरिहीं मारो। महाराज निज दास उबारो।।

सुनि हुंकार हुंकार दै धावो। वज्र गदा हनि विलंब न लावो।।

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर सीसा।।

सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। रामदूत धरु मारु धाय कै।।

जय हनुमंत अनंत अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।

वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।

पाय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।

जय अंजनी कुमार बलवंता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।

बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।

भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।

इन्हहिं मारु तोहि शपथ राम की। राखु नाथ मर्यादा नाम की।।

जनकसुता पति दास कहाओ। ता की शपथ विलंब न लाओ।।

जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।

शरण शरण परि जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।

उठु उठु चल तोहि राम दोहाई। पाय परौं कर जोरि मनाई।।

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।

अपने जन को कस न उबारो। सुमिरत होत आनंद हमारो।।

ताते विनती करौं पुकारि। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।

ऐसो बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।

हे बजरंग बाण सम धावो। मेटि सकल दुःख दरस दिखावो।।

हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूक अंत पछतैहौ।।

जनकी लाज जात एहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।

जयति जयति जय जय हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।

जयति जयति जय जय कपिराई। जयति जयति जय जय सुखदाई।।

जयति जयति जय राम पियारे। जयति जयति जय सिया दुलारे।।

जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति जय त्रिभुवन विख्याता।।

ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहिं लवलेशा।।

राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।

विधि शारदा सहित दिन-राति। गावत कपि के गुण बहु भांति।।

तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखौं विधि नाना।।

यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।

सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।

ऐहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।

याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बलवाना।।

मेटत आए दुःख क्षण माहीं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।

पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।

डीठ मूठ टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहिं त्रासै।।

भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।

प्रण कर पाठ करै मन लाई। अल्प मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।

आवृत ग्यारह प्रति दिन जापै। ता के छाह काल नहिं चापै।।

दै गुग्गुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेशा।।

यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिर कौन उबारै।।

शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर कांपै।।

तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।

(दोहा)

प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान।

तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।

बजरंग बाण पाठ के लाभ

बजरंग बाण का पाठ व्यक्ति के जीवन में मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर गहरा प्रभाव डालता है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से मन में चल रही चिंता और डर धीरे-धीरे कम होने लगते हैं और व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। मान्यता है कि यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करने में मदद करता है, जिससे अटके हुए काम बनने लगते हैं। जिन लोगों को बार-बार किसी न किसी समस्या का सामना करना पड़ता है या जिन्हें शत्रु बाधा और असुरक्षा का भय रहता है, उनके लिए यह पाठ विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही यह मन को शांत और स्थिर बनाता है, जिससे व्यक्ति बेहतर निर्णय ले पाता है।

कब करें बजरंग बाण का पाठ

वैसे तो बजरंग बाण का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष दिन ऐसे होते हैं जब इसका प्रभाव अधिक माना जाता है। इनमें से हनुमान जयंती भी एक है। इसके अलावा मंगलवार और शनिवार को भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए इन दिनों इसका पाठ करना ज्यादा शुभ माना जाता है। इसके अलावा, जब व्यक्ति जीवन में किसी बड़ी समस्या, डर या बाधा से गुजर रहा हो, तब भी इसका पाठ किया जा सकता है। किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पहले या मानसिक तनाव के समय भी इसे पढ़ना लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह मन को स्थिर और मजबूत बनाता है।

कैसे करें बजरंग बाण का पाठ

बजरंग बाण का पाठ करने के लिए सबसे पहले शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध होना जरूरी माना जाता है। इसके लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान हनुमान की मूर्ति या तस्वीर के सामने शांत मन से बैठें। पूजा स्थान पर दीपक और गुग्गल की धूपबत्ती जलाकर वातावरण को पवित्र बनाएं। इसके बाद पूरे ध्यान और श्रद्धा के साथ बजरंग बाण का पाठ करें। पाठ करते समय मन को भटकने न दें और पूरी एकाग्रता बनाए रखें। यह जरूरी है कि इसे जल्दी-जल्दी या केवल औपचारिकता के तौर पर न पढ़ा जाए, बल्कि सच्चे मन से किया जाए, तभी इसका प्रभाव महसूस होता है।

इन बातों का रखें ध्यान

बजरंग बाण को एक शक्तिशाली और प्रभावी पाठ माना जाता है, इसलिए इसे हमेशा श्रद्धा और सम्मान के साथ करना चाहिए। इसे केवल परखने या मजाक में पढ़ने से बचना चाहिए। पाठ करते समय मन शांत और एकाग्र होना चाहिए, क्योंकि भक्ति में ध्यान और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। नियमित रूप से और सही तरीके से किया गया पाठ ही बेहतर परिणाम देता है। इसलिए इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर करने से धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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