Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ महीने की अमावस्या को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी अमावस को आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन पितरों की शांति, तर्पण, पिंडदान, दान-पुण्य और आत्मचिंतन के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से किए गए कर्मों से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन की कई बाधाएं दूर होने लगती हैं। यहां जानें कि आषाढ़ी अमावस 2026 में कब है।
आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है
द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई 2026 को शाम 5:28 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई 2026 को दोपहर 4:02 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार आषाढ़ी अमावस्या का व्रत और धार्मिक कार्य 14 जुलाई, मंगलवार को किए जाएंगे। यानी साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या मंगलवार, 14 जुलाई को पड़ रही है।
आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व
अमावस्या तिथि को पितरों की पूजा और तर्पण के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में गिना जाता है। विशेष रूप से आषाढ़ अमावस्या का संबंध पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों या किसी स्वच्छ जलाशय में स्नान करके पितरों के नाम से तर्पण करने से उन्हें तृप्ति मिलती है।
ऐसा भी माना जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष हो या जिनके घर में बार-बार बाधाएं आती हों, वे इस दिन श्रद्धा से पितरों का स्मरण करें और दान-पुण्य करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
आषाढ़ अमावस्या पर क्या करना शुभ माना जाता है
आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो किसी नदी, सरोवर या तीर्थ स्थल पर स्नान करें। इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए तिल मिश्रित जल से तर्पण करें।
जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, अन्न, छाता, जल का पात्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान देना भी शुभ माना जाता है। घर में भगवान विष्णु और शिवजी का पूजन करने के साथ पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करना भी कई लोग शुभ मानते हैं।
आषाढ़ अमावस्या पर पितरों के लिए उपाय
अगर जीवन में लगातार आर्थिक परेशानी, मानसिक तनाव या कार्यों में रुकावट महसूस हो रही हो तो इस दिन कुछ सरल धार्मिक उपाय किए जा सकते हैं।
- पितरों के नाम से तिल और जल अर्पित करें।
- जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करें।
- पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाकर दीपक जलाएं।
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करें।
- पूर्वजों का स्मरण कर उनको नमन करें।
इन उपायों को आस्था और श्रद्धा के साथ करने पर मन को शांति मिलने की मान्यता है।
आषाढ़ अमावस्या पर किन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन क्रोध, विवाद और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। दान करते समय दिखावे की भावना नहीं रखनी चाहिए। यदि तर्पण की विधि की जानकारी न हो तो किसी जानकार पुरोहित के मार्गदर्शन में ही इसे करना उचित माना जाता है।
