Ashadha Gupt Navratri 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 30 जून 2026 से आषाढ़ मास आरंभ हो गया है। इसी के साथ भक्त अब जानना चाहते हैं कि आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रि कब से आरंभ होंगे। बता दें कि गुप्त नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के गुप्त और शक्तिशाली स्वरूपों की पूजा की जाती है। आम नवरात्र की तरह इसमें बड़े आयोजन कम होते हैं। साधना, मंत्र जाप और ध्यान पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इसलिए इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है। जानें आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब से कब तक हैं।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 डेट
साल 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई, बुधवार से होगी। इसका समापन 23 जुलाई, गुरुवार को नवमी तिथि के साथ होगा।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब से हैं
आषाढ़ मास की शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि शुरू होती है। इस बार इसका कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा।
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 आरंभ: 15 जुलाई 2026 (बुधवार)
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 समापन: 23 जुलाई 2026 (गुरुवार)
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 घटस्थापना: 15 जुलाई को सुबह 5:33 बजे से 10:09 के बीच
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 नवमी और पारण: 23 जुलाई को गुरुवार के दिन
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि का पहला और सबसे महत्वपूर्ण काम घटस्थापना माना जाता है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 पर घटस्थापना 15 जुलाई 2026 को बुधवार के दिन सुबह 5:33 बजे से 10:09 बजे तक किया जा सकता है।
इसी समय कलश स्थापना कर मां शक्ति का आह्वान करना शुभ माना जाता है।
क्यों खास मानी जाती है गुप्त नवरात्रि
चैत्र और शारदीय नवरात्र पूरे देश में धूमधाम से मनाए जाते हैं। लेकिन गुप्त नवरात्रि अपेक्षाकृत शांत और साधना प्रधान होती है। मान्यता है कि इन दिनों की गई उपासना मन को स्थिर करती है और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाती है।
कई साधक, तांत्रिक परंपरा से जुड़े लोग और शक्ति उपासक इस समय विशेष मंत्रों का जाप, ध्यान और साधना करते हैं। हालांकि सामान्य श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष तांत्रिक विधि की आवश्यकता नहीं होती।
मां वाराही और दस महाविद्याओं की होती है आराधना
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को कई जगह वाराही नवरात्रि भी कहा जाता है। खासकर दक्षिण भारत की परंपराओं में इन नौ दिनों में मां वाराही की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि मां वाराही अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और नकारात्मक शक्तियों से बचाती हैं।
इसी दौरान दस महाविद्याओं की साधना भी की जाती है। इनमें मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला का विशेष स्थान है। इन स्वरूपों की उपासना शक्ति, ज्ञान, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है।
गुप्त नवरात्रि में कैसे करें पूजा
अगर आप सामान्य श्रद्धालु हैं तो भी सरल तरीके से मां की पूजा कर सकते हैं।
सुबह स्नान के बाद कलश स्थापित करें। मां दुर्गा का ध्यान करें। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप करें। घर में सात्विक वातावरण रखें। क्रोध, विवाद और नकारात्मक सोच से दूरी बनाने का प्रयास करें।
गुप्त नवरात्रि में मां को क्या अर्पित करें
गुप्त नवरात्रि में मां को सात्विक भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार मीठा पोंगल, अनार, काले उड़द से बने व्यंजन और घर का सादा सात्विक भोजन अर्पित किया जाता है। इसके साथ मौसमी फल, नारियल और मिश्री भी चढ़ाई जा सकती है।
