Bach Baras 2026 Date: बछ बारस का पर्व केवल पूजा की एक परंपरा नहीं है। इसमें मां की चिंता, प्रकृति के प्रति आभार और परिवार की खुशहाली की कामना जुड़ी है। इस दिन घर के आंगन में गाय और उसके बछड़े को सजाया जाता है। माथे पर रोली लगती है। फूल चढ़ाए जाते हैं और फिर मां अपने बच्चों की सलामती की प्रार्थना करती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बछ बारस का व्रत भाद्रपद महीने में रखा जाता है। बछ द्वादशी और नंदिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इसे गोवत्स द्वादशी भी कहते हैं। हालांकि कई जगहों पर गोवत्स द्वादशी का व्रत दीपावली से पहले रखा जाता है।
बछ बारस कब है 2026 में
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में बछ बारस का पर्व सोमवार, 7 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। द्वादशी तिथि 7 सितंबर की शाम से शुरू होकर 8 सितंबर की दोपहर तक रहेगी। पूजा के लिए प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद का समय विशेष माना गया है।
| बछ बारस 2026 की जानकारी | तारीख और समय |
|---|---|
| बछ बारस व्रत | सोमवार, 7 सितंबर 2026 |
| द्वादशी तिथि प्रारंभ | 7 सितंबर को शाम 5:03 बजे |
| द्वादशी तिथि समाप्त | 8 सितंबर को दोपहर 2:42 बजे |
| प्रदोष काल पूजा मुहूर्त | शाम 6:36 से रात 8:53 बजे तक |
| पूजा मुहूर्त की अवधि | 2 घंटे 17 मिनट |
पंचांग के अनुसार, पूजा के समय में शहर के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
बछ बारस और गोवत्स द्वादशी में क्या अंतर है
बछ बारस और गोवत्स द्वादशी दोनों में गाय और बछड़े की पूजा की जाती है, लेकिन इनके मनाए जाने का समय क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई परिवार भाद्रपद कृष्ण द्वादशी को बछ बारस मनाते हैं।
महाराष्ट्र और गुजरात में कार्तिक कृष्ण द्वादशी को मनाई जाने वाली गोवत्स द्वादशी को वसु बारस या वाघ बारस कहा जाता है। यह दिवाली से पहले आती है। वर्ष 2026 में कार्तिक मास वाली गोवत्स द्वादशी 5 नवंबर को होगी। इसलिए ऑनलाइन अलग-अलग तारीख देखकर भ्रमित न हों। यदि आप राजस्थान या उत्तर भारत की बछ बारस पूछ रहे हैं तो इसकी तारीख 7 सितंबर 2026 है।
क्यों रखा जाता है बछ बारस का व्रत
बछ बारस का व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन गौ माता और उनके बछड़े की पूजा होती है। गाय को ममता, पोषण और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
बछ बारस की पूजा कैसे करें
सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में गाय और बछड़े की पूजा करें।
- गाय और बछड़े को जल से स्नान कराएं या उनके चरण साफ करें।
- हल्दी, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
- उनके गले में फूलों की माला पहनाएं।
- भीगे हुए बाजरे, मोठ या चने का भोग लगाएं।
- घी का दीपक जलाकर आरती करें।
- बछ बारस व्रत कथा सुनें और संतान की कुशलता की प्रार्थना करें।
- आसपास गाय उपलब्ध न हो तो मिट्टी की गाय और बछड़े की प्रतिमा बनाकर पूजन करें।
बछ बारस के दिन दूध क्यों नहीं पिया जाता है
इस व्रत के नियम परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। कई घरों में इस दिन गेहूं से बनी चीजें और गाय के दूध से बने पदार्थ ग्रहण नहीं किए जाते। कुछ स्थानों पर चाकू से कटी सब्जी खाने से भी परहेज किया जाता है। भोजन में बाजरे की रोटी, अंकुरित अनाज, मोठ, चना या घर की परंपरा के अनुसार तैयार पकवान लिए जाते हैं।
